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‘परिसीमन महिला सशक्तिकरण नहीं, चुनावी नक्शा बदलने की कोशिश’ – राहुल गाँधी

लोकसभा में राहुल गांधी का प्रहार: “परिसीमन से महिला सशक्तिकरण नहीं, चुनावी मानचित्र बदलने की कोशिश”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

लोकसभा के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने चिर-परिचित अंदाज में सरकार पर तीखा हमला बोला।

अपने संबोधन के दौरान उन्होंने जहां कुछ हल्के-फुल्के क्षणों से सदन का माहौल खुशनुमा किया, वहीं परिसीमन, ओबीसी (OBC) अधिकारों और जातिगत जनगणना के मुद्दे पर सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल भी खड़े किए।

भाषण की शुरुआत में राहुल गांधी ने मजाकिया लहजे में कहा कि “प्रधानमंत्री और मेरे लिए ‘पत्नी वाला मुद्दा’ नहीं है।”

उनकी इस टिप्पणी पर पूरे सदन में ठहाके गूंज उठे। इसके अलावा, उन्होंने अपनी बहन प्रियंका गांधी का जिक्र करते हुए गृह मंत्री अमित शाह पर भी चुटकी ली।

राहुल ने कहा कि कल उन्होंने अपनी बहन को पांच मिनट में वह करते हुए देखा जो वे अपने 20 साल के राजनीतिक करियर में नहीं कर पाए—यानी अमित शाह को मुस्कुराने पर मजबूर करना।

‘परिसीमन से महिला सशक्तिकरण नहीं’

हंसी-मजाक के बाद राहुल गांधी ने गंभीर रुख अपनाते हुए महिला आरक्षण और परिसीमन के मुद्दे पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया।

महिलाओं को देश की सामूहिक सोच और कल्पना की ‘महत्वपूर्ण प्रेरक शक्ति’ बताते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल परिसीमन लागू कर देने से महिला सशक्तिकरण नहीं हो सकता।

उन्होंने सरकार से मांग की कि वह पुराने महिला आरक्षण बिल को वापस लेकर आए, विपक्ष उसे सदन में पास कराने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

ओबीसी और एससी-एसटी अधिकारों पर चिंता

सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि वर्तमान विधेयक के जरिए सरकार देश के चुनावी मानचित्र को अपने पक्ष में बदलने का प्रयास कर रही है और इसके लिए भारत की महिलाओं को ढाल बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार देश के ओबीसी भाई-बहनों को ताकत नहीं देना चाहती, बल्कि यह एससी और एसटी समुदायों के अधिकार छीनने की एक सोची-समझी साजिश है।

जातिगत जनगणना को लेकर उन्होंने दावा किया कि सरकार यह सुनिश्चित करने में लगी है कि अगले 15 वर्षों तक जाति जनगणना का राजनीतिक प्रतिनिधित्व से कोई संबंध न जुड़ पाए।

विपक्ष के नेता ने अपने भाषण के अंत में कहा कि भाजपा को अपनी सत्ता खिसकने का डर सता रहा है, और इसी बौखलाहट में वह भारतीय राजनीतिक मानचित्र को बदलने की कोशिश कर रही है।

Santosh SETH

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