हम मान्यता प्राप्त संस्था हैं पंजीकरण की जरूरत नहीं – संघ प्रमुख

“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कांग्रेस नेताओं के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि संघ को व्यक्तियों के समूह के रूप में मान्यता प्राप्त है और इसका पंजीकरण कराना जरूरी नहीं है”

बंगलुरु 10 / 11 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भागवत ने एक सवाल-जवाब सत्र में कहा आरएसएस की स्थापना 1925 में हुई थी। क्या आप उम्मीद करते हैं कि हम ब्रिटिश सरकार के साथ पंजीकृत होते। उन्होंने आगे बताया कि आजादी के बाद भारत सरकार ने ऐसे संगठनों के लिए पंजीकरण को अनिवार्य नहीं बनाया है।

भागवत ने कहा हम ‘बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स’ के रूप में वर्गीकृत हैं और एक मान्यता प्राप्त संगठन हैं। संघ प्रमुख ने बताया कि आयकर विभाग और अदालतों ने भी आरएसएस को बॉडी ऑफ इंडिविजुअल्स के रूप में मान्यता दी है, जिसके कारण संगठन को आयकर से छूट मिली हुई है।

भागवत ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा हम पर तीन बार प्रतिबंध लगाया गया। अगर हम होते ही नहीं, तो सरकार ने किस पर प्रतिबंध लगाया था। उन्होंने आगे कहा कि कई चीजें हैं, जो पंजीकृत नहीं होतीं।

यहां तक कि हिंदू धर्म भी पंजीकृत नहीं है। जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत से पूछा गया कि क्या मुसलमानों को संघ में शामिल होने की अनुमति है, तो उन्होंने कहा संघ में किसी ब्राह्मण, किसी दूसरी जाति, किसी मुस्लिम या ईसाई को अलग से नहीं लिया जाता।

संघ में केवल हिंदू समाज के सदस्य आते हैं। उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि संघ में आने वाले व्यक्ति अपनी अलग पहचान घर पर छोडक़र आते हैं। भागवत ने कहा कि मुस्लिम हों, ईसाई हों या किसी भी पंथ के लोग सबका स्वागत है, लेकिन शाखा में आने के बाद सब भारत माता के बेटे माने जाते हैं।

एक अन्य सवाल के जवाब में भागवत ने कहा कि संघ में भगवा को गुरु मानते हैं, लेकिन हम तिरंगे का बहुत सम्मान करते हैं। 1933 में राष्ट्रीय ध्वज तय करने वाली समिति ने भगवा रंग की सिफारिश भी की थी, लेकिन महात्मा गांधी ने तीन रंगों वाला तिरंगा चुना।

भागवत ने कहा हमारा भगवा अपना है और तिरंगा हमारा राष्ट्रीय प्रतीक, दोनों में कोई टकराव नहीं है।