Coal Production in India

ऐतिहासिक: भारत का कोयला उत्पादन 20 करोड़ टन के पार | The Politics Again

‘ भारत के कोयला क्षेत्र की ऐतिहासिक उड़ान : उत्पादन ने पार किया 20 करोड़ टन का जादुई आंकड़ा, ‘आत्मनिर्भर भारत’ को मिली नई ऊर्जा ‘

नई दिल्ली (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट 

भारत के ऊर्जा परिदृश्य और आर्थिक विकास के मोर्चे पर एक बेहद उत्साहजनक खबर सामने आई है।

देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने वाले कोयला क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक नया इतिहास रच दिया है।

11 मार्च 2026 तक, देश की कैप्टिव (वाणिज्यिक) और अन्य कोयला खदानों ने संयुक्त रूप से 20 करोड़ मीट्रिक टन (MT) कोयला उत्पादन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर लिया है।

यह विराट उपलब्धि केंद्र और राज्य के सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कंपनियों के अथक परिश्रम, दृढ़ संकल्प और सामूहिक प्रयासों का परिणाम है।

क्या होती हैं कैप्टिव खदानें?

पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 के तहत केंद्र सरकार को यह अधिकार है कि वह किसी विशेष औद्योगिक उपयोग (जैसे बिजली उत्पादन या स्टील निर्माण) के लिए खदानें आरक्षित कर सके। इन्हीं विशेष खदानों को ‘कैप्टिव खदानें’ कहा जाता है।

आंकड़ों की जुबानी: कैसे हासिल हुआ यह मुकाम?

कोयला मंत्रालय द्वारा जारी किए गए ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, इस 20 करोड़ टन के कुल उत्पादन में से:

  • कैप्टिव और कमर्शियल खदानों का योगदान: 194.17 मीट्रिक टन

  • अन्य खदानों का योगदान: 6.06 मीट्रिक टन

24 दिन पहले ही टूट गया पिछला रिकॉर्ड: इस वर्ष कोयला क्षेत्र की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वित्त वर्ष 2024-25 के कुल उत्पादन (197.32 मीट्रिक टन) का रिकॉर्ड इस बार 7 मार्च 2026 को ही टूट गया।

यानी पिछले वर्ष की तुलना में यह लक्ष्य 24 दिन पहले ही हासिल कर लिया गया। इस क्षेत्र ने अपनी मजबूत गति को बरकरार रखते हुए वार्षिक आधार पर 10.56 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की है।

कोयला आपूर्ति (लदान) में भी जबरदस्त उछाल

न केवल उत्पादन, बल्कि उपभोक्ताओं तक कोयला पहुंचाने (लदान या Dispatch) में भी लगातार वृद्धि देखी गई है।

वार्षिक आधार पर इसमें 7.71 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष के 182.98 मीट्रिक टन से बढ़कर इस वर्ष 197.09 मीट्रिक टन तक पहुँच गई है।

यह वृद्धि देश के प्रमुख उपभोक्ता क्षेत्रों (जैसे पावर प्लांट्स) को निर्बाध और विश्वसनीय कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करती है।

‘विकसित भारत 2047’ की दिशा में मजबूत कदम

कोयला मंत्रालय भारत के ऊर्जा इको-सिस्टम को सशक्त बनाने के लिए दूरदर्शी नीतियों और तकनीकी नवाचारों का लगातार उपयोग कर रहा है।

मंत्रालय का मानना है कि खनन कार्यबल के समर्पण के दम पर यह क्षेत्र राष्ट्रीय विकास में अहम भूमिका निभा रहा है।

जैसे-जैसे भारत 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, कोयला क्षेत्र की ये उपलब्धियां औद्योगिक प्रगति को बढ़ावा देने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की परिकल्पना को साकार करने में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।

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