राम मंदिर चढ़ावे में कथित चोरी और धांधली के खिलाफ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने 2 अक्टूबर से अयोध्या तक पदयात्रा करने और अपना चंदा वापस लेने के लिए कोर्ट जाने का ऐलान किया है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद: दिग्विजय सिंह का बड़ा ऐलान- ‘2 अक्टूबर से करेंगे उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा, कोर्ट से वापस मांगेंगे अपना चंदा’
भोपाल/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे की कथित चोरी के आरोपों पर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के खिलाफ बड़ा मोर्चा खोल दिया है।
उन्होंने शुक्रवार को ऐलान किया कि वह इस धांधली के विरोध में आगामी 2 अक्टूबर से उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा करेंगे।
इसके साथ ही, उन्होंने राम मंदिर के लिए दिए गए अपने दान की राशि वापस लेने के लिए सीधे कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की भी घोषणा की है।
दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्हें अपने दान किए गए पैसे का गलत इस्तेमाल होने का शक है।
कोर्ट में केस: उन्होंने कहा, “मैंने अयोध्या में मुकदमा करने का फ़ैसला किया है। मेरा चंदा हड़प लिया गया है। मैं वह पैसा वापस लेकर ‘रामलय ट्रस्ट’ में जमा करूंगा।”
रामभक्तों से अपील: सिंह ने अन्य रामभक्तों से भी अपील की है कि जिन लोगों ने चंदा दिया है, वे भी अपना पैसा वापस लाने के लिए इस पदयात्रा में उनके साथ अयोध्या चलें।
पुलिस पर अविश्वास: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उन्हें पुलिस स्टेशन पर कोई भरोसा नहीं है क्योंकि पुलिस पूरी तरह से बीजेपी के कंट्रोल में है, इसलिए वे सीधे कोर्ट जाएंगे।
चंदे की रकम का खुलासा करते हुए दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से ज्यादा चंदा दिया था।
शिवराज सिंह ने 1 लाख रुपये दान किए थे, इसलिए दिग्विजय सिंह ने 1,11,000 रुपये का दान दिया।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने का अनुरोध भी किया था कि यह रकम सीधे ट्रस्ट में जमा हो, जिसकी उन्होंने रसीद भी ली थी।
कांग्रेस नेता ने विश्व हिंदू परिषद (VHP) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने के दो बड़े अभियान चले थे।
लाल कृष्ण आडवाणी की रथ यात्रा के दौरान हुए पहले अभियान के चंदे का आज तक कोई हिसाब नहीं दिया गया।
उन्होंने कहा कि VHP के लिए दान के पैसे का गलत इस्तेमाल करना कोई नई बात नहीं है, यह उनकी पुरानी आदत है।
इस विवाद में आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी कूद पड़े हैं। केजरीवाल ने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री को घेरते हुए सवाल उठाए:
“अयोध्या में घोटाले तो पिछले पांच साल से चल रहे हैं, तो प्रधानमंत्री को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?”
केजरीवाल ने तर्क दिया कि राम मंदिर का ट्रस्ट केंद्र सरकार ने ही बनाया था और इसके सारे सदस्य भी केंद्र द्वारा ही चुने गए थे।
ऐसे में यह बात गले से नहीं उतरती कि इतनी बड़ी लूट चल रही थी और प्रधानमंत्री को इसकी कोई ख़बर नहीं थी।
विपक्ष के इन तीखे हमलों के बाद राम मंदिर चंदा विवाद अब एक बड़े राष्ट्रीय मुद्दे में तब्दील होता नजर आ रहा है।
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