होर्मुज में ईरान की फायरिंग, 20 लाख बैरल तेल भरे 2 भारतीय जहाजों को लौटना पड़ा वापस
होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर तनाव: ईरान ने टैंकर पर की फायरिंग, 20 लाख बैरल तेल से भरे भारतीय जहाजों को लौटना पड़ा वापस
नई दिल्ली/तेहरान: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदों को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब ईरान ने अपना फैसला पलटते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में फिर से सख्त पाबंदियां लागू कर दीं।
तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड की दो हथियारबंद छोटी नावों (गन बोट) ने एक कमर्शियल टैंकर के पास आकर उस पर गोलियां चला दीं।
इस अप्रत्याशित गोलीबारी के कारण खाड़ी में गुजर रहे दो भारतीय जहाजों को बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा।
भारतीय जहाजों का बदला रास्ता, ईरानी राजदूत तलब
समुद्र में जहाजों की लोकेशन ट्रैक करने वाली वेबसाइट ‘टैंकर ट्रैकर्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, गोलीबारी की खबर मिलते ही होर्मुज की खाड़ी से गुजरने की कोशिश कर रहे दो भारतीय जहाजों ने तुरंत अपना रास्ता बदल लिया।
इनमें से एक भारतीय झंडे वाला बहुत बड़ा टैंकर था, जिसमें 20 लाख बैरल इराकी तेल लदा हुआ था। भारत सरकार ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया है।
भारत ने तुरंत कार्रवाई करते हुए ईरानी राजदूत को तलब कर अपनी चिंता जाहिर की है। सरकार की तरफ से बताया गया है कि ‘डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग’ पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और सभी भारतीय जहाजों व उनके कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है।
ईरान का यू-टर्न और हमले की वजह
दिलचस्प बात यह है कि महज़ एक दिन पहले ही ईरान ने ऐलान किया था कि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से खोल दिया गया है।
लेकिन, अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाकेबंदी वाली कथित धमकी के बाद ईरान ने अपना रुख कड़ा कर लिया।
ईरान का तर्क है कि अमेरिका ने उसके बंदरगाहों और जहाजों की नाकेबंदी कर रखी है, जिसके जवाब में उसे होर्मुज पर फिर से पाबंदी लगाने का यह सख्त कदम उठाना पड़ा है।
ईरान ने साफ कर दिया है कि बिना उसकी इजाजत के कोई भी जहाज इस रास्ते से नहीं गुजर पाएगा।
टैंकर और क्रू सुरक्षित, गहराया ऊर्जा संकट का खतरा
ब्रिटेन की मिलिट्री के ‘यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस’ (UKMTO) सेंटर ने पुष्टि की है कि जिस टैंकर पर गोलियां चलाई गईं, वह और उसका स्टाफ फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित है। हालांकि, सुरक्षा कारणों से जहाज का नाम और मंजिल का खुलासा नहीं किया गया है।
इस घटना ने वैश्विक बाजार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अगर इसी तरह बरकरार रहा और 22 अप्रैल को खत्म हो रहे दो हफ्ते के युद्धविराम तक कोई ठोस समझौता नहीं हुआ, तो होर्मुज का यह अहम व्यापारिक मार्ग पूरी तरह बंद हो सकता है।
यदि ऐसा हुआ, तो दुनिया भर में तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह टूट जाएगी और एक बड़े वैश्विक ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।
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