UGC फंडिंग और PM-USHA: केंद्रीय विश्वविद्यालयों को मिले ₹73,148 करोड़
उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव: यूजीसी ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों को दिए 73 हजार करोड़, राज्यों के लिए PM-USHA से हो रही मदद”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, पहुंच और संस्थागत स्वायत्तता को लेकर केंद्र सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं।
राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की फंडिंग, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत ढांचागत सुधारों और ‘प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान’ (PM-USHA) की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी।
यूजीसी की फंडिंग: केंद्रीय विश्वविद्यालयों पर विशेष फोकस
शिक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान यूजीसी को मिलने वाले फंड में लगातार बढ़ोतरी हुई है।
इस 5 साल की अवधि में यूजीसी ने कुल फंड में से केंद्रीय विश्वविद्यालयों को 73,148.65 करोड़ रुपये और ‘डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी’ को 2,743.04 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
पिछले पांच वर्षों में यूजीसी को जारी फंड और व्यय का विवरण:
| वित्तीय वर्ष | जारी किया गया फंड (करोड़ रुपये में) | व्यय (करोड़ रुपये में) |
| 2021-22 | 13,839.43 | 13,606.52 |
| 2022-23 | 16,859.87 | 16,080.55 |
| 2023-24 | 19,054.74 | 18,676.31 |
| 2024-25 | 19,770.47 | 19,742.07 |
| 2025-26 | 20,527.43 | 20,507.48 |
राज्यों के लिए रूसा (RUSA) अब बना PM-USHA
शिक्षा राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि आरयूएसए (रूसा) लागू होने के बाद से यूजीसी राज्य विश्वविद्यालयों को सीधे तौर पर कोई विकास अनुदान नहीं देता है।
राज्यों के उच्च शिक्षण संस्थानों को मजबूत करने के लिए 2013 में ‘राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान’ (RUSA) शुरू किया गया था।
जून 2023 में सरकार ने इसका तीसरा चरण ‘प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान’ (PM-USHA) के रूप में लॉन्च किया।
PM-USHA के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हॉस्टल, शैक्षणिक और प्रशासनिक भवन, लैब और अन्य बुनियादी सुविधाओं के निर्माण के लिए सीधे फंड दिया जाता है।
चालू वित्तीय वर्ष (2026-27 में 6 अगस्त तक) में राज्यों को 507.00 करोड़ रुपये का केंद्रीय हिस्सा जारी किया जा चुका है।
नोट: पंजाब विश्वविद्यालय (अंतर-राज्यीय निकाय कॉर्पोरेट) को अपवाद के तौर पर 2021-22 से 2025-26 के बीच निश्चित वेतन अनुदान के रूप में 1,818.46 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।
संस्थागत स्वायत्तता और नया शिक्षा विधेयक
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 एक ‘हल्के लेकिन सख्त’ (light but tight) नियामक ढांचे की वकालत करती है, जहां पारदर्शिता के साथ-साथ नवाचार को बढ़ावा देने के लिए संस्थानों को स्वायत्तता दी जाए।
इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए शिक्षा मंत्रालय ने 15 दिसंबर 2025 को लोकसभा में ‘विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025’ पेश किया है।
उच्च शिक्षा के प्रशासन और मानकों में सुधार लाने वाले इस अहम विधेयक को फिलहाल विचार-विमर्श के लिए संसद के दोनों सदनों की संयुक्त समिति के पास भेजा गया है।











