UP चुनाव 2027: सुभासपा करेगी सपा की धार कुंद; NDA से मांगी 32 सीटें
🗳️ UP चुनाव 2027: एक्टिव हुए राजभर, NDA में मांगी 32 सीटें, सीधे अखिलेश के अभेद्य किले ‘आजमगढ़’ पर ठोका दावा”
लखनऊ: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों (UP Assembly Elections) की सुगबुगाहट अभी से तेज हो गई है।
राजनीतिक दलों ने अपनी गोटियां बिछानी शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन के अहम घटक दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) ने एक बड़ा सियासी दांव चल दिया है।
सुभासपा ने 2027 के लिए अभी से अपनी चुनावी तैयारियां शुरू करते हुए एनडीए के अंदर 32 सीटों पर मजबूत दावेदारी पेश कर दी है।
‘The Politics Again’ की इस विशेष रिपोर्ट में आइए जानते हैं राजभर के इस बड़े सियासी प्लान और उनके टारगेट आजमगढ़ की पूरी कहानी:
🎯 टारगेट आजमगढ़: सपा के ‘गढ़’ में सेंध लगाने की तैयारी
सुभासपा के राष्ट्रीय महासचिव और मुख्य प्रवक्ता अरुण राजभर ने इस दावेदारी की पुष्टि करते हुए बताया कि पार्टी जमीनी स्तर पर काम कर रही है।
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32 सीटों की मांग: उन्होंने स्पष्ट किया कि सुभासपा ने एनडीए में 32 विधानसभा सीटों पर अपनी हिस्सेदारी मांगी है।
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अखिलेश के गढ़ पर नजर: राजभर ने बताया कि उनकी पार्टी का मुख्य मकसद समाजवादी पार्टी (SP) के मजबूत गढ़ आजमगढ़ (Azamgarh) पर कब्जा करना है।
अरुण राजभर ने दावा किया, “मैं खुद अतरौलिया विधानसभा में सक्रिय हूं और वहीं से एनडीए का उम्मीदवार रहूंगा। इस पर हमारी बातचीत हो चुकी है।” सुभासपा ने आजमगढ़ जिले की मेहनगर, दीदारगंज और अतरौलिया सीटों पर अपनी दावेदारी पेश की है।
🤝 BJP का रिएक्शन: ‘शीर्ष नेतृत्व लेगा फैसला’
सुभासपा की इस बड़ी मांग पर बीजेपी ने बेहद सधी हुई प्रतिक्रिया दी है।
यूपी बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता हरिश्चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि सभी नीतिगत विषयों पर घटक दलों के सम्मानित नेताओं से आपसी विचार-विमर्श के बाद एनडीए का ‘शीर्ष नेतृत्व’ ही अंतिम निर्णय करता है। चुनाव के समय सीटों के बंटवारे पर आपसी सहमति से ही फैसला होगा।
📉 सपा को सबक सिखाने का दावा: राजभर का इतिहास
अरुण राजभर ने सीधे तौर पर सपा को चुनौती देते हुए कहा कि पिछली बार (2022) विधानसभा चुनावों में पूर्वी उत्तर प्रदेश में सपा को जो ज्यादा सीटें मिली थीं,
वह मुख्य रूप से ओम प्रकाश राजभर की ताकत की वजह से थीं। उन्होंने दावा किया कि इस बार पूर्वी यूपी में सपा को ‘कड़ा सबक सिखाया जाएगा।’
सुभासपा का चुनावी सफर:
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चुनाव वर्ष |
गठबंधन |
लड़ी गई सीटें |
जीती गई सीटें |
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2017 |
एनडीए (NDA) |
8 |
4 |
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2022 |
सपा (SP) के साथ |
19 |
6 |
(नोट: 2022 चुनाव के कुछ माह बाद ही राजभर ने सपा से नाता तोड़ लिया और वापस एनडीए में शामिल हो गए।)
🧠 एक्सपर्ट्स की राय: अखिलेश के PDA की काट बनेंगे राजभर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) नारे की धार को कुंद करने के लिए एनडीए ने ओमप्रकाश राजभर को सबसे आगे रखा है।
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राजभर अब सपा के सबसे बड़े एमवाई (MY – मुस्लिम-यादव) समीकरण को चुनौती दे रहे हैं।
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वे यादवों पर हमले के साथ-साथ अब ‘हिंदुत्व’ के एजेंडे को भी प्रमुखता से उठा रहे हैं, जो उनकी एक सोची-समझी सियासी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
नोट: उत्तर प्रदेश की राजनीति, आगामी विधानसभा चुनावों (2027) की तैयारियों और सियासी गठबंधनों की हर अंदरूनी खबर के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल ‘द पॉलिटिक्स अगेन’ (The Politics Again) पर।











