PM Narendra Modi and Iranian leaders in a diplomatic meeting

पीएम मोदी को खामेनेई के अंतिम संस्कार का मिला न्योता

ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई का अंतिम संस्कार 5 जुलाई से: राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने पीएम मोदी को भेजा न्योता”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मोर्चे पर एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया है।

‘The Politics Again’ को राजनयिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह निमंत्रण ईरान की ओर से आधिकारिक तौर पर भारत के विदेश मंत्रालय को भेज दिया गया है।

हालांकि, भारत सरकार की ओर से अभी तक प्रधानमंत्री मोदी के ईरान दौरे को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि या बयान जारी नहीं किया गया है।

5 से 9 जुलाई तक चलेंगे अंतिम संस्कार के कार्यक्रम

सूत्रों के मुताबिक, दिवंगत सर्वोच्च नेता खामेनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्में कई दिनों तक चलेंगी। इसके लिए 5 से 9 जुलाई तक का समय निर्धारित किया गया है:

  • 5, 6 और 7 जुलाई: शुरुआती तीन दिन शोक और अंतिम संस्कार के कार्यक्रम राजधानी तेहरान और पवित्र शहर कुम (Qom) में आयोजित किए जाएंगे।

  • 9 जुलाई: अंतिम और मुख्य कार्यक्रम 9 जुलाई को ईरान के मशहद (Mashhad) शहर में संपन्न होगा।

तीन दशक का नेतृत्व और मौत का कारण

अयातुल्ला अली खामेनेई ने लगभग तीन दशकों तक ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में देश का नेतृत्व किया। गौरतलब है कि 28 फरवरी को इजराइल और अमेरिका की एक संयुक्त सैन्य कार्रवाई में उनकी मौत हो गई थी।

इस घटना के बाद ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव आया और उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया।

भारत का रुख: विदेश सचिव ने दी थी श्रद्धांजलि

खामेनेई की मौत के बाद भारत सरकार ने कूटनीतिक संतुलन बनाए रखते हुए कोई भी औपचारिक राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं दी थी।

हालांकि, भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास जाकर भारत की ओर से अपना श्रद्धांजलि संदेश दर्ज कराया था।

अमेरिका-ईरान तनाव का वैश्विक असर

खामेनेई की मौत और अमेरिका-ईरान के बीच चले इस हिंसक संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर भारी उथल-पुथल मचाई है।

  • तेल आपूर्ति पर असर: युद्ध के दौरान महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया भर में तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की बढ़ती कीमतों के रूप में सामने आया।

  • शांति वार्ता के प्रयास: इस बढ़ते वैश्विक संकट को खत्म करने के लिए कूटनीतिक स्तर पर बातचीत की कोशिशें भी की गईं।

  • तनाव को कम करने के उद्देश्य से पहले पाकिस्तान में और फिर स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत की पहल की गई थी।

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