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लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण और परिसीमन बिल

लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण और परिसीमन बिल, मोदी सरकार के 12 वर्षों में पहली बार संविधान संशोधन विधेयक फेल

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

लोकसभा में शुक्रवार (17 अप्रैल) को महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त न कर पाने के कारण गिर गया।

पिछले 12 वर्षों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार द्वारा पेश किया गया कोई संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका है।

करीब 21 घंटे तक चली लंबी और गहन चर्चा के बाद विधेयक पर मतदान हुआ। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि कुल 528 सदस्यों ने मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया।

इनमें से 298 सांसदों ने विधेयक के पक्ष में और 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट डाला। चूंकि संविधान संशोधन के लिए 352 (दो-तिहाई) वोटों की आवश्यकता थी।

इसलिए यह बिल पास नहीं हो सका। इसके गिरते ही सरकार ने संबंधित दो अन्य विधेयकों पर भी मतदान नहीं कराने का निर्णय लिया।

सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी बयानबाजी

विधेयक गिरने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गहरी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह महिलाओं को सम्मान और अधिकार देने वाला ऐतिहासिक कदम था।

उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने एक ऐतिहासिक मौका गंवा दिया है, लेकिन महिलाओं को अधिकार दिलाने का सरकार का अभियान जारी रहेगा।

वहीं, नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इसे विपक्ष की जीत और संविधान की रक्षा बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल महिला आरक्षण का मुद्दा नहीं था, बल्कि परिसीमन की आड़ में चुनावी व्यवस्था बदलने और संविधान की मूल भावना पर हमला करने की कोशिश थी, जिसे विपक्ष ने एकजुट होकर विफल कर दिया।

अमित शाह का कड़ा प्रहार और बिल के प्रावधान

इससे पहले, 130 सांसदों (जिसमें 56 महिला सांसद शामिल थीं) की चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष को आड़े हाथों लिया।

उन्होंने कहा कि जो लोग परिसीमन का विरोध कर रहे हैं, वे असल में एससी-एसटी (SC-ST) की सीटें बढ़ने का विरोध कर रहे हैं।

शाह ने धर्म के आधार पर आरक्षण को खारिज करते हुए दक्षिणी और छोटे राज्यों को उचित प्रतिनिधित्व का भरोसा भी दिया था।

क्या था बिल में प्रस्ताव?

इस विधेयक में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर लोकसभा सीटों की अधिकतम संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव था।

साथ ही, 2029 के आम चुनावों से पहले लोकसभा, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने का प्रावधान किया गया था।

Santosh SETH

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