प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी का लेख साझा कर शिक्षण को एक रचनात्मक कला और शिक्षकों को राष्ट्र निर्माता करार दिया।
शिक्षक हैं ‘राष्ट्र निर्माता’: PM मोदी ने जयंत चौधरी का लेख साझा कर शिक्षण को बताया रचनात्मक कला”
नई दिल्ली : संतोष सेठ की रिपोर्ट : THE POLITICS AGAIN
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार (7 सितंबर 2026) को शिक्षा और शिक्षकों के महत्व पर केंद्रीय राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी द्वारा लिखा गया एक विशेष लेख साझा किया है।
Union MoS Shri @jayantrld writes that teaching is an art and a creative act, requiring human connections, pedagogy and the ability to see potential in students.
He highlights how NEP 2020, ULLAS, Vidyanjali and various other initiatives are strengthening teaching and learning,… pic.twitter.com/cqDItsWp48
— PMO India (@PMOIndia) September 7, 2026
इस लेख में शिक्षण को महज एक पेशा न मानकर, इसे एक उत्कृष्ट कला और रचनात्मक कार्य के रूप में रेखांकित किया गया है, जो राष्ट्र निर्माण की सबसे मजबूत नींव है।
शिक्षण: मानवीय संपर्क और संभावनाओं को परखने की कला प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर इस लेख का हवाला देते हुए एक अहम पोस्ट किया।
लेख में इस बात पर जोर दिया गया है कि एक आदर्श शिक्षण व्यवस्था के लिए मजबूत मानवीय संपर्क, आधुनिक शिक्षाशास्त्र (Pedagogy) और छात्रों के भीतर छिपी असीम संभावनाओं को पहचानने की गहरी क्षमता अनिवार्य है।
केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने अपने आलेख में स्पष्ट किया है कि एक शिक्षक अपनी रचनात्मकता और समझ से ही किसी छात्र के भविष्य को सही आकार दे सकता है।
इस आलेख में भारत सरकार की उन प्रमुख योजनाओं और नीतियों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया है, जो देश की शिक्षा प्रणाली और शिक्षण पद्धति को अभूतपूर्व तरीके से मजबूत कर रही हैं:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020: यह नीति रटंत विद्या के बजाय रचनात्मक, व्यावहारिक और कौशल-आधारित शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
उल्लास (ULLAS) और विद्यांजलि (Vidyanjali): इन विशेष पहलों के माध्यम से समाज, स्वयंसेवकों और स्कूलों के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण किया जा रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार हो सके।
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए इस लेख का मूल संदेश यह है कि देश के प्रत्येक शिक्षक को ‘राष्ट्र निर्माण में योगदानकर्ता’ के रूप में सर्वोच्च मान्यता दी जानी चाहिए।
सरकार की नई नीतियां और पहल शिक्षकों को वह सम्मान, संसाधन और स्वायत्तता प्रदान कर रही हैं, जिससे वे आने वाली पीढ़ियों को सशक्त बना सकें।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी: 'SC/ST एक्ट के मुआवजे का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं', एक ही…
यूपी टेक्स-2026: 'माफिया-मुक्त' यूपी में बिछी टेक्सटाइल हब की बिसात, सीएम योगी ने दी करोड़ों…
चंडीगढ़ में कांग्रेस का हल्ला बोल: CM आवास घेरने जा रहे राजा वड़िंग और कार्यकर्ताओं…
वडोदरा में बरसे PM मोदी: "2014 तक फाइलों को नहीं मिला था डेडिकेटेड कॉरिडोर, UPA…
दिवाली-छठ पर घर जाना हुआ आसान: पश्चिम रेलवे ने मुंबई, अहमदाबाद और इंदौर के बीच…
हिमाचल में मानसून का तांडव: 67 सड़कें बंद, मंडी सबसे ज्यादा प्रभावित; आपदा से अब…