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US-ईरान टकराव: अमेरिका ने डुबोया ईरानी जहाज, भारत ने दी पनाह

” हिंद महासागर में महायुद्ध की आहट: अमेरिका ने डुबोया ईरानी युद्धपोत ‘IRIS देना’, भारत ने दूसरे पोत ‘IRIS लवन’ को दी पनाह “

नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

हिंद महासागर का शांत पानी अब वैश्विक शक्तियों के बीच सीधे टकराव का नया ‘वॉर जोन’ (War Zone) बन गया है।

एक तरफ जहां अमेरिकी सबमरीन (पनडुब्बी) ने टॉरपीडो से हमला कर ईरानी युद्धपोत ‘IRIS देना’ (IRIS Dena) को डुबो दिया।

वहीं दूसरी ओर भारत ने अपनी कूटनीतिक तटस्थता और मानवीय दृष्टिकोण का परिचय देते हुए ईरान के एक अन्य नौसैनिक पोत ‘IRIS लवन’ (IRIS Lavan) को कोच्चि में सुरक्षित पनाह (Safe Harbor) दी है।

अमेरिका का घातक हमला: समुद्र में ‘शांत मौत’

4 मार्च को ईरानी फ्रिगेट ‘IRIS देना’, जो विशाखापत्तनम में एक सैन्य अभ्यास के बाद वापस लौट रहा था, दक्षिणी श्रीलंका के गाले पोर्ट से लगभग 40 नॉटिकल मील दूर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में अमेरिकी सबमरीन के हमले का शिकार हो गया।

  • 80 से ज्यादा नाविकों की मौत : जहाज ने डूबने से पहले ‘डिस्ट्रेस कॉल’ जारी की थी, लेकिन श्रीलंका की रेस्क्यू टीम के पहुंचने से पहले ही यह डूब गया। इस हमले में 80 से अधिक ईरानी नाविक मारे गए (जहाज पर कुल 130 नाविक सवार थे)।

  • पेंटागन की पुष्टि : अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे टॉरपीडो से हुई “शांत मौत” करार दिया है।

  • उन्होंने स्पष्ट किया कि यह हमला 28 फरवरी से ईरान पर शुरू हुए अमेरिका-इजराइल के संयुक्त हमलों के विस्तार का हिस्सा है।

ईरान का गुस्सा और भारत पर उठे सवाल

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए इसे “समुद्र में जुल्म” बताया है।

उन्होंने ‘IRIS देना’ को “भारत की नौसेना का मेहमान” बताते हुए अमेरिका को चेतावनी दी कि उसे इस मिसाल को कायम करने का भारी पछतावा होगा।

मेहमान जहाज को न बचा पाने के आरोपों के बीच भारतीय नौसेना ने स्पष्टीकरण दिया कि डिस्ट्रेस सिग्नल मिलते ही भारत ने सर्च-एंड-रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया था।

श्रीलंकाई टीम की मदद के लिए एक लंबी दूरी का समुद्री पेट्रोल एयरक्राफ्ट, ‘INS तरंगिनी’ और ‘INS इक्षक’ को तुरंत लापता लोगों की तलाश के लिए मौके पर भेजा गया था।

भारत की कूटनीति : ‘IRIS लवन’ को कोच्चि में सेफ हार्बर

जहां एक तरफ ईरान का एक जहाज डूब गया, वहीं भारत ने मानवीय आधार पर दूसरे ईरानी जहाज की जान बचा ली।

28 फरवरी (जिस दिन अमेरिका-इजराइल ने ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए थे) को ईरान ने अपने दूसरे पोत ‘IRIS लवन’ के लिए तत्काल डॉकिंग की अनुमति मांगी थी, क्योंकि उसमें गंभीर तकनीकी दिक्कतें आ गई थीं।

भारत ने 1 मार्च को मंजूरी दी और 4 मार्च को यह पोत कोच्चि पहुंचा। फिलहाल इस जहाज के 183 क्रू मेंबर्स को कोच्चि में नौसैनिक सुविधाओं में ठहराया गया है।

यह पूरा घटनाक्रम हिंद महासागर में बढ़ते सैन्यीकरण का संकेत है। भारत का यह कदम उसकी ‘मानवीय कूटनीति’ को तो दर्शाता है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच यह बढ़ता तनाव भारत की तटस्थता की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है।

Santosh SETH

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