महाराष्ट्र की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो सकती है। 1999 में कांग्रेस से अलग होकर एनसीपी बनाने वाले शरद पवार की पार्टी के एक बार फिर कांग्रेस में विलय की गंभीर चर्चाएं चल रही हैं।
महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा भूचाल: 27 साल बाद कांग्रेस में ‘घर-वापसी’ की तैयारी में शरद पवार? विलय पर चर्चा अंतिम चरण में”
मुंबई/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
महाराष्ट्र की राजनीति से इस समय की सबसे बड़ी और धमाकेदार सियासी खबर सामने आ रही है। महाविकास अघाड़ी (MVA) में सहयोगी शरद पवार की पार्टी (NCP-SP) और कांग्रेस के बीच पूरी तरह से विलय (Merger) को लेकर बेहद गंभीर चर्चा शुरू हो चुकी है।
इस बात की आधिकारिक पुष्टि खुद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के पूर्व नेता विजय वडेट्टीवार ने कर दी है, जिससे दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
एक न्यूज़ चैनल से खास बातचीत में विजय वडेट्टीवार ने इस संभावित विलय पर मुहर लगाते हुए कहा, “शरद पवार की पार्टी के कांग्रेस में विलय को लेकर हमारे केंद्रीय आलाकमान के साथ बातचीत चल रही है। जो लोग भी कांग्रेस और शरद पवार की धर्मनिरपेक्ष विचारधारा में विश्वास रखते हैं, उन सभी का हमारी पार्टी में हमेशा स्वागत है।”
सूत्रों के मुताबिक, नई दिल्ली में वरिष्ठ नेतृत्व स्तर पर यह बातचीत अब अपने अंतिम चरण में है और इसमें काफी सकारात्मक प्रगति हुई है।
कांग्रेस लीडरशिप ने NCP (शरदचंद्र पवार) के उन विधायकों और सांसदों को हरी झंडी दे दी है, जो कांग्रेस में शामिल होना चाहते हैं।
गौरतलब है कि साल 1999 में शरद पवार ने सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर कांग्रेस से अलग होकर ‘राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी’ (NCP) का गठन किया था।
लेकिन समय का चक्र ऐसा घूमा कि साल 2023 में उनके भतीजे अजीत पवार ने बड़ी बगावत कर दी और एनसीपी को दो फाड़ कर दिया।
भतीजे की बगावत के बाद शरद पवार की पार्टी कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है, और अब 27 साल बाद दोनों दलों के पूरी तरह एक होने की सुगबुगाहट तेज है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी और उद्धव ठाकरे जैसे क्षेत्रीय नेताओं को हाल ही में जो राजनीतिक झटके लगे हैं (जहां उनके सांसदों ने अपनी मूल पार्टियों को छोड़कर अलग गुट बनाने का फ़ैसला किया),
उससे शरद पवार का खेमा भी चौकन्ना हो गया है। इसी राजनीतिक असुरक्षा और माहौल के बीच कांग्रेस के साथ संभावित विलय की चर्चा ने जोर पकड़ लिया है।
सूत्रों के मुताबिक, 85 साल के शरद पवार और उनकी पार्टी के राजनीतिक भविष्य को लेकर पार्टी के भीतर ही दो अलग-अलग राय सामने आ रही हैं:
NDA समर्थक गुट: पार्टी का एक बड़ा धड़ा नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) में शामिल होने के पक्ष में है। इस खेमे का मानना है कि विपक्ष में रहने के कारण राज्य और केंद्र, दोनों स्तरों पर विकास कार्यों और अपने चुनाव क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को हल करवाना मुश्किल हो रहा है।
अजित पवार की रणनीति और निधन का असर: सूत्रों का कहना है कि दिवंगत डिप्टी सीएम अजित पवार चाहते थे कि अगर NCP के दोनों गुट फिर से एक हो जाएं, तो भी NDA के साथ ही बने रहा जाए।
हालांकि, उनके निधन के बाद दोनों गुटों के फिर से एक होने की संभावना कम हो गई है, लेकिन NDA समर्थक धड़े का मानना है कि NDA में अलग से शामिल होने में कोई बाधा नहीं आएगी।
कांग्रेस समर्थक गुट: वहीं, पार्टी के भीतर एक दूसरा और मजबूत गुट वैचारिक आधार पर कांग्रेस के साथ विलय के पक्ष में बताया जा रहा है, जिसकी बातचीत अब दिल्ली दरबार में अंतिम रूप ले रही है।
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले अगर यह विलय संपन्न होता है, तो यह राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह से पलट कर रख देगा। अब सबकी निगाहें शरद पवार के अगले कदम पर टिकी हैं।
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