यूपी के 21 फीसदी दलित वोटबैंक को साधने के लिए अखिलेश यादव के 'नीले' दांव के जवाब में सत्ताधारी बीजेपी का 400 करोड़ रुपये का काउंटर प्लान।
यूपी चुनाव: 21% दलित वोटबैंक पर सपा की नजर, अखिलेश के ‘नीले दांव’ के खिलाफ बीजेपी का 400 करोड़ का मेगा प्लान”
लखनऊ : संतोष सेठ की रिपोर्ट : (THE POLITICS AGAIN)
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछने लगी है। राज्य की लगभग 21 फीसदी दलित आबादी को अपने पाले में करने के लिए समाजवादी पार्टी (SP) और सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सीधा मुकाबला शुरू हो गया है।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मंगलवार को प्रदेश की आरक्षित (रिजर्व) विधानसभा सीटों के पदाधिकारियों की एक अहम बैठक बुलाकर इस वोटबैंक में बड़ी सेंधमारी करने का खाका तैयार किया है,
जिसके जवाब में बीजेपी ने भी आक्रामक रणनीति अपनाते हुए करोड़ों का फंड मैदान में उतार दिया है।
समाजवादी पार्टी की रणनीति का मुख्य केंद्र प्रदेश की कुल 86 आरक्षित विधानसभा सीटें हैं। पार्टी का विशेष ध्यान उन 65 रिजर्व सीटों पर है, जहां पिछले विधानसभा चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा था।
वोट बढ़ाने का लक्ष्य: सपा ने प्रत्येक आरक्षित विधानसभा क्षेत्र में करीब 27 हजार नए वोट बढ़ाने का कड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है।
प्रतीकात्मक बदलाव: दलित समाज को सीधे जोड़ने के लिए सपा ने ‘नीले रंग’ को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया है।
सपा छात्र सभा की ड्रेस का रंग नीला कर दिया गया है और अखिलेश यादव खुद कार्यक्रमों में नीला गमछा पहने नजर आ रहे हैं।
मुद्दों पर आक्रामकता: अखिलेश यादव लगातार दलितों और संविधान से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं। उन्होंने हाल ही में दावा किया है कि बीजेपी सरकार के कार्यकाल में यूपी के 72 जिलों में डॉ. भीमराव अंबेडकर की 151 मूर्तियां तोड़ी जा चुकी हैं।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, सपा प्रमुख इस समय बसपा सुप्रीमो मायावती के पारिवारिक झगड़ों में उलझे होने का सीधा सियासी फायदा उठाना चाहते हैं और संगठन को दलित बस्तियों में मजबूत कर रहे हैं।
अखिलेश यादव के इस ‘नीले दांव’ की काट खोजने के लिए बीजेपी भी पूरी तरह से मुस्तैद है। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा प्रमुख पर सीधा तंज कसते हुए कहा, “अखिलेश यादव चाहें अपना पूरा शरीर नीला कर लें, तब भी दलित समाज समाजवादी पार्टी को वोट नहीं देगा।”
2024 के लोकसभा चुनावों में दलित वोट बैंक में हुए नुकसान की भरपाई के लिए योगी सरकार ने जमीन पर काम शुरू कर दिया है:
स्मारकों का सुंदरीकरण: यूपी सरकार ने डॉ. भीमराव अंबेडकर और अन्य दलित महापुरुषों की मूर्तियों, पार्कों और स्मारकों के सुंदरीकरण व सुरक्षा के लिए 400 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट जारी किया है।
बाउंड्री वॉल और ग्रिल: इस मेगा बजट के तहत हर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 10 प्रमुख स्मारकों व मूर्तियों के आसपास बाउंड्री वॉल और ग्रिल लगाने का काम युद्ध स्तर पर किया जाएगा।
दशकों तक उत्तर प्रदेश में दलितों की सबसे बड़ी नेता मानी जाने वाली मायावती (जो चार बार सीएम रहीं और 2007 में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई) के वोटबैंक में 2014 के बाद से भारी बिखराव आया है।
बड़े पैमाने पर दलित वोट बसपा से खिसककर बीजेपी और अब ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की ओर शिफ्ट हुआ है। हालिया सर्वे के आंकड़े इस बड़े बदलाव की तस्दीक करते हैं:
जाटव वोट: 2024 में मायावती (BSP) को 44 फीसदी जाटव वोट मिले, जबकि इंडिया गठबंधन को 25 फीसदी और एनडीए को 24 फीसदी वोट प्राप्त हुए।
गैर-जाटव वोट: गैर-जाटव दलितों में इंडिया गठबंधन ने 56 फीसदी वोट हासिल कर बड़ी सेंधमारी की, जबकि एनडीए को 29 फीसदी और बसपा को मात्र 15 फीसदी वोट मिले।
इन्हीं आंकड़ों को देखते हुए अखिलेश यादव अपने दलित वोट शेयर को और मजबूत कर सत्ता की चाबी हासिल करना चाहते हैं, जबकि बीजेपी अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने और सपा के विस्तार को रोकने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।
आने वाले महीनों में यूपी के इस 21 फीसदी वोटबैंक को लेकर दोनों दलों के बीच सियासी घमासान और तेज होना तय है।
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