भारतीय चिकित्सा में क्रांति: NRDC और NCISM के बीच ऐतिहासिक समझौता
भारतीय चिकित्सा प्रणाली में आएगी क्रांति: NRDC और NCISM के बीच अहम समझौता, आयुर्वेद और यूनानी को मिलेगी वैश्विक पहचान”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों— आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध और सोवा-रिग्पा को वैश्विक स्तर पर आधुनिक और वैज्ञानिक पहचान दिलाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है।
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के तहत आने वाले राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयोग (NCISM) और राष्ट्रीय अनुसंधान विकास निगम (NRDC) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
इस रणनीतिक साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारतीय चिकित्सा प्रणाली में नवाचार (Innovation), बौद्धिक संपदा (IP) प्रबंधन, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) और अनुसंधान (Research) के परिणामों को व्यावसायिक रूप देना है।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ करार
यह अहम समझौता NRDC के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक कमोडोर अमित रस्तोगी (सेवानिवृत्त) और NCISM की अध्यक्ष डॉ. मनीषा कोठेकर के बीच संपन्न हुआ।
इस अवसर पर आयुर्वेद बोर्ड (BOA) के अध्यक्ष डॉ. अल्लमप्रभु गुड्डा, यूनानी-सिद्ध-सोवा-रिग्पा बोर्ड (BUSSR) के अध्यक्ष प्रो. असीम अली खान और आयुर्वेद बोर्ड के सदस्य डॉ. अतुल बाबू वार्ष्णेय सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
समझौते के तहत क्या-क्या बदलाव होंगे?
यह साझेदारी पारंपरिक चिकित्सा और आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के बीच की खाई को पाटने का काम करेगी:
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NRDC की भूमिका: NRDC बौद्धिक संपदा (IP) के संरक्षण, पेटेंट और ट्रेडमार्क फाइलिंग, प्रौद्योगिकी के मूल्यांकन, लाइसेंसिंग और व्यावसायीकरण (Commercialization) में अपनी विशेषज्ञता प्रदान करेगा। इसके अलावा, यह संस्था इनोवेटर्स को मेंटरिंग और इनक्यूबेशन सपोर्ट भी देगी।
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NCISM की भूमिका: NCISM देशभर में अपने मान्यता प्राप्त संस्थानों, ‘रिसर्च, इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप डेवलपमेंट’ (RIED) सेल और पंजीकृत चिकित्सा व्यवसायियों के बीच आपसी संवाद और सहयोग को बढ़ावा देगा।
हैकाथॉन और आइडियाथॉन से निकलेगी नई प्रतिभा
इस सहयोग के जरिए देश भर में आइडियाथॉन, हैकाथॉन, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन और क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इससे पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में काम कर रहे युवा शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को अपने प्रमाणित उत्पादों और सेवाओं को बाजार में उतारने का मौका मिलेगा।
‘आत्मनिर्भर भारत के विजन को मिलेगी ताकत’
NRDC के CMD कमोडोर अमित रस्तोगी (सेवानिवृत्त) ने इस मौके पर कहा, “यह सहयोग नवोन्मेषकों और शोधकर्ताओं की मदद के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम बनाएगा।
हमारी विशेषज्ञता से आशाजनक शोध को व्यावसायिक प्रौद्योगिकियों में बदलने में मदद मिलेगी, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करेगा।”
वहीं, NCISM की अध्यक्ष डॉ. मनीषा कोठेकर ने कहा, “यह साझेदारी हमारे संस्थानों में रिसर्च और इनोवेशन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।
इससे हमारे फैकल्टी सदस्यों और चिकित्सकों को भारत के समृद्ध पारंपरिक ज्ञान पर आधारित आधुनिक हेल्थकेयर समाधान विकसित करने में प्रोत्साहन मिलेगा।”











