बहराइच हिंसा : जिलाधिकारी एसपी ने दिखाई बहादुरी
“जिस जगह पर हिंसा और आगजनी हो रही थी, अफसर उससे दूर पुलिस बल के साथ खड़े नजर आए। जबकि डीएम माेनिका रानी और एसपी वृंदा शुक्ला ने बहादुरी दिखाई और हिंसा की चपेट में आए इलाकों में जाकर हालात पर नियंत्रण करने की कवायद करती रहीं”
बहराइच 15 / 10 / 2024 मंगेश प्रजापति की रिपोर्ट
स्थानीय अफसरों की लापरवाही का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के मौके पर पहुंचने के बाद भी कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया।
बहराइच के एडिशनल एसपी ग्रामीण पवित्र मोहन त्रिपाठी मौके पर पहुंचने के बजाय एक कंपनी पीएसी लेकर दो किमी दूर खड़े थे।
एडीजी ने पिस्टल निकालकर उपद्रवियों को खदेड़ने के बाद एडिशनल एसपी को फटकार लगाई, जिसके बाद बाकी अधिकारी हरकत में आए, जिसके बाद संवेदनशील इलाकों में जाकर पुलिस बल को तैनात किया जाने लगा।
इससे आगजनी की घटनाओं पर काबू पाया जा सका। एडीजी कानून-व्यवस्था के साथ एडीजी जोन गोरखपुर केएस प्रताप कुमार और आईजी रेंज अमरेंद्र प्रताप सिंह पुलिस बल को साथ लेकर हिंसाग्रस्त इलाकों में हालात काबू करने निकले, जिसकी वजह से उपद्रवियों के पांव उखड़ गए।
सूत्रों के मुताबिक लापरवाही बरतने वाले स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर जल्द सख्त कार्रवाई की जा सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बहराइच में भड़की सांप्रदायिक हिंसा को गंभीरता से लेते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एडीजी कानून-व्यवस्था मंगलवार को भी बहराइच में कैंप करेंगे, जिसके बाद वापस आकर डीजीपी को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डीजीपी प्रशांत कुमार और अपर मुख्य सचिव गृह दीपक कुमार से रिपोर्ट लेने के बाद एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश और गृह सचिव डॉ. संजीव गुप्ता को हालात पर काबू पाने बहराइच भेजा।
इसके बाद स्थिति पर काबू पाया जा सका। हालांकि वहां तनाव बरकरार है। इसके मद्देनजर सरकार ने एक दर्जन अधिकारियों और अतिरिक्त पुलिस बल बहराइच भेजा है।
बता दें कि रविवार को बहराइच के महसी इलाके में प्रतिमा विसर्जन के लिए जा रहे रामगोपाल मिश्रा की गोली लगने से मौत बताने के बाद सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। बहराइच पुलिस इस पर काबू नहीं पा सकी।
इससे आक्रोशित लोगों ने सोमवार को कई हिस्सों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इसकी चपेट में बहराइच-लखनऊ हाईवे के कई गांव भी आ गए। इससे अफसरों के हाथ-पांव फूल गए और पुलिस बल को पीछे हटना पड़ा।
वहीं, मुख्यमंत्री ने सुबह गृह विभाग और पुलिस के उच्चाधिकारियों को तलब किया। इसमें हिंसा दोबारा होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर भेजने का आदेश दिया।
इसके बाद एडीजी कानून-व्यवस्था, गृह सचिव के अलावा चार एसपी रैंक के अधिकारी देवेश पांडेय, अजय कुमार, त्रिभुवन सिंह व अरुण कुमार सिंह को बहराइच भेजा गया।
इसके अलावा दो एएसपी, चार सीओ, छह कंपनी पीएसी और एक कंपनी आरएएफ को भी बहराइच भेजा गया। वहीं जोन और रेंज से भी कई एएसपी, सीओ, निरीक्षक, उपनिरीक्षक समेत सैकड़ों पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया।
सीएम के निर्देश पर बहराइच पहुंचे एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश को खुद सड़क पर उतरकर मोर्चा संभालना पड़ा। उन्होंने बहराइच-लखनऊ हाईवे पर स्थित एक गांव के बाहर जमा उपद्रवियों को पिस्टल लेकर दौड़ाया।
देर शाम तक एडीजी कानून-व्यवस्था बहराइच में कैंप करके पुलिस बल की तैनाती और आरोपियों की गिरफ्तारी की समीक्षा कर रहे थे।











