शेयर बाजार: FIIs की ₹4.41 लाख करोड़ बिकवाली, 9 हफ्ते बाद लौटी तेजी
वॉल स्ट्रीट चले या गिरे, भारतीय बाजार पस्त: FIIs की ₹4.41 लाख करोड़ की बिकवाली, क्या टूट रहा निवेशकों का भरोसा?
नई दिल्ली : द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पिछले 10 महीनों से भारतीय शेयर बाजार एक ऐसे अजीबोगरीब चक्रव्यूह में फंसा है, जहां हर खबर का अंजाम सिर्फ गिरावट के रूप में सामने आ रहा है।
वॉल स्ट्रीट (Wall Street) में तेजी हो या मंदी, दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) लगातार पस्त नजर आ रही है।
विदेशी निवेशकों (FIIs) का भारतीय बाजार से मोहभंग और लगातार पूंजी निकासी इस दबाव की सबसे बड़ी वजह बनकर उभरी है।
FII आउटफ्लो: विदेशी निवेशकों का लगातार पलायन
विदेशी फंडों का भारतीय इक्विटी पर दबाव चरम पर है। 8 अक्टूबर को हुआ आउटफ़्लो, 29 मई (₹21,106 करोड़ की नेट सेलिंग) के बाद दूसरा सबसे बड़ा आउटफ़्लो दर्ज किया गया।
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अक्टूबर का झटका: लगातार पांच ट्रेडिंग सेशन में भारी बिकवाली के कारण अक्टूबर में FII का नेट आउटफ़्लो ₹37,929 करोड़ तक पहुंच गया है।
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साल 2026 का आंकड़ा: इस साल अब तक कुल FII सेलिंग ₹4.41 लाख करोड़ के पार पहुंच गई है।
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बर्नस्टीन (Bernstein) की रिपोर्ट: ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, पिछले दो वर्षों में FIIs भारतीय बाजार से करीब 40 अरब डॉलर निकाल चुके हैं।
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लार्ज-कैप कंपनियों के महंगे वैल्यूएशन और कमाई में धीमी ग्रोथ के कारण विदेशी निवेशकों के पास नई पूंजी लगाने के कारण सीमित हो गए हैं।
सेंसेक्स और निफ्टी: भारी बिकवाली के बाद राहत की सांस
8 अक्टूबर को बाजार में चौतरफा बिकवाली देखी गई, लेकिन हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन (9 अक्टूबर) को बाजार ने वापसी की,
जिससे 9 हफ्तों से चला आ रहा साप्ताहिक गिरावट का सिलसिला थम गया। इससे पहले साल 2001 में बाजार में लगातार 9 हफ्तों तक ऐसी गिरावट आई थी।
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8 अक्टूबर का क्रैश: BSE सेंसेक्स 1,045.46 अंक (1.44%) गिरकर 71,593.24 पर बंद हुआ। NSE निफ्टी 371.25 अंक (1.64%) टूटकर 22,231.80 पर आ गया।
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निफ्टी ने 22,179.90 का 52-हफ्ते का नया निचला स्तर छुआ। मेटल, रियल्टी, ऑटो और एनर्जी समेत सभी सेक्टर लाल निशान में रहे।
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9 अक्टूबर की रिकवरी: सेंसेक्स 879 अंक (1.23%) की शानदार तेजी के साथ 72,472 पर बंद हुआ। निफ्टी 289 अंकों की छलांग लगाकर 22,520 के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार पर दबाव के 4 मुख्य मैक्रो-इकोनॉमिक कारण
घरेलू और वैश्विक मोर्चे पर कई चुनौतियां भारतीय बाजार की रिकवरी में रोड़ा बनी हुई हैं:
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RBI की सख्ती और महंगी दरें: रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है। ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ (सोच-समझकर सख्ती) के रुख से कंपनियों की उधारी लागत बढ़ रही है और कमाई पर असर पड़ रहा है।
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कच्चे तेल की आग: मिडिल ईस्ट में तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड $104 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। भारत जैसे बड़े आयातक के लिए यह सीधा खतरा है, जिससे इंपोर्ट बिल और महंगाई बढ़ने की आशंका है।
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टैक्स का पेचीदा ढांचा: भारत में 12.5% का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG), 20% शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स (STCG) और F&O पर बढ़ा हुआ STT विदेशी फंडों के मुनाफे को सीधा काट रहा है।
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मजबूत डॉलर और गिरता रुपया: अमेरिका में 10-साल के ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड 5.3% पर है। निवेशकों को अमेरिका में 5% का जोखिम-मुक्त रिटर्न मिल रहा है।
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ऐसे में गिरते रुपये वाले भारतीय बाजार में दांव लगाना विदेशी निवेशकों को घाटे का सौदा लग रहा है, क्योंकि रुपये की कमजोरी उनके डॉलर रिटर्न को निगेटिव कर देती है।
📊 न्यूज़ इंफोग्राफिक ब्लूप्रिंट: बाजार का हाल (एक नज़र में)
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फैक्टर्स (Factors) |
आंकड़े / स्थिति (Current Data) |
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📉 2026 में कुल FII बिकवाली |
₹4.41 लाख करोड़ (पिछले 2 वर्षों में $40 Billion बाहर) |
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📈 बाजार की रिकवरी (9 अक्टूबर) |
सेंसेक्स: +879 अंक (72,472) निफ्टी: +289 अंक (22,520) |
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🏦 RBI रेपो रेट |
5.50% (+25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी) |
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🛢️ ग्लोबल कमोडिटी/बॉन्ड |
ब्रेंट क्रूड: ~$104/बैरल US 10-yr यील्ड: ~5.3% |
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✂️ टैक्स की मार |
LTCG: 12.5% | STCG: 20% | F&O पर बढ़ा STT |
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💡 ऐतिहासिक ट्रेंड |
बाजार में लगातार 9 हफ्तों की गिरावट का सिलसिला टूटा (पिछली बार ऐसा 2001 में हुआ था)। |











