जौनपुर: दोहरा खाने से बढ़ रहा कैंसर का खतरा
जौनपुर: बक्शा में ‘दोहरा’ खाने से बढ़ रहा मुंह के कैंसर का खतरा, प्रशासन के आदेशों की उड़ रही धज्जियां
जौनपुर (बक्शा) वरुण यादव की रिपोर्ट, The Politics Again
जौनपुर जिले के विकासखंड बक्शा और इसके आस-पास के क्षेत्रों में ‘दोहरा’ (तंबाकू और सुपारी का स्थानीय मिश्रण) खाने वालों की तादाद तेजी से बढ़ रही है, जिसके घातक परिणाम अब सामने आने लगे हैं।
क्षेत्र में मुंह के कैंसर का प्रकोप और इसके शुरुआती लक्षण तेजी से फैल रहे हैं। जिला प्रशासन ने इस जानलेवा उत्पाद के खिलाफ अभियान चलाकर इसकी बिक्री पर रोक लगाई थी।
लेकिन प्रशासन के आदेशों की खुलेआम अवहेलना करते हुए लोग अभी भी इसे बना और बेच रहे हैं, जिससे इलाके में कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ गया है।
हर दिन जा रही 2200 लोगों की जान
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में तंबाकू और इसके उत्पादों के सेवन से हर साल लगभग 2.5 लाख लोग कैंसर का शिकार होते हैं।
आंकड़े भयावह हैं; तंबाकू जनित बीमारियों से देश में प्रतिदिन लगभग 2200 लोगों की मौत हो रही है।
देश में होने वाले कुल कैंसर मामलों में से लगभग 40 प्रतिशत केवल तंबाकू या ‘दोहरा’ के सेवन से होते हैं। इसके सेवन से न केवल मुंह का, बल्कि नाक, श्वास तंत्र, आहार नली और फेफड़ों का कैंसर भी हो सकता है।
डॉक्टरों का कहना है कि मुंह का कैंसर होने से पहले कुछ शुरुआती लक्षण (पूर्वावस्था) दिखाई देते हैं, जो आगे चलकर जानलेवा कैंसर का रूप ले लेते हैं।
कैंसर से बचाव: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
कैंसर जैसी घातक बीमारी से सतर्क रहने के लिए विशेषज्ञों ने कुछ अहम सलाह दी हैं:
नियमित जांच: 30 वर्ष या उससे अधिक उम्र के प्रत्येक व्यक्ति (महिला या पुरुष) को हर 5 साल में कम से कम एक बार किसी प्रशिक्षित स्वास्थ्य प्रदाता (डॉक्टर) से अपने मुंह का परीक्षण अवश्य कराना चाहिए।
स्वयं परीक्षण: तंबाकू, दोहरा या शराब का सेवन करने वाले लोगों को हर महीने अपने मुंह का स्वयं (Self-examination) परीक्षण करना चाहिए और नियमित अंतराल पर क्लीनिकल जांच भी करानी चाहिए।
कैंसर ही नहीं, इन गंभीर बीमारियों का भी है न्योता
तंबाकू या ‘दोहरा’ सिर्फ कैंसर को ही बढ़ावा नहीं देता, बल्कि यह शरीर को कई अन्य गंभीर बीमारियों का घर बना देता है। इसके सेवन से दिल की बीमारियां, उच्च रक्तचाप (High BP), लकवा (Paralysis), फेफड़े व श्वास नलिकाओं के रोग जैसी समस्याएं उत्पन्न होती हैं।
इसके अलावा, रक्त नलिकाओं के संकुचित हो जाने से पैर और हाथ की उंगलियों तक खून नहीं पहुंच पाता, जिससे उंगलियों के गलने (गैंग्रीन) का खतरा रहता है। इसका बुरा असर पुरुषों और महिलाओं की प्रजनन क्षमता (नपुंसकता) पर भी पड़ता है।
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