वित्त वर्ष 2025-26 में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) ने ऋण वितरण में 10.3 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की है। प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र (PSL) में किसानों, एमएसएमई और कमजोर वर्गों को बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) का शानदार प्रदर्शन: वित्त वर्ष 2025-26 में ऋण वितरण 10.3% बढ़ा, ग्रामीण विकास को मिली रफ्तार”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ऋण वितरण में मजबूत वृद्धि दर्ज करते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है।
प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र ऋण (Priority Sector Lending – PSL) पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए आरआरबी ने केंद्र सरकार के समावेशी विकास के विजन को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण बैंकों के सकल बकाया ऋण में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले शानदार वृद्धि हुई है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा तय किए गए पीएसएल लक्ष्यों को भी बैंकों ने सफलतापूर्वक पार कर लिया है:
| विवरण | आंकड़े और उपलब्धि |
| सकल बकाया ऋण (वित्त वर्ष 2024-25) | 5,24,163 करोड़ रुपये |
| सकल बकाया ऋण (वित्त वर्ष 2025-26) | 5,78,349 करोड़ रुपये |
| कुल वृद्धि (Growth Rate) | 10.3 प्रतिशत |
| PSL लक्ष्य | 75 प्रतिशत |
| PSL उपलब्धि (ANBC का) | 91.7 प्रतिशत |
लगभग सभी क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों ने इस 75 प्रतिशत के निर्धारित समग्र पीएसएल लक्ष्य को हासिल कर लिया है, जो ग्रामीण भारत में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक बड़ी सफलता है।
आरआरबी के ऋण पोर्टफोलियो में सबसे बड़ा हिस्सा कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों का रहा।
कुल ऋण: कृषि क्षेत्र को कुल 3.78 लाख करोड़ रुपये का बकाया ऋण दिया गया, जो प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के कुल ऋण का 77 प्रतिशत है।
कृषि क्षेत्र को दिए गए कुल ऋण का लगभग 98 प्रतिशत हिस्सा सीधे तौर पर फसल खेती, कृषि गतिविधियों और ग्रामीण निवेश को समर्थन देने के लिए प्रदान किया गया।
ग्रामीण उद्यमिता और रोजगार सृजन को बढ़ावा देने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र को भी भारी भरकम ऋण वितरित किया गया।
MSME ऋण: इस क्षेत्र को 66,978 करोड़ रुपये (कुल पीएसएल का 13.6 प्रतिशत) का ऋण दिया गया। इसमें से 95 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सूक्ष्म उद्यमों (Micro Enterprises) को मिला, जिससे पहली पीढ़ी के उद्यमियों और कारीगरों को सीधा फायदा हुआ।
कमजोर वर्ग: संस्थागत ऋण तक न्यायसंगत पहुंच सुनिश्चित करते हुए आरआरबी ने कमजोर वर्गों को 3.49 लाख करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया।
पारंपरिक क्षेत्रों के अलावा, आरआरबी ने आवास, शिक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) और सामाजिक अवसंरचना के लिए भी फंड मुहैया कराया है।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में मानव पूंजी निर्माण, स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने और स्थानीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में काफी मदद मिली है।
कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2025-26 में आरआरबी का प्रदर्शन समावेशी और संतुलित आर्थिक विकास की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।
कतर से भारत पैसे भेजना हुआ और आसान: UPI-आधारित 'पोसट्रांसफर' डाक धन-प्रेषण सेवा का शुभारंभ"…
ग्वालियर-चंबल को रेलवे की बड़ी सौगात: कैलारस-सबलगढ़-बीरपुर रेल खंड का उद्घाटन, शिक्षा-व्यापार को मिलेगी नई…
राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 की घोषणा: 17 खिलाड़ियों को अर्जुन अवार्ड, द्रोणाचार्य और लाइफटाइम पुरस्कारों…
हिमाचल प्रदेश में भूकंप की दहशत: चंबा और कांगड़ा में एक घंटे के भीतर कई…
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026: गुजरात और आंध्र प्रदेश में जुटेंगे विदेशी मेहमान, होगा 'युवा…
मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की तैयारी: दो दर्जन से अधिक मंत्रियों के बदल सकते…