जौनपुर के रोहित यादव ने एशियन गेम्स 2026 में जीता ब्रॉन्ज मेडल
जौनपुर के रोहित यादव ने एशियन गेम्स 2026 में जीता कांस्य पदक, बांस के भाले से शुरू किया था सफर; डीएम ने किया सम्मानित”
जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : वरुण यादव की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का परचम लहराने वाले रोहित यादव ने इतिहास रच दिया है।
मछलीशहर तहसील के अदारी डिभिया गांव निवासी रोहित ने जापान में आयोजित ‘एशियन गेम्स 2026’ की पुरुष भाला फेंक (Javelin Throw) स्पर्धा में शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक (Bronze Medal) पर कब्जा जमाया है। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता से पूरे जौनपुर जिले में खुशी और गौरव का माहौल है।
इस उपलब्धि पर जौनपुर के जिलाधिकारी (DM) सैमुअल पाल एन ने रोहित यादव और उनके पिता सभाजीत यादव को कलेक्ट्रेट के जनसुनवाई कक्ष में आयोजित एक विशेष समारोह में सम्मानित किया।
संघर्ष की कहानी: पिता ने बांस काटकर बनाया था पहला भाला
रोहित यादव की यह सफलता सीमित संसाधनों के बीच असीम लगन की कहानी है। रोहित ने अपने शुरुआती दिनों के संघर्ष को साझा करते हुए बताया कि उनके पिता सभाजीत यादव ने खेल के प्रति उनके जुनून को देखते हुए गांव में ही बांस के ऊपरी हिस्से को काटकर उनके लिए पहला भाला (Javelin) तैयार किया था।
इसी बांस के भाले से उन्होंने अपना प्रारंभिक अभ्यास शुरू किया। लगातार मेहनत और कड़े अभ्यास के बाद, वर्ष 2019 में जब वे पटियाला के नेशनल कैंप से जुड़े, तो उनके खेल करियर को एक नई और पेशेवर दिशा मिली, जिसका परिणाम आज एशियन गेम्स के पदक के रूप में दुनिया के सामने है।
डीएम ने अंगवस्त्र और पुस्तक भेंट कर बढ़ाया हौसला
सम्मान समारोह के दौरान डीएम सैमुअल पाल एन ने रोहित और उनके पिता को अंगवस्त्र, पुष्पगुच्छ और पुस्तक भेंट कर शुभकामनाएं दीं।
डीएम ने रोहित की सफलता की सराहना करते हुए कहा, “रोहित की उपलब्धि उनके कड़े परिश्रम, लगन और निरंतर अभ्यास का सुखद परिणाम है।
उनके पिता द्वारा शुरुआती दौर में सीमित संसाधनों से दिया गया सहयोग अन्य अभिभावकों के लिए भी बेहद प्रेरणादायी है।”
उन्होंने विश्वास जताया कि रोहित की यह जीत जिले के अन्य युवाओं को भी खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।
अगला लक्ष्य: 2028 ओलंपिक में स्वर्ण पदक
एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीतना रोहित के लिए उनके पिता का सपना पूरा होने जैसा है, लेकिन उनकी मंजिल अभी और आगे है।
रोहित ने बताया कि अब उनका पूरा ध्यान और आगामी लक्ष्य 2028 के ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करना और देश तथा जिले के लिए स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतना है।
ग्रामीण प्रतिभाओं के लिए बनेंगे मिनी स्टेडियम
इस अवसर पर जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि जिले में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
प्रतिभाओं को प्रारंभिक स्तर पर चिह्नित कर उन्हें आवश्यक सुविधाएं मुहैया कराई जा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में ‘मिनी स्टेडियम’ विकसित किए जा रहे हैं,
ताकि स्थानीय युवाओं को अपने ही क्षेत्र में बेहतर अभ्यास का मौका मिल सके। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को खेल संसाधनों के प्रभावी उपयोग के निर्देश भी दिए हैं।
रोहित यादव की खेल उपलब्धि और संघर्ष: एक नजर में
| विवरण / पहलू | महत्वपूर्ण जानकारी |
| खिलाड़ी का नाम व निवास | रोहित यादव (अदारी डिभिया गांव, मछलीशहर, जौनपुर) |
| अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि | एशियन गेम्स 2026 (जापान) में कांस्य पदक |
| खेल स्पर्धा | पुरुष भाला फेंक (Men’s Javelin Throw) |
| प्रेरणादायी शुरुआत | पिता सभाजीत यादव द्वारा बनाए गए ‘बांस के भाले’ से अभ्यास |
| टर्निंग पॉइंट (Turning Point) | वर्ष 2019 में नेशनल कैंप (पटियाला) में चयन |
| भविष्य का लक्ष्य | 2028 ओलंपिक में देश के लिए स्वर्ण पदक जीतना |
| प्रशासनिक पहल | जौनपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में ‘मिनी स्टेडियम’ का निर्माण |











