“उत्तर प्रदेश में अपराध और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए योगी सरकार ने तकनीक का सबसे बड़ा प्रहार किया है। शनिवार को ‘पुलिस मंथन-2025’ के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी पुलिस के डिजिटल शस्त्रागार में ‘यक्ष ऐप’ (Yaksh App) को शामिल किया”
लखनऊ 28 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
यह ऐप न केवल अपराधियों का कच्चा-चिट्ठा रखेगा, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से पुलिस को भविष्य के अपराधों को रोकने में भी सक्षम बनाएगा।
दशकों से यूपी पुलिस ‘बीट बुक’ के जरिए अपराधियों का रिकॉर्ड रखती थी, लेकिन अब इसका स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। ‘यक्ष ऐप’ AI और बिग डेटा एनालिसिस पर आधारित एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो सिपाही से लेकर उच्च अधिकारियों तक को रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध कराएगा।
सीएम योगी ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब हर अपराधी की डिजिटल निगरानी होगी और ‘बीट के अपराधी की जिम्मेदारी, बीट सिपाही के नाम’ होगी।
1. क्राइम GPT (Crime GPT): इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘क्राइम GPT’ फीचर है। यह बिल्कुल ChatGPT की तरह काम करता है। पुलिसकर्मी किसी अपराधी के पिछले रिकॉर्ड, उसके साथियों या अपराध करने के तरीके (Modus Operandi) के बारे में साधारण भाषा में सवाल पूछ सकेंगे और AI डेटा का विश्लेषण कर तुरंत सटीक जवाब देगा।
2. अपराधियों की ‘स्कोरिंग’ और ‘कलर कोडिंग’: अब अपराधी केवल नाम से नहीं, बल्कि अपने ‘क्राइम स्कोर’ से पहचाने जाएंगे। ऐप में अपराधी द्वारा किए गए जुर्म की गंभीरता, इस्तेमाल किए गए हथियार और समय के आधार पर उसे एक स्कोर दिया जाएगा।
साथ ही, संवेदनशीलता के आधार पर उन्हें अलग-अलग रंगों (Color Coding) में बांटा जाएगा, ताकि पुलिस सबसे खतरनाक अपराधियों पर पहले ध्यान दे सके।
3. एडवांस्ड गैंग एनालिसिस: अक्सर अपराधी अलग-अलग FIR में अलग-अलग साथियों के साथ पकड़े जाते हैं। यक्ष ऐप का AI इंजन हजारों FIR को स्कैन करके यह खुद बता देगा कि कौन-कौन से अपराधी मिलकर एक नया गैंग बना रहे हैं। इससे संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क को तोड़ना आसान होगा।
4. रीयल-टाइम लोकेशन अलर्ट: यदि कोई हिस्ट्रीशीटर या जिला बदर अपराधी अपना इलाका छोड़कर दूसरे जिले या थाने में जाता है, तो बीट सिपाही के ऐप पर रिपोर्ट दर्ज करते ही गंतव्य स्थान के पुलिसकर्मी को ‘ऑटोमैटिक अलर्ट’ मिल जाएगा। अपराधियों के लिए अब छिपना नामुमकिन होगा।
5. फेशियल और वॉयस सर्च: किसी भी संदिग्ध की पहचान के लिए ऐप में AI पावर्ड फेशियल रिकग्निशन की सुविधा दी गई है। साथ ही, फील्ड ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मी बोलकर (Voice Search) अपराधी की कुंडली निकाल सकेंगे।
यक्ष ऐप के जरिए पुलिसिंग में पारदर्शिता आएगी। टॉप-10 अपराधियों के चयन में अब मानवीय हस्तक्षेप कम होगा और डेटा तय करेगा कि कौन सबसे बड़ा खतरा है।
इसके अलावा, CCTNS पोर्टल पर चार्जशीट दाखिल होते ही अभियुक्त का विवरण सीधे ऐप पर रिफ्लेक्ट होने लगेगा, जिससे सजायाफ्ता अपराधियों की निगरानी आसान हो जाएगी।
ऐप के माध्यम से बीट कर्मी अपने क्षेत्र में होने वाली अवैध गतिविधियों जैसे- जुआ, अवैध शराब, मादक पदार्थों की तस्करी और पशु तस्करी की जानकारी तुरंत अपडेट करेंगे। इससे वरिष्ठ अधिकारियों को पता रहेगा कि किस क्षेत्र में किस तरह का अपराध पनप रहा है।
निष्कर्ष: ‘यक्ष ऐप’ का लॉन्च होना यूपी पुलिस को देश की सबसे आधुनिक पुलिस फोर्स बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर है। यह न केवल जांच की प्रक्रिया को तेज करेगा, बल्कि अपराधियों में तकनीक का खौफ भी पैदा करेगा।
| फीचर | लाभ |
| ऑटोमैटिक डेटा अपडेट | फाइलों को पलटने की जरूरत खत्म, अपराधी की हिस्ट्री एक क्लिक पर। |
| प्रेडिक्टिव पुलिसिंग | डेटा विश्लेषण से यह अंदाजा लगाना आसान होगा कि अगला अपराध कहाँ या कौन कर सकता है। |
| पारदर्शिता | अपराधियों की निगरानी में मानवीय चूक या मिलीभगत की संभावना कम होगी। |
| त्वरित कार्रवाई | किसी घटना के बाद संभावित अपराधियों की मार्किंग और उनकी वर्तमान लोकेशन तुरंत पता चलेगी। |
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