होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाज में लगी भीषण आग और मिसाइल हमले का दृश्य

अमेरिका-ईरान युद्ध: होर्मुज में जहाज में आग, परमाणु संयंत्र पर अमेरिकी हमला

महायुद्ध की ओर मध्य पूर्व: होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज में लगी भीषण आग, अमेरिका ने ईरान के परमाणु संयंत्र पर किया हमला”

नई दिल्ली/अंतरराष्ट्रीय डेस्क: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा टकराव अब एक खतरनाक युद्ध का रूप ले चुका है। यह युद्ध अब सैन्य ठिकानों से निकलकर दुनिया की लाइफलाइन कहे जाने वाले समुद्री रास्तों और संवेदनशील परमाणु प्रतिष्ठानों तक फैल गया है।

सोमवार तड़के दुनिया के सबसे अहम चोकपॉइंट ‘होर्मुज़ जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में ओमान के तट के पास एक कमर्शियल जहाज़ में भीषण आग लग गई। इस घटना ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट की स्थिति पैदा कर दी है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाज धू-धू कर जला, UKMTO का अलर्ट

ब्रिटिश सेना द्वारा संचालित ‘यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स’ (UKMTO) ने ओमान के पास एक व्यापारिक जहाज में आग लगने की पुष्टि की है और क्षेत्र में हाई अलर्ट जारी किया है।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आग का कारण क्या था और क्या यह सीधे तौर पर अमेरिका-ईरान टकराव से जुड़ा है।

गौरतलब है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल व्यापारिक तेल और प्राकृतिक गैस का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है।

ईरान अक्सर इस जलमार्ग पर नियंत्रण का दावा करते हुए जहाजों को निशाना बनाता रहा है।

अमेरिका का 9वीं रात प्रहार: निर्माणाधीन परमाणु संयंत्र पर गिराए बम

तनाव के बीच अमेरिका ने सोमवार तड़के ईरान पर लगातार नौवीं रात हवाई हमले किए। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड के अनुसार, इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को खत्म करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज़ में कमर्शियल जहाज़ों को धमकाने के लिए किया जा रहा है।

इस बार अमेरिका ने ईरान के बुनियादी ढांचों—जैसे पुलों और बिजली सुविधाओं को भी निशाना बनाया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने दावा किया है कि अमेरिकी हमलों में दक्षिण-पश्चिम ईरान के डारखोविन में बन रहे परमाणु ऊर्जा संयंत्र (Nuclear Power Plant) की साइट को भी निशाना बनाया गया है।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने साफ किया है कि यह संयंत्र निर्माण के शुरुआती चरण में था और वहां कोई परमाणु सामग्री मौजूद नहीं थी।

एक और अमेरिकी सैनिक की मौत

इस संघर्ष में अमेरिका को भी नुकसान उठाना पड़ा है। अमेरिकी सेना ने बताया कि इराक में एक ईरानी ड्रोन को मार गिराने के बाद उसे “नियंत्रित तरीके से नष्ट” करने के दौरान एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई।

जॉर्डन हमले के बाद मिले अवशेषों की जांच भी जारी है। संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 17 अमेरिकी सैनिक मारे जा चुके हैं।

ईरान का भीषण पलटवार: कुवैत, जॉर्डन और बहरीन पर दागी मिसाइलें

अमेरिका के हवाई अभियान के जवाब में ईरान ने पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सहयोगियों पर मिसाइलों और ड्रोनों की बारिश कर दी है।

  • जॉर्डन: जॉर्डन की सेना ने कई ईरानी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया और ईरानी राजनयिक को तलब कर कड़ा विरोध जताया।
  • कुवैत का डिसेलिनेशन प्लांट: कुवैत के पानी को खारापन-मुक्त करने वाले (डिसेलिनेशन) प्लांट पर दो दिनों में दूसरी बार हमला हुआ, जिससे वहां आग लग गई। कुवैत का 90% पीने का पानी इन्हीं प्लांट्स से आता है, जिससे वहां गहरा जल संकट पैदा होने की चिंता बढ़ गई है।
  • इज़राइल में अलर्ट: जॉर्डन के अकाबा शहर की ओर दागी गई मिसाइलों के मलबे से बचने के लिए इज़राइल ने अपने सीमावर्ती शहर इलात में इंटरसेप्टर मिसाइलें दागीं।

GCC ने बताया ‘युद्ध अपराध’

गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के महासचिव जसीम मोहम्मद अल-बुदैवी ने ईरान द्वारा आम नागरिकों के बुनियादी ढांचे (जैसे पानी और बिजली संयंत्रों) पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के तहत ‘युद्ध अपराध’ करार दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम ने तीसरे विश्व युद्ध जैसी आशंकाओं को जन्म दे दिया है, क्योंकि इस युद्ध की आंच अब वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को सीधे तौर पर झुलसाने लगी है।

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