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राज्यसभा: MSME संशोधन बिल 2026 पारित, टर्नओवर लिमिट 500 करोड़ हुई

राज्य सभा में MSME संशोधन बिल 2026 पारित: कारोबार होगा आसान, टर्नओवर लिमिट बढ़कर हुई 500 करोड़”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

देश के छोटे और मंझोले उद्योगों को बड़ी राहत देते हुए सोमवार को राज्य सभा में ‘सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026’ (MSME Amendment Bill 2026) ध्वनिमत से पारित हो गया।

इससे पहले, उच्च सदन ने विपक्ष द्वारा इस विधेयक पर लाए गए सभी संशोधनों को भी ध्वनिमत से खारिज कर दिया।

यह नया बिल मूल रूप से 2006 के अधिनियम में सुधार करेगा। इसका मुख्य उद्देश्य एमएसएमई (MSME) सेक्टर को संजीवनी देना, उनके फंसे हुए भुगतानों (Pending Payments) की समस्या को हल करना और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है।

बिल में हुए प्रमुख बदलाव और नए प्रावधान

राज्य सभा में चर्चा का जवाब देते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री जीतन राम मांझी ने स्पष्ट किया कि सरकार MSME सेक्टर के विकास के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस नए बिल में कई अहम बदलाव किए गए हैं:

  • टर्नओवर लिमिट में बड़ा इजाफा: एमएसएमई की परिभाषा में सुधार करते हुए टर्नओवर की लिमिट को बढ़ाकर 500 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

  • फ्री डिजिटल रजिस्ट्रेशन: एमएसएमई के मुफ्त और स्वैच्छिक पंजीकरण (Voluntary Registration) के लिए एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म नोटिफाई करने का प्रावधान किया गया है।

  • TReDS प्लेटफॉर्म से भुगतान: नकदी (Liquidity) के संकट को दूर करने के लिए, केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों (CPSEs) को एमएसएमई से खरीदी गई वस्तुओं और सेवाओं के इनवॉइस का सेटलमेंट अनिवार्य रूप से TReDS प्लेटफॉर्म के माध्यम से करना होगा।

  • राज्यों को भी अपने उपक्रमों के लिए ऐसे ही नियम बनाने का प्रस्ताव दिया गया है।

भुगतान विवादों के निपटारे के लिए सख्त ‘डेडलाइन’

छोटे कारोबारियों का पैसा न फंसे, इसके लिए बिल में विवादों के समाधान की बेहद सख्त समयसीमा (Timeline) तय की गई है:

  1. मध्यस्थता (Mediation): सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद या किसी मध्यस्थता सेवा प्रदाता के सामने पहली पेशी के 90 दिनों के अंदर मध्यस्थता की प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए।

  2. आर्बिट्रेशन (Arbitration): यदि मध्यस्थता विफल रहती है, तो 30 दिनों के भीतर मध्यस्थता (Arbitration) की कार्यवाही शुरू होनी चाहिए।

  3. अंतिम फैसला: सभी दलीलें पूरी होने के 90 दिनों के अंदर अंतिम फैसला जारी करना अनिवार्य होगा।

अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं MSME: जीतन राम मांझी

केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि 2014 के बाद से एमएसएमई सेक्टर को दिए जाने वाले लोन में कई गुना की वृद्धि हुई है।

तकनीकी बदलावों और नए डिजिटल परिदृश्य के कारण 2006 के कानून में बदलाव बेहद जरूरी हो गया था।

एमएसएमई आर्थिक विकास के मुख्य कारक हैं और जीडीपी व निर्यात में भारी योगदान देते हैं। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि इस सेक्टर में अब महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 39 प्रतिशत हो गई है।

और सरकार महिलाओं के साथ-साथ थर्ड जेंडर के उद्यमियों को भी विशेष रूप से प्रोत्साहित कर रही है।

Santosh SETH

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