टीएमसी में भारी बगावत और फिरहाद हकीम के इस्तीफे से मचा सियासी हड़कंप
बंगाल में सियासी भूकंप: टीएमसी में दो फाड़, ममता की बैठक से महुआ नदारद, फिरहाद हकीम का इस्तीफा “
कोलकाता/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर का अंतर्विरोध अब एक बड़ी राजनीतिक सुनामी में तब्दील हो गया है।
‘The Politics Again’ की राजनीतिक डेस्क के अनुसार, पार्टी के विधायक दल में बड़ी टूट के बाद अब संसदीय दल का विभाजन भी पूरी तरह तय माना जा रहा है।
शनिवार को टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई सांसदों और विधायकों की समीक्षा बैठक में नेताओं की बेहद कम उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे बड़े बिखराव के मुहाने पर खड़ी है।
ममता की बैठक में सांसदों-विधायकों का ‘वॉकआउट’
ममता बनर्जी के आवास पर बुलाई गई इस महत्वपूर्ण बैठक में जो आंकड़े सामने आए, वे टीएमसी के अस्तित्व पर सीधा सवाल खड़े कर रहे हैं:
सांसदों की दूरी: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पार्टी के कुल 41 लोकसभा और राज्यसभा सांसदों में से मात्र 6 सांसद ही इस बैठक में हिस्सा लेने पहुंचे।
विधायकों का असंतोष: विरोधी गुट से दूरी बनाए रखने वाले बचे हुए 21 विधायकों में से भी सिर्फ 8 विधायकों ने ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
बड़े चेहरे नदारद: सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि चुनाव प्रचार का प्रमुख चेहरा रहीं सायानी घोष और फायरब्रांड नेता महुआ मोइत्रा जैसी कद्दावर महिला नेताओं ने भी इस बैठक से दूरी बनाए रखी।
यह स्पष्ट संकेत है कि पार्टी का एक बहुत बड़ा धड़ा अब बागी रुख अख्तियार कर चुका है।
मेयर फिरहाद हकीम का इस्तीफा और मुस्लिम वोटबैंक में सेंध
तृणमूल कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक और प्रशासनिक ढांचे को सबसे बड़ा सामाजिक झटका तब लगा, जब कोलकाता के मेयर और ममता बनर्जी के सबसे खास माने जाने वाले दिग्गज नेता फिरहाद हकीम ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया।
जब ऋतब्रता बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट में फूट पड़ी थी, तो टीएमसी के टिकट पर जीते 31 मुस्लिम विधायकों में से 17 विधायक सीधे तौर पर बागी गुट के साथ चले गए थे।
शुक्रवार की बैठक में बचे हुए 14 मुस्लिम विधायकों में से केवल फिरहाद हकीम ही उपस्थित होने वाले इकलौते विधायक थे, लेकिन बैठक के तुरंत बाद उन्होंने भी अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।
सभी मुस्लिम सांसदों की अनुपस्थिति ने पार्टी के अल्पसंख्यक वोट बैंक में भी बड़ी सेंधमारी का साफ इशारा कर दिया है।
सीएम शुभेंदु अधिकारी का ‘दिल्ली मंथन’ और ‘महाराष्ट्र प्लान’
बंगाल में मची इस भारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच प्रदेश के नए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अचानक शुक्रवार को दिल्ली पहुंच गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक, सीएम अधिकारी ने भाजपा के शीर्ष केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात कर बंगाल के भावी राजनीतिक घटनाक्रम और कूटनीति पर विस्तृत चर्चा की है।
महाराष्ट्र मॉडल की रणनीति: भाजपा की रणनीति है कि महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी (NCP) की तर्ज पर ही टीएमसी का बागी गुट असली पार्टी और चुनाव चिह्न पर अपना दावा ठोके।
वाम मोर्चे का डर: हालांकि, भाजपा के भीतर एक धड़े को यह डर भी सता रहा है कि अगर टीएमसी पूरी तरह से खत्म होती है या उसका भाजपा में विलय होता है,
तो राज्य में मुख्य विपक्षी दल के रूप में ‘वाम मोर्चा’ (Left Front) का दोबारा उभार हो सकता है, जो भविष्य में उनके लिए नई चुनौती बन सकता है।
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