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पश्चिम बंगाल: लागू होगी आयुष्मान भारत योजना, देशभर में मिलेगा मुफ्त इलाज

पश्चिम बंगाल में स्वास्थ्य क्रांति: सीएम शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान, राज्य में लागू होगी ‘आयुष्मान भारत’ योजना”

कोलकाता/सॉल्टलेक: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को ‘आयुष्मान दिवस’ के विशेष अवसर पर राज्य के नागरिकों के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और बड़ी घोषणा की है।

सॉल्टलेक में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में ‘आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना’ और ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’ को लागू किया जा रहा है।

इसका लाभ पश्चिम बंगाल के कुल 1,867 अस्पतालों (1,240 निजी और 627 सरकारी) में मिलेगा, जहां मरीज पूरी तरह से कैशलेस इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे।

देशभर के 38,600 अस्पतालों में 5 लाख तक का मुफ्त इलाज

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब पश्चिम बंगाल के निवासियों को बेहतर इलाज के लिए केवल राज्य के अस्पतालों तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा।

इस नई व्यवस्था के तहत, लाभार्थी अब पूरे भारत में लगभग 38,600 से अधिक सूचीबद्ध अस्पतालों में अपना इलाज करा सकेंगे। इनमें सीएमसी वेल्लोर, मुंबई और चेन्नई जैसे शहरों के शीर्ष अस्पताल भी शामिल हैं।

1,950 प्रकार की बीमारियों का मिलेगा कवर

  • व्यापक कवरेज: नई योजना में करीब 1,950 प्रकार की बीमारियों के इलाज और मेडिकल टेस्ट को शामिल किया गया है, जो राज्य की पिछली योजना (1,700 टेस्ट/इलाज) की तुलना में बहुत अधिक है।

  • सभी को मिलेगा लाभ: जो परिवार आयुष्मान भारत के तय मापदंडों में शामिल नहीं हो पाएंगे (लगभग 80 लाख परिवार), उन्हें राज्य सरकार अपनी ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना’ के तहत शत-प्रतिशत कवर करेगी।

सस्ती दवाएं और आंखों की जांच के लिए विशेष पहल

मरीजों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्य के सरकारी अस्पतालों में 100 ‘अमृत’ (AMRIT) फार्मेसी और लगभग 480 ‘प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र’ खोले जाएंगे।

इसके साथ ही, आंखों की देखभाल के लिए एक विशेष राज्यव्यापी कार्यक्रम की भी शुरुआत की गई है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने स्वयं अपनी आंखों की जांच कराकर इस अभियान का शुभारंभ किया।

निजी अस्पतालों को आश्वासन और 1,000 करोड़ का केंद्रीय फंड

रामकृष्ण मिशन द्वारा संचालित अस्पतालों और कई निजी अस्पतालों ने रीइम्बोर्समेंट (प्रतिपूर्ति) दरों, विशेषकर श्रेणी-बी की दरों को लेकर कुछ चिंताएं जाहिर की थीं।

इस पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी ताकि मरीजों को बिना किसी बाधा के बेहतरीन इलाज मिल सके।

योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल को 1,000 करोड़ रुपये का प्रारंभिक फंड आवंटित किया है।

इस पूरी स्वास्थ्य योजना में वित्तीय योगदान का अनुपात 60:40 रहेगा (60 फीसदी केंद्र सरकार और 40 फीसदी राज्य सरकार)।

Santosh SETH

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