मंडी – शुरू हुई 9 मील में लैंडस्लाइड एरिया की जियोटैग इन्वेस्टिगेशन 

“चंडीगढ़-मनाली नेशनल हाईवे पर मंडी जिला में 9 मील के पास दरकती पहाड़ी का समाधान खोजने का कार्य शुरू हो गया है। एनएचएआई ने इसकी जियोटैगिंग इन्वेस्टिगेशन करवाना शुरू कर दिया है”
 
मंडी 18 / 10 / 2024 नीतू कौशल की रिपोर्ट 
 
इस इन्वेस्टिगेशन के बाद यह पता चल पाएगा कि भविष्य में यहां पर दरकते पहाड़ को रोकने के प्रयास किए जाने चाहिए, सड़क को चौड़ा करने या फिर पुल बनाने की तरफ आगे बढ़ना चाहिए।
 
बता दें कि 9 मील का स्थान एनएचएआई के परेशानी का सबब बन गया है। हालांकि गत वर्ष 6 और 7 मील भी परेशानी पैदा कर चुके हैं लेकिन वहां पर एनएचएआई ने पहले ही टनल निर्माण की संभावनाएं तलाशना शुरू कर दिया है।
 
लेकिन इस बार 9 मील के दरकते पहाड़ ने एनएचएआई के सामने एक और मुसीबत खड़ी कर दी है। अब इसके समाधान के लिए एनएचएआई ने जियोटैग इन्वेस्टिगेशन करवाना शुरू कर दिया है।
 
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरूण चारी ने बताया कि जियोटैग इन्वेस्टिगेशन की रिपोर्ट के बाद ही यह तय हो पाएगा कि मौके पर क्या करना बेहतर रहेगा।
 
अभी यहां तीन विकल्प हैं जिनमें पहला दरकती पहाड़ी को स्टेबल करना, दूसरा मौजूदा सड़क को चौड़ा करना और तीसरा यहां पर पुल बनाना है। जो रिपोर्ट आएगी उसके आधार पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
 
बता दें कि मंडी से पंडोह के बीच इस बार 9 मील वाले प्वाइंट पर सबसे ज्यादा लैंडस्लाइड की घटनाएं देखने को मिली। यहां कई वाहन पहाड़ी से गिरे मलबे की चपेट में आए।
 
एचआरटीसी की एक बस पर तो पहाड़ी से पत्थर तक गिर गए थे। यहां हालत यह हो गए हैं कि सड़क हद से ज्यादा संकरी हो गई है। इसलिए एक समय में एकतरफा ट्रेफिक ही क्रॉस हो पाता है।
 
एक तरफ दरकता पहाड़ है तो दूसरी तरफ ब्यास नदी की ओर ले जाने वाली गहरी खाई। यदि यहां सड़क का मौजूदा हिस्सा जरा सा भी धंसता है तो फिर हाईवे पर यातायात पूरी तरह से बंद भी हो सकता है।
 
हालांकि अब बरसात का मौसम समाप्त हो गया है लेकिन यहां पर खतरा लगातार बना हुआ है। ऐसे में इसका स्थायी समाधान बेहद जरूरी है और इस तरफ एनएचएआई ने कार्य करना शुरू भी कर दिया है।