टांडा में आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए एआईएमआईएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी।
ओवैसी की हुंकार: ‘अब्दुल अब दरी नहीं बिछाएगा, मुसलमानों को खुद चुनना होगा अपना नेता’
टांडा: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ‘अब्दुल’ की भूमिका को लेकर बहस तेज हो गई है।
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने रविवार को टांडा में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए मुस्लिम समाज के राजनीतिक नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े किए।
उन्होंने बिना नाम लिए समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया।
ओवैसी ने ‘अब्दुल’ का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीतिक दल सिर्फ मुसलमानों का इस्तेमाल करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा, “अब्दुल दरी बिछाए और गांधी तथा नेहरू का नाम लेकर सियासत करने वाले दूसरे लोग आकर उस पर बैठ जाएं… यह व्यवस्था अब नहीं चलेगी।”
ओवैसी ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम युवाओं में काबिलियत की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें नेतृत्व देने के बजाय दूसरों के लिए काम करने तक सीमित रखा जाता है।
उन्होंने आह्वान किया कि मुसलमानों को अपनी सफों (कतारों) से खुद नेता पैदा करने होंगे, तभी उनके साथ हो रही नाइंसाफी खत्म होगी।
जनसभा में ओवैसी ने अनुसूचित जाति (दलितों) और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की भी पुरजोर वकालत की।
उन्होंने मौजूदा व्यवस्था पर तंज कसते हुए कहा, “पेट की भूख तो बर्दाश्त की जा सकती है, लेकिन मान-सम्मान पर आंच बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
आज हालात यह हैं कि यहां के दलितों और मुसलमानों को अस्पताल की गोली तो नहीं मिलती, लेकिन हुकूमत की बंदूक की गोली जरूर मिल जाती है।”
विरोधियों द्वारा उनके मुरादाबाद और रामपुर आने पर उठाए जा रहे सवालों का भी ओवैसी ने बेबाकी से जवाब दिया।
उन्होंने इतिहास का पन्ना पलटते हुए याद दिलाया कि 1952 में पहला संसदीय चुनाव लड़ने के लिए मौलाना अबुल कलाम आजाद रामपुर आए थे और जवाहरलाल नेहरू ने ही उन्हें वहां भेजा था।
ओवैसी ने पूछा कि तब मौलाना आजाद से यह सवाल क्यों नहीं पूछा गया कि वह वहां क्यों आए हैं?
| महत्वपूर्ण पहलू (Key Highlights) | विस्तृत विवरण (Details) |
| 📍 आयोजन स्थल | टांडा (उत्तर प्रदेश)। |
| 🗣️ मुख्य वक्ता | असदुद्दीन ओवैसी (राष्ट्रीय अध्यक्ष, AIMIM)। |
| 🔥 सबसे चर्चित बयान | “अब्दुल दरी नहीं बिछाएगा, मुसलमानों को अपना नेता खुद चुनना होगा।” |
| 🎯 राजनीतिक निशाना | सपा और कांग्रेस (गांधी और नेहरू के नाम पर सियासत करने वाले)। |
| 🤝 मुख्य मुद्दा | मुस्लिम राजनीतिक नेतृत्व की कमी और दलित-अल्पसंख्यक अधिकार। |
| 📖 ऐतिहासिक संदर्भ | 1952 में मौलाना अबुल कलाम आजाद का रामपुर से चुनाव लड़ने का जिक्र। |
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