भारतीय नौसेना का भविष्य का क्रूजर युद्धपोत 'प्रोजेक्ट 18'
प्रोजेक्ट 18: समंदर में ‘सिकंदर’ बनेगी भारतीय नौसेना, 13 हजार टन का क्रूजर युद्धपोत उड़ाएगा चीन-पाक के होश ‘
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
भारतीय नौसेना अब समंदर में अपना दबदबा और भी प्रचंड करने जा रही है। एक ऐसे महाविनाशक प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है जो न केवल नौसेना की तस्वीर बदल देगा, बल्कि हिंद महासागर में शक्ति संतुलन को पूरी तरह से भारत के पक्ष में झुका देगा।
‘The Politics Again’ की डिफेंस डेस्क के अनुसार, इस नए मिशन का नाम ‘प्रोजेक्ट 18’ (Project 18) है। इसके तहत भारत अब सिर्फ सामान्य विध्वंसक (Destroyer) नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे शक्तिशाली ‘क्रूजर क्लास’ (Cruiser Class) युद्धपोत बनाने की तैयारी कर रहा है।
इस महाविशाल युद्धपोत के सामने चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की नौसैनिक ताकत बौनी साबित होगी। आइए जानते हैं इस अजेय युद्धपोत की अचूक ताकतों के बारे में:
🚢 180 मीटर लंबा तैरता हुआ किला: क्रूजर युद्धपोत
ग्रीक सिटी टाइम्स की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, प्रोजेक्ट 18 भारतीय नौसेना का अब तक का सबसे बड़ा और घातक ‘सरफेस वॉरशिप’ होगा।
विशालकाय आकार: इस युद्धपोत का वजन लगभग 11,000 से 13,000 टन के बीच होने का अनुमान है।
लंबाई: इसकी लंबाई लगभग 180 मीटर तक होगी, जो इसे समंदर में तैरते हुए एक अभेद्य किले जैसा स्वरूप प्रदान करेगी।
🤫 साइलेंट किलर: आवाज रहित ‘IEP’ तकनीक
इस महाविशाल जहाज को ताकत देने के लिए इंटीग्रेटेड इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन (IEP) नामक अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।
पनडुब्बियां खाएंगी धोखा: IEP तकनीक न केवल जहाज को भारी मात्रा में बिजली देगी, बल्कि यह समंदर के अंदर बिल्कुल भी आवाज नहीं करेगी (Silent Operation)। इस खामोशी के कारण दुश्मन की पनडुब्बियां सोनार के जरिए इसे ट्रैक नहीं कर पाएंगी।
कम क्रू की जरूरत: यह युद्धपोत पूरी तरह से डिजिटल और हाईटेक ऑटोमेटिक होगा। इसके कारण इसे ऑपरेट करने के लिए मौजूदा जहाजों की तुलना में 25 से 30% कम नौसैनिकों (Crew) की जरूरत पड़ेगी।
⚡ लेजर वेपन्स और समंदर का ‘बॉस’ (कमांड हब)
यह जहाज सिर्फ खुद लड़ाई नहीं लड़ेगा, बल्कि एक ‘मल्टी-डोमेन कमांड हब’ के रूप में समंदर के ‘बॉस’ की तरह काम करेगा।
ड्रोन कंट्रोल: यह हवा में उड़ने वाले यूएवी (UAVs), पानी की सतह पर चलने वाली मानवरहित नौकाओं (USVs) और अंडरवाटर ड्रोन को एक साथ कंट्रोल और गाइड कर सकेगा।
डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स: जहाज द्वारा पैदा की जाने वाली विशाल बिजली का उपयोग भविष्य के एडवांस रडार सिस्टम और ‘डायरेक्टेड एनर्जी वेपन्स’ (जैसे लेजर हथियार) को चलाने में होगा, जो दुश्मन के विमानों को पलक झपकते ही हवा में भस्म कर देंगे।
🚀 हथियारों का महाविनाशक जखीरा: 144 VLS सेल्स
प्रोजेक्ट 18 का सबसे हैरान करने वाला पहलू इसका घातक वेपन सिस्टम है, जो इसे पूरे एशिया का सबसे भारी और खतरनाक हथियारों वाला युद्धपोत बनाएगा।
144 मिसाइल सिस्टम: इस जहाज में 144 वर्टिकल लॉन्च सिस्टम (VLS) सेल्स होने की उम्मीद है। अतिरिक्त मारक क्षमता के लिए जहाज के बीच के हिस्से में स्लंट लॉन्चर भी लगाए जा सकते हैं।
एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल (ABM) शील्ड: यह युद्धपोत मल्टी-लेयर एयर और मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस होगा।
इसका खास रडार और मिसाइल सिस्टम 250 से 350 किलोमीटर की दूरी से ही दुश्मन की बैलिस्टिक मिसाइलों को ट्रैक कर उन्हें हवा में ही नष्ट करने में सक्षम होगा।
यूपी चुनाव 2027: चिराग पासवान ने छेड़ा चुनावी बिगुल, सभी 403 सीटों पर लोजपा (रामविलास)…
वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 में NIFT के छात्रों का जलवा: भारत ने जीते 2 रजत और…
'टीम एग्रीकल्चर' के दम पर दुनिया का फूड बास्केट बनेगा भारत: रबी अभियान-2026 में कृषि…
FCRA रजिस्ट्रेशन के नाम पर रिश्वतखोरी: गृह मंत्रालय के इनपुट पर दिल्ली पुलिस का बड़ा…
एशियन गेम्स 2026: शूटर नीरू ढांडा ने रचा इतिहास, इंडिविजुअल ट्रैप इवेंट में जीता भारत…
सुल्तानपुर में खौफनाक वारदात: शिक्षक संघ अध्यक्ष और उनकी पत्नी की गला रेतकर निर्मम हत्या,…