A tribal student using an AI-enabled tablet for learning in their mother tongue with Bhashini and BharatGen logos

BharatGen, भाषिणी और AI से जनजातीय भाषाओं को मिल रहा बढ़ावा

जनजातीय और बहुभाषी क्षेत्रों में शिक्षा क्रांति: ‘BharatGen’ और ‘भाषिणी’ AI तकनीक से मातृभाषा में पढ़ेंगे छात्र”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत बहुभाषावाद और मातृभाषा में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार ने बड़े कदम उठाए हैं।

अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) की मदद से भारतीय भाषाओं, विशेषकर जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और शिक्षा को नई दिशा दी जा रही है।

इसके तहत लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM), अनुवाद टूल और कई डिजिटल सेवाएं विकसित की गई हैं।

‘BharatGen’: 22 भाषाओं को सपोर्ट करने वाला स्वदेशी LLM

भारत सरकार ने ‘BharatGen’ प्रोजेक्ट की शुरुआत की है, जो एक मल्टीमॉडल लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) है।

  • उद्देश्य: समावेशी एआई समाधान विकसित करना जो संविधान की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं का समर्थन करे।

  • संचालन: इसका मुख्य विकास कार्य IIT बॉम्बे में किया जा रहा है।

  • सहयोग: इसे IIT कानपुर, IIT मद्रास, IIT हैदराबाद, IIIT हैदराबाद, IIM इंदौर और IIT मंडी जैसे प्रमुख संस्थानों के कंसोर्टियम के माध्यम से लागू किया जा रहा है।

‘अनुवादिनी’ और ‘भाषिणी’ से आसान हुआ अनुवाद

भारतीय भाषाओं में डिजिटल कंटेंट के अनुवाद को आसान बनाने के लिए AI-आधारित टूल्स विकसित किए गए हैं:

  • अनुवादिनी (ANUVADINI): इसे अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) द्वारा विकसित किया गया है।

  • भाषिणी (BHASHINI): डिजिटल इंडिया के तहत यह 70 से अधिक अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से तैयार किया गया प्लेटफॉर्म है।

‘भाषिणी’ प्लेटफॉर्म की प्रमुख विशेषताएं:

  • इस पर 360 से अधिक AI-आधारित भाषा मॉडल और 22 से अधिक विशेष भाषा सेवाएं (एएसआर, मशीन ट्रांसलेशन, ओसीआर, टेक्स्ट-टू-स्पीच आदि) उपलब्ध हैं।

  • इसमें 246 मिलियन समानांतर वाक्य और 3.7 मिलियन मोनोलिंगुअल टेक्स्ट एंट्रीज़ का डेटासेट शामिल है।

  • ‘नेशनल लैंग्वेज ट्रांसलेशन मिशन’ के तहत यह प्लेटफॉर्म भीली और संथाली जैसी जनजातीय भाषाओं को भी सपोर्ट कर रहा है।

जनजातीय भाषाओं (Santhali, Mundari) पर विशेष फोकस

शिक्षा मंत्रालय के तहत केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) ने जनजातीय क्षेत्रों के लिए विशेष पहल की है:

  • SWAYAM कोर्स: मातृभाषा-आधारित शिक्षा के लिए ‘स्वयं’ प्लेटफॉर्म पर 12 सप्ताह का संथाली भाषा कोर्स शुरू किया गया है।

  • LDC-IL प्रोजेक्ट: इसके तहत संथाली के लिए 60 वक्ताओं की 50 घंटे की ऑडियो रिकॉर्डिंग वाला स्पीच डेटासेट तैयार किया गया है। संथाली और मुंडारी दोनों में 5,200 वाक्यों का पैरेलल टेक्स्ट कॉर्पोरा भी बना है।

  • ‘मेधा भाषिका’ वेबसाइट: AI टूल्स और भाषाई संसाधनों को [https://medha.ciil.org](https://medha.ciil.org) के जरिए एक्सेस किया जा सकता है।

शुरुआती किताबें और ‘भारतवाणी’ पोर्टल

CIIL ने मुंडारी, खड़िया, हो-हिंदी, कुरुख, कोरवा, भूमिज और माल्टो जैसी कई भाषाओं में शुरुआती स्तर की किताबें (प्राइमर्स) तैयार की हैं।

साथ ही, CIIL के ‘भारतवाणी’ पोर्टल पर संथाली और अन्य भाषाओं से जुड़े भाषाकोश, ज्ञानकोश, पाठ्यपुस्तककोश और शब्दकोश मुफ्त में उपलब्ध कराए गए हैं।