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नौसेना के 5वें फ्लीट सपोर्ट शिप की ‘स्टील कटिंग’ संपन्न

भारतीय नौसेना की ‘ब्लू वाटर’ क्षमता को मिलेगी नई धार: 5वें और अंतिम फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS) की ‘स्टील कटिंग’ संपन्न

विशाखापत्तनम/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

समुद्र में भारतीय नौसेना की रणनीतिक पहुंच और मारक क्षमता को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है।

भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे पांच फ्लीट सपोर्ट शिप्स (FSS) में से पांचवें और अंतिम जहाज का ‘स्टील कटिंग’ (निर्माण की प्रारंभिक प्रक्रिया) समारोह 8 मई 2026 को विशाखापत्तनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

इस महत्वपूर्ण समारोह में युद्धपोत उत्पादन एवं अधिग्रहण के नियंत्रक, वाइस एडमिरल संजय साधु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

उनके साथ एचएसएल के सीएमडी और नौसेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर के गवाह बने।

2027 से शुरू होगी आपूर्ति

भारतीय नौसेना ने समुद्र में अपने युद्धपोतों की रसद और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अगस्त 2023 में एचएसएल (HSL) के साथ पांच फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS) के निर्माण और अधिग्रहण का एक अहम अनुबंध किया था।

योजना के अनुसार, इन महाकाय जहाजों की आपूर्ति साल 2027 के मध्य से नौसेना को शुरू हो जाएगी।

क्या है फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS) और क्यों है यह खास?

फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS) भारतीय नौसेना के लिए एक ‘चलते-फिरते बेस’ की तरह काम करेंगे, जो समुद्र में नौसेना की ‘ब्लू वाटर’ (गहरे समुद्र में मारक) क्षमताओं को अभूतपूर्व मजबूती देंगे:

  • विशाल आकार और क्षमता: 40,000 टन से अधिक के विस्थापन (Displacement) क्षमता वाले ये विशाल जहाज नौसेना के बेड़े को बीच समुद्र में ही ईंधन, पानी, गोला-बारूद और आवश्यक भंडार की आपूर्ति करेंगे।

  • रणनीतिक पहुंच: इनकी मदद से युद्धपोतों को बार-बार बंदरगाह पर लौटने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे उनकी दीर्घकालिक तैनाती और गतिशीलता में भारी वृद्धि होगी।

  • आपदा में बनेंगे तारणहार: अपनी प्राथमिक युद्धक और रसद भूमिका के अलावा, इन जहाजों को मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों के लिए भी विशेष रूप से सुसज्जित किया जाएगा।

  • इसके जरिए संकट के समय गैर-लड़ाकू निकासी अभियानों (NEO) और राहत सामग्री की शीघ्र आपूर्ति में मदद मिलेगी।

‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को बड़ा बूस्ट

यह एफएसएस (FSS) परियोजना पूरी तरह से ‘स्वदेशी डिजाइन’ पर आधारित है। इसमें इस्तेमाल होने वाले अधिकांश उपकरण और तकनीक स्वदेशी निर्माताओं से ही खरीदे जा रहे हैं।

यह महात्वाकांक्षी पहल भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ विजन के पूरी तरह अनुरूप है, जो आने वाले समय में भारतीय जहाज निर्माण (Shipbuilding) उद्योग को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगी।

Santosh SETH

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