Indian supercomputer Param, C-DAC supercomputing facility, high performance computing servers India, scientific research computers, server room technology India

भारत का उभरता सुपरकंप्यूटिंग परितंत्र, NSM की ऐतिहासिक उड़ान

भारत का उभरता सुपरकंप्यूटिंग परितंत्र: ‘परम 8000’ से 68 पेटाफ्लॉप्स तक की स्वदेशी उड़ान, जानिए क्या है NSM मिशन”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : श्रीमती शिल्पा की रिपोर्ट 

1990 के दशक की शुरुआत में भारत की सुपरकंप्यूटिंग यात्रा ने ‘परम 8000’ (PARAM 8000) के साथ जो पहली उड़ान भरी थी, वह आज एक विशाल ‘राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन’ (NSM) के तहत एक आत्मनिर्भर राष्ट्रीय परितंत्र में तब्दील हो चुकी है।

यह जानकर गर्व होता है कि सितंबर 2026 तक भारत ने 40 स्वदेशी सुपर कंप्यूटरों की तैनाती कर ली है, जिनकी कुल संगणना क्षमता 68 पेटाफ्लॉप्स (PF) के आंकड़े को पार कर चुकी है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मौसम पूर्वानुमान और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे जटिल क्षेत्रों में कंप्यूटिंग की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग (HPC) के क्षेत्र में यह ऐतिहासिक छलांग लगाई है।

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) की शुरुआत और रणनीति

विश्व में लगभग 20 प्रतिशत डेटा उत्पन्न करने वाले देश भारत की कंप्यूटिंग जरूरतों को पूरा करने के लिए, केंद्र सरकार ने अप्रैल 2015 में 4,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ ‘राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन’ (NSM) की शुरुआत की थी।

इस महत्वाकांक्षी मिशन का संचालन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) संयुक्त रूप से कर रहे हैं,

जबकि सी-डैक (C-DAC), पुणे और भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc), बेंगलुरु इसे तकनीकी नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं।

एनएसएम एक ‘बिल्ड दृष्टिकोण’ (Build Approach) का अनुसरण करता है, जिसके तहत असेंबली, विनिर्माण (Manufacturing), और डिजाइन को स्वदेशी रूप से विकसित किया जा रहा है।

कहाँ हो रहा है इन सुपर कंप्यूटरों का इस्तेमाल?

ये सुपर कंप्यूटर केवल मशीनें नहीं हैं, बल्कि ये सामाजिक और वैज्ञानिक बदलाव का आधार हैं। इनका उपयोग निम्नलिखित जटिल अनुप्रयोगों में हो रहा है:

  • कृषि और स्वास्थ्य: फसल पैदावार की भविष्यवाणी करना और बीमारी (महामारी) के प्रकोप को ट्रैक कर दवा की खोज में तेजी लाना।

  • आपदा प्रबंधन: नदी की बाढ़ से प्रभावित होने वाले क्षेत्रों की सटीक भविष्यवाणी करना।

  • विज्ञान और अनुसंधान: जलवायु मॉडलिंग, बिग डेटा एनालिटिक्स, खगोल भौतिकी (Astrophysics), और कम्प्यूटेशनल बायोलॉजी में बड़े डेटासेट का विश्लेषण।

भारत में कंप्यूटिंग क्षमता का मौजूदा विस्तार

सितंबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल 40 सुपर कंप्यूटर सफलतापूर्वक चालू किए जा चुके हैं। इनमें 1 पेटाफ्लॉप से अधिक क्षमता वाले 13 हाई-एंड (High-end) सिस्टम शामिल हैं।

इसके अलावा 500 टेराफ्लॉप्स से 1 पेटाफ्लॉप के बीच के 12 मिड-रेंज सिस्टम और 500 टेराफ्लॉप्स से कम के 15 अन्य सिस्टम काम कर रहे हैं।

भविष्य में सरकार की योजना 123 पेटाफ्लॉप्स से अधिक की संचयी क्षमता वाले कुल 50 सुपर कंप्यूटर स्थापित करने की है।

परम 8000 (1 गीगाफ्लॉप) से शुरू हुआ यह सफर आज स्वदेशी सर्वर, सॉफ्टवेयर और नेटवर्किंग तकनीकों के साथ भारत को ‘आत्मनिर्भर’ और तकनीकी रूप से एक वैश्विक महाशक्ति बनाने की ओर मजबूती से अग्रसर है।

राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) और भारत का विकास: एक नजर में

विषय / मानक महत्वपूर्ण आंकड़े एवं तथ्य
मिशन की शुरुआत अप्रैल 2015 (बजट: लगभग ₹4,500 करोड़)
संचालन एवं कार्यान्वयन DST और MeitY / C-DAC (पुणे) और IISc (बेंगलुरु)
वर्तमान स्थिति (सितंबर 2026 तक) 40 सुपर कंप्यूटर तैनात (कुल क्षमता: 68 पेटाफ्लॉप्स)
भविष्य का लक्ष्य 50 सुपर कंप्यूटर स्थापित करना (क्षमता: 123 पेटाफ्लॉप्स से अधिक)
प्रथम स्वदेशी सुपर कंप्यूटर परम 8000 (1991 में लॉन्च, 1 गीगाफ्लॉप की गति)
मापन इकाई (Measurement) FLOPS (Floating Point Operations Per Second)
1 पेटाफ्लॉप्स (PF) का अर्थ प्रति सेकंड एक क्वाड्रिलियन (Quadrillion) गणनाएं
मिशन के प्रमुख अनुप्रयोग मौसम/जलवायु मॉडलिंग, दवा की खोज, आपदा प्रबंधन,