बंगाल चुनाव: BJP की जीत में 'बांग्लादेश फैक्टर' का असर
बंगाल चुनाव : BJP की जीत में चला ‘बांग्लादेश फैक्टर’, पड़ोसी मुल्क की मीडिया ने ECI और TMC की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
कोलकाता/ढाका: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है, विशेषकर बांग्लादेश की सीमा से लगे जिलों में पार्टी ने क्लीन स्वीप किया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राज्य में चल रही सत्ता विरोधी लहर के साथ-साथ इस चुनाव में ‘बांग्लादेश फैक्टर’ ने एक बहुत बड़ी और निर्णायक भूमिका निभाई है।
दिलचस्प बात यह है कि बंगाल के इन चुनावी नतीजों और रणनीतियों की गूंज सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश की मीडिया में भी खूब सुनाई दे रही है।
क्या है बंगाल चुनाव में ‘बांग्लादेश फैक्टर’?
सीमावर्ती जिलों में भाजपा की इस शानदार जीत की जड़ें बांग्लादेश के हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों से जुड़ी हैं।
बांग्लादेश में हिंसक प्रदर्शनों के बाद जब शेख हसीना को सत्ता से बेदखल होना पड़ा, तो वहां इस्लामी ताकतों का प्रभाव बढ़ गया।
मुहम्मद यूनुस के 18 महीने के शासनकाल के दौरान बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ लगातार हिंसा की घटनाएं सामने आईं।
राजनीतिक विश्लेषक और लेखक योगेश श्रीवास्तव के अनुसार, सीमा पार चल रहे इस ‘इस्लामी अभियान’ के पश्चिम बंगाल में फैलने की आशंकाओं ने यहां के मतदाताओं को गहराई तक प्रभावित किया।
पश्चिम बंगाल के इतिहास में हिंदू कभी भी एक गुट के रूप में मतदान नहीं करते थे, लेकिन इस बार डर और असुरक्षा के माहौल के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा ने उन्हें एक एकजुट चुनावी गुट में बदलने में बड़ी सफलता हासिल की।
बांग्लादेशी मीडिया की पैनी नजर: ‘भारतीय गणतंत्र का भविष्य संकट में’
पश्चिम बंगाल के इन चुनावों पर बांग्लादेश में भी बारीकी से नज़र रखी जा रही है।
ढाका ट्रिब्यून: बांग्लादेश के प्रमुख प्रकाशन ‘ढाका ट्रिब्यून’ ने 5 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (कुल 823 सीटों) की मतगणना को व्यापक कवरेज देते हुए लिखा है कि इन चुनावों के नतीजे भारत के राजनीतिक परिदृश्य पर महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव डालेंगे।
प्रथम आलो: स्थानीय अखबार ‘प्रथम आलो’ ने तो अपने एक विश्लेषणात्मक लेख का शीर्षक ही दिया है- “पश्चिम बंगाल चुनाव: सिर्फ राज्य का नहीं बल्कि भारतीय गणतंत्र का भविष्य भी संकट में है।”
‘द डेली स्टार’ ने चुनाव आयोग और SIR प्रक्रिया को किया कटघरे में खड़ा
बांग्लादेश के प्रतिष्ठित अखबार ‘द डेली स्टार’ ने एक लेख प्रकाशित कर भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर सीधे सवाल उठाए हैं।
अखबार का मानना है कि भारत के चुनाव आयोग का जो निष्पक्ष इतिहास रहा है, वह अब धुंधला पड़ रहा है।
लेख में विशेष रूप से ‘SIR’ (स्पेशल इंटेंसिव रिव्यू) मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया की आलोचना की गई है।
अखबार के मुताबिक, कागजों पर यह नीति भले ही सही हो, लेकिन बंगाल में इसे जिस तरह से लागू किया गया, उसने भारी तादाद में मतदाताओं को निराश और क्षुब्ध कर दिया।
BJP के ‘मुस्लिम घुसपैठिए’ नैरेटिव और TMC के ‘सिंडिकेट राज’ पर तंज
बांग्लादेशी अखबार ने भाजपा के ‘मुस्लिम नैरेटिव’ की तार्किकता पर भी सवाल उठाया है। शुभेंदु अधिकारी के उस दावे (कि बंगाल में करीब 1 करोड़ बांग्लादेशी मुसलमान और रोहिंग्या हैं) पर तंज कसते हुए ‘द डेली स्टार’ ने लिखा है कि इतनी बड़ी आबादी आखिर राज्य में छिपी कहां है?
अखबार ने पूछा है कि कोई भी घुसपैठिया ऐसे राज्य में क्यों पनाह लेगा, जहां से खुद स्थानीय लोग रोज़गार की तलाश में दूसरे राज्यों में पलायन कर रहे हों?
लेख में कहा गया है कि इतनी लंबी चुनावी कवायद के बावजूद चुनाव आयोग ज़मीन पर एक भी तथाकथित घुसपैठिए की पहचान नहीं कर सका है।
हालांकि, बांग्लादेशी मीडिया का यह नज़रिया पूरी तरह से एकतरफा नहीं है। अखबार ने सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को भी आड़े हाथों लिया है।
लेख में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि टीएमसी का अपना दामन भी दागदार है और राज्य सरकार लगातार ‘सिंडिकेट राज’ (वसूली), बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और गहरी राजनीतिक साज़िशों जैसे गंभीर आरोपों से घिरी हुई है।
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