पीएमओ में अल-नीनो और मानसून की तैयारियों पर उच्च स्तरीय बैठक

पीएमओ ने अल-नीनो के खतरे और मानसून की तैयारियों की समीक्षा की

अल-नीनो की चुनौती: पीएमओ की उच्च स्तरीय बैठक, खरीफ सीजन और खाद्य सुरक्षा पर सरकार का पूरा फोकस”

नई दिल्ली : THE POLITICS AGAIN :  संतोष सेठ की रिपोर्ट

खरीफ सीजन की प्रगति और देश की अर्थव्यवस्था पर अल-नीनो (El-Niño) के संभावित असर को देखते हुए केंद्र सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है।

सोमवार, 7 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा की अध्यक्षता में ‘सेवा तीर्थ’ में एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

इस बैठक में 15 से अधिक प्रमुख मंत्रालयों के सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया और मानसून की स्थिति व संभावित खतरों से निपटने की तैयारियों का जायजा लिया।

क्या है वर्तमान स्थिति?

बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मानसून की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी:

  • मानसून का फैलाव: गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में मानसून के आने में लगभग 10 दिनों की देरी हुई, लेकिन 7 जुलाई तक देश में बारिश की कमी घटकर मात्र -12% रह गई है।

  • जुलाई का रुख: जुलाई के पहले हफ्ते में मानसून सामान्य से बेहतर रहा है।

  • अल-नीनो का अनुमान: मौसम विभाग के अनुसार जुलाई और अगस्त में कमज़ोर से मध्यम स्तर का अल-नीनो रहने की संभावना है।

  • चूंकि मानसून की 30% से अधिक बारिश जुलाई में ही होती है, इसलिए सरकार ने स्थिति पर 24 घंटे नजर रखने का निर्णय लिया है।

सरकार की रणनीति: ‘क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’

कृषि सचिव ने बताया कि अल-नीनो के संभावित प्रभाव को बेअसर करने के लिए सरकार ने पुख्ता इंतजाम किए हैं।

  • साप्ताहिक निगरानी: राज्यों के साथ मिलकर ‘क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप’ (Crop Weather Watch Group) की साप्ताहिक बैठकें की जा रही हैं।

  • आपातकालीन योजना: देश के 262 संवेदनशील जिलों के लिए ‘जिला कृषि आपातकालीन योजनाएं’ (District Agriculture Contingency Plans) अपडेट की गई हैं।

  • तकनीक पर जोर: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने कृषि विज्ञान केंद्रों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) जारी की हैं ताकि कम बारिश में भी फसल का उत्पादन प्रभावित न हो।

मंत्रालयों को दिए गए अहम निर्देश

प्रधानमंत्री कार्यालय ने सभी संबंधित मंत्रालयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे राज्य सरकारों के साथ तालमेल बिठाकर काम करें:

  1. खाद्य सुरक्षा: उपभोक्ता मामलों के विभाग को चावल, गेहूं और दालों की कीमतों और बफर स्टॉक पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है।

  2. पशुधन और चारा: पशुपालन और डेयरी विभाग को सूखे चारे, हरे चारे और पशु आहार की उपलब्धता का आकलन करने का निर्देश दिया गया है।

  3. पेयजल: पेयजल और स्वच्छता विभाग को संवेदनशील जिलों में जल स्तर की सूक्ष्म-स्तर पर निगरानी करने को कहा गया है।

  4. स्वास्थ्य: स्वास्थ्य मंत्रालय को लू (Heat wave), नमी और डेंगू जैसी बीमारियों के प्रकोप की निगरानी के लिए एडवाइजरी जारी रखने को कहा गया है।

  5. उर्वरक: उर्वरक विभाग को रबी सीजन के लिए स्टॉक की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

तालमेल से निकलेगा समाधान

डॉ. पी.के. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि कृषि और आर्थिक गतिविधियों पर मानसून की देरी का असर न पड़े, इसके लिए स्थानीय स्तर की रणनीतियां (Micro-level strategy) अपनाई जानी चाहिए।

राज्यों को उन जिलों की पहचान करने को कहा गया है जो सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं, ताकि समय रहते वहां सुधार के उपाय किए जा सकें।

सरकार का साफ संदेश है कि ‘विकसित भारत’ की राह में खाद्य सुरक्षा और किसानों का हित सर्वोपरि है।

ग्रामीण विकास विभाग ने जानकारी दी कि ‘विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन’ के तहत 1 जुलाई से अब तक 1 करोड़ कार्यदिवस (Man-days) पैदा किए जा चुके हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहे हैं।

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