केंद्र सरकार में जल्द ही बड़े फेरबदल के संकेत हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई टीम में दो दर्जन से अधिक मंत्रियों के विभागों में बदलाव और सहयोगी दलों को नई जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है।
मोदी कैबिनेट में बड़े फेरबदल की तैयारी: दो दर्जन से अधिक मंत्रियों के बदल सकते हैं विभाग, जानें कौन होगा इन-आउट !
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांगठनिक ढांचे में व्यापक बदलाव के बाद अब केंद्र की मोदी सरकार में भी बड़े फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी महीने अपने मंत्रिमंडल का पुनर्गठन कर सकते हैं। इस संभावित फेरबदल में करीब दो दर्जन से अधिक मंत्रियों के विभागों में बदलाव होने की संभावना है।
कुछ मंत्रियों का कार्यभार हल्का किया जा सकता है, तो कुछ को नई और बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं। इसके साथ ही कुछ चेहरों को सरकार से संगठन में वापस भेजे जाने की भी चर्चा है।
पीयूष गोयल: भाजपा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाए जाने के बावजूद पीयूष गोयल के वाणिज्य मंत्री बने रहने के संकेत हैं।
वैश्विक व्यापार समझौतों और अमेरिका के साथ जारी व्यापारिक वार्ताओं के मद्देनजर सरकार उनकी मौजूदा जिम्मेदारी में बदलाव के पक्ष में नहीं दिख रही है।
धर्मेंद्र प्रधान: नीट (NEET) विवाद के बाद शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने वाले धर्मेंद्र प्रधान की किसी अन्य बड़े मंत्रालय के साथ मंत्रिमंडल में वापसी की चर्चाएं तेज हैं।
हरदीप सिंह पुरी: पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है।
यदि उन्हें दोबारा संसद के उच्च सदन में नहीं भेजा जाता है, तो उन्हें मंत्री पद छोड़ना पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में कैबिनेट में सिख समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर नई रणनीति बन सकती है।
सहयोगी दलों की मांग और दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व एनडीए के घटक दलों की बढ़ती महत्वाकांक्षाएं भी इस फेरबदल में अहम भूमिका निभाएंगी:
चिराग पासवान: लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान अपने वर्तमान खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय से इतर किसी बड़े और महत्वपूर्ण मंत्रालय की अपेक्षा कर रहे हैं।
एकनाथ शिंदे गुट: 13 लोकसभा सांसदों के साथ शिवसेना (शिंदे गुट) एक और कैबिनेट बर्थ की मांग कर रहा है। इस संबंध में प्रधानमंत्री और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के बीच चर्चा भी हो चुकी है।
क्षेत्रीय संतुलन: दक्षिण भारत को साधने की दिशा में तमिलनाडु से द्रमुक को साथ लाने के राजनीतिक प्रयासों और राजस्थान से डॉ. अलका गुर्जर जैसे चेहरों को शामिल कर महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है।
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए भाजपा अपने सामाजिक समीकरणों को मजबूत करने में जुटी है:
उत्तर प्रदेश: राज्य के उपमुख्यमंत्रियों—केशव प्रसाद मौर्य या ब्रजेश पाठक में से किसी एक को केंद्र में लाने की चर्चा जोरों पर है।
अमरपाल मौर्य को ओबीसी मोर्चा का अध्यक्ष बनाए जाने के बाद केशव प्रसाद मौर्य की दिल्ली वापसी की संभावनाएं प्रबल मानी जा रही हैं।
हिमाचल प्रदेश: राज्य से जेपी नड्डा और अनुराग ठाकुर दोनों प्रमुख चेहरे हैं। चुनावी प्राथमिकताओं और सामाजिक समीकरणों के आधार पर अनुराग ठाकुर की भूमिका को लेकर भी अहम निर्णय हो सकता है।
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