UP Police Fake Encounter Allegations

देवबंद जेल का ‘काला सच’? न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने कैदियों ने खोली पुलिस ‘एनकाउंटर’ की पोल, वीडियो वायरल

“उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यशैली और ‘एनकाउंटर मॉडल’ पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं”

देवबंद/सहारनपुर: THE POLITICS AGAIN : मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 

देवबंद उप कारागार (Deoband Sub-Jail) से लीक हुए 1 मिनट 34 सेकेंड के एक वीडियो ने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है।

इस वीडियो में जेल निरीक्षण के लिए पहुंचे एक न्यायिक मजिस्ट्रेट के सामने बंदी यह कबूल कर रहे हैं कि पुलिस ने उन्हें मुठभेड़ में नहीं, बल्कि पकड़ने के बाद कस्टडी में गोली मारी है।

क्या है वायरल वीडियो में?

वायरल वीडियो करीब दो महीने पुराना बताया जा रहा है, जब एक न्यायिक मजिस्ट्रेट जेल का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे।

वीडियो में मजिस्ट्रेट बैरक में बंद उन कैदियों से बात करते दिख रहे हैं, जो पुलिस मुठभेड़ (Encounter) में घायल होकर जेल आए थे।

मजिस्ट्रेट की पूछताछ में एक बंदी ने रोंगटे खड़े करने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि उसे रास्ते से उठाया गया।

पुलिस चौकी में ‘थर्ड डिग्री’ टॉर्चर दिया गया, करंट लगाया गया और फिर जंगल में ले जाकर पैर में गोली मार दी गई ताकि इसे मुठभेड़ दिखाया जा सके।

कैदी और मजिस्ट्रेट के बीच का चौंकाने वाला संवाद

वीडियो में कैद बातचीत पुलिस की थ्योरी की धज्जियां उड़ाती दिख रही है:

  • न्यायिक मजिस्ट्रेट: गोली कैसे मारी गई थी?

  • बंदी: हमारी तारीख थी सहारनपुर में… हम बागपत से आ रहे थे। पुलिस ने शामली के पास से हमें उठा लिया। चौकी ले गए, करंट लगाया, मारपीट की और जबरन जुर्म कबूल करवाने की कोशिश की।

  • जब हमने नहीं माना, तो शाम को जंगल में ले गए। वहां एक बाइक मंगवाई और फिर मुझे जमीन पर लिटाकर, पैर पर कपड़ा रखकर गोली मार दी। इसके बाद कट्टे से भी फायर किया गया (दिखाने के लिए)।

  • न्यायिक मजिस्ट्रेट (दूसरे बंदी से): आपके साथ भी ऐसा ही हुआ है?

  • दूसरा बंदी: (पैर पर गोली का निशान दिखाते हुए) जी हां, बिल्कुल ऐसा ही हुआ।

पुलिस विभाग में हड़कंप

इस वीडियो के वायरल होते ही पुलिस अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। यूपी पुलिस अक्सर अपराधियों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ और एनकाउंटर की नीति के लिए चर्चा में रहती है।

लेकिन अगर मजिस्ट्रेट के सामने दिए गए ये बयान सही हैं, तो यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन और कानून का मजाक है।

अभी तक पुलिस की तरफ से इस वीडियो पर कोई आधिकारिक विस्तृत सफाई नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने जांच की बात कही जा रही है।