नवीकरणीय ऊर्जा को स्टोर करने वाली 'वाटर बैटरी' यानी पंप स्टोरेज परियोजनाएं (PSP) भारत के ऊर्जा भविष्य को नई दिशा दे रही हैं।
भारत की ‘वाटर बैटरी’: पंप स्टोरेज परियोजनाओं से संवरेगा स्वच्छ ऊर्जा का भविष्य, दुनिया में चौथे नंबर पर पहुंचा देश”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
जैसे-जैसे भारत अपने बिजली क्षेत्र को स्वच्छ और हरित ऊर्जा (Renewable Energy) की ओर ले जा रहा है, ऊर्जा भंडारण (Energy Storage) एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
सूरज की रोशनी और हवा की गति हमेशा एक समान नहीं होती, इसलिए अतिरिक्त बिजली को स्टोर करना जरूरी है।
इसी अंतर को पाटने के लिए ‘वाटर बैटरी’ (Water Battery) यानी पंप स्टोरेज परियोजनाएं (Pumped Storage Projects – PSP) एक गेम-चेंजर साबित हो रही हैं।
जुलाई 2026 तक भारत की गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता 300 गीगावाट (GW) के पार जा चुकी है।
अब लक्ष्य 2030 तक इसे 500 गीगावाट तक पहुंचाने का है, जिसमें पंप स्टोरेज की भूमिका सबसे अहम होने वाली है।
पंप स्टोरेज तकनीक में दो जलाशय (Reservoirs) होते हैं, जो अलग-अलग ऊंचाइयों पर स्थित होते हैं।
बिजली का भंडारण: जब बिजली का उत्पादन मांग से अधिक होता है (जैसे दिन में तेज धूप के समय), तो अतिरिक्त बिजली का उपयोग करके निचले जलाशय से पानी को पंप करके ऊपरी जलाशय में पहुंचा दिया जाता है। यह संभावित ऊर्जा (Potential Energy) के रूप में स्टोर हो जाता है।
बिजली का उत्पादन: जब बिजली की मांग चरम (Peak Hours) पर होती है, तो ऊपरी जलाशय से पानी टर्बाइनों के माध्यम से नीचे छोड़ा जाता है, जिससे बिजली पैदा होती है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अनुसार, वित्त वर्ष 2031-32 तक भारत को 73.93 GW ऊर्जा भंडारण क्षमता की आवश्यकता होगी, जिसमें से 26.69 GW पंप स्टोरेज परियोजनाओं से आएगा।
संभावित क्षमता: भारत में कुल 345.38 GW की क्षमता वाली 320 पंप स्टोरेज परियोजनाओं की पहचान की गई है।
राज्यों की हिस्सेदारी: पश्चिमी क्षेत्र (विशेषकर पश्चिमी घाट) में सबसे अधिक 129.72 GW क्षमता है। अकेले महाराष्ट्र में 67.36 GW और गुजरात में 33.36 GW की संभावित क्षमता मौजूद है।
अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) के आंकड़ों के अनुसार, पंप स्टोरेज की स्थापित क्षमता के मामले में भारत दुनिया में चौथे स्थान पर है (चीन, जापान और अमेरिका के बाद)।
जुलाई 2026 तक भारत में 10 परियोजनाओं के तहत 7.43 GW की क्षमता सफलतापूर्वक परिचालन में आ चुकी है, और 15.87 GW की 11 अन्य परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
सरकार ने इन परियोजनाओं को गति देने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं:
शुल्क में छूट: 30 जून 2028 तक निर्माण के लिए आवंटित PSP को अंतरराज्यीय पारेषण प्रणाली (ISTS) शुल्क में 25 वर्षों तक 100% छूट मिलेगी।
अप्रूवल में तेजी: CEA द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को मंजूरी देने की समय-सीमा 90 दिन से घटाकर 50 दिन कर दी गई है।
बजटीय सहयोग: परियोजनाओं तक पहुंचने के लिए सड़कें, पुल और पारेषण लाइनों जैसे बुनियादी ढांचे के लिए विशेष सहायता दी जा रही है।
| महत्वपूर्ण तथ्य (Key Indicators) | विस्तृत आंकड़े / विवरण (Data Details) |
| 🌍 भारत की वैश्विक रैंकिंग | चौथा स्थान (चीन, जापान, अमेरिका के बाद) |
| ⚡ वर्तमान स्थापित क्षमता | 7.43 GW (अगस्त 2026 तक) |
| 🚧 निर्माणाधीन क्षमता | 15.87 GW (11 परियोजनाएं) |
| 🎯 भविष्य का लक्ष्य (2035-36) | 105.56 GW संचयी क्षमता का लक्ष्य |
| 📍 सर्वाधिक क्षमता वाला राज्य | महाराष्ट्र (67.36 GW संभावित क्षमता) |
| 💡 कुल चिह्नित राष्ट्रीय क्षमता | 345.38 GW (320 परियोजनाएं) |
| ⚙️ तकनीक के मुख्य प्रकार | ऑन-स्ट्रीम, ऑफ-स्ट्रीम ओपन-लूप, और ऑफ-स्ट्रीम क्लोज्ड-लूप |
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