तीन बड़े मिशन और 5 लाख करोड़ का जेंडर बजट: महिलाओं-बच्चों के लिए सरकार का महा-अभियान | The Politics Again
‘महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का ‘त्रिशूल’ प्रहार: ‘पोषण 2.0, शक्ति और वात्सल्य’ से संवर रहा महिलाओं और बच्चों का भविष्य; 5 लाख करोड़ का ऐतिहासिक जेंडर बजट ‘
नई दिल्ली (The Politics Again): श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट
देश भर में, विशेषकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में महिलाओं और बच्चों के समग्र विकास, पोषण और सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।
प्रभावी कार्यान्वयन और सटीक निगरानी के लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की सभी योजनाओं को अब तीन वृहद मिशनों— मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0, मिशन शक्ति और मिशन वात्सल्य में समेकित कर दिया गया है।
केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में यह विस्तृत जानकारी साझा की, जो महिला सशक्तिकरण और बाल कल्याण की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
सरकार के तीन प्रमुख मिशन: एक नज़र में
1. मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 (कुपोषण पर सीधा वार) इस मिशन का मुख्य उद्देश्य देश में पोषण और स्वास्थ्य संकेतकों में व्यापक सुधार लाना है।
इसके तहत आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण अभियान और किशोरियों के लिए चलाई जा रही योजनाओं को तीन मुख्य उप-क्षेत्रों में बांटा गया है: पोषण सहायता, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा, और आंगनवाड़ी अवसंरचना का उन्नयन।
2. मिशन शक्ति (नारी की सुरक्षा और सशक्तिकरण) महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए ‘मिशन शक्ति’ को दो प्रमुख घटकों में विभाजित किया गया है:
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संबल (सुरक्षा और संरक्षण): इसमें संकटग्रस्त महिलाओं की मदद के लिए वन स्टॉप सेंटर (OSC), महिला हेल्पलाइन (WHL), बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और नारी अदालत जैसी पहल शामिल हैं।
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31 जनवरी 2026 तक OSC और महिला हेल्पलाइन के जरिए 1.11 करोड़ महिलाओं को सहायता दी जा चुकी है।
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सामर्थ्य (सशक्तिकरण): इसके तहत शक्ति सदन, सखी निवास, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) और महिला सशक्तिकरण केंद्र आते हैं।
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PMMVY के तहत अब तक 4.27 करोड़ लाभार्थियों को 20,101 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता सीधे उनके खातों में भेजी जा चुकी है।
3. मिशन वात्सल्य (कठिन परिस्थितियों में बच्चों का सहारा) इस मिशन का उद्देश्य जरूरतमंद और अनाथ बच्चों की सुरक्षा और देखभाल सुनिश्चित करना है।
यह एकीकृत बाल संरक्षण योजना (ICPS) के तहत मिशन मोड में काम करता है। वर्तमान में इस योजना के अंतर्गत देश भर के 3,799 बाल देखभाल संस्थानों में 82,005 बच्चे सुरक्षित संस्थागत देखभाल प्राप्त कर रहे हैं।
ऐतिहासिक कदम: महिलाओं और लड़कियों के लिए 5.01 लाख करोड़ का ‘जेंडर बजट’
महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण को बजट में भी प्रमुखता दी गई है। वित्त वर्ष 2026-27 के लैंगिक बजट (Gender Budget) वक्तव्य में महिलाओं और लड़कियों के कल्याण के लिए 5.01 लाख करोड़ रुपये का विशाल आवंटन किया गया है।
कुल 53 मंत्रालयों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों ने इस बजट में अपना योगदान दिया है। अपने कुल बजट का 30% से अधिक हिस्सा महिलाओं के लिए आवंटित करने वाले प्रमुख मंत्रालयों में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (81.73%) सबसे आगे है।
इसके बाद ग्रामीण विकास (69.92%), पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (48.60%), और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग (48.04%) का स्थान है।












