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तेल संकट: चीन जा रहा रूसी टैंकर मुड़ा भारत, मचा हड़कंप

वैश्विक तेल संकट: चीन जा रहा रूसी तेल का टैंकर मुड़ा भारत की ओर, दुनिया में मची खलबली; संकटमोचक की भूमिका में भारत

नई दिल्ली | संतोष सेठ की रिपोर्ट, The Politics Again

ईरान, अमेरिका और इजराइल के बीच 20वें दिन भी जारी भीषण युद्ध ने पूरी दुनिया को गंभीर तेल संकट की गिरफ्त में ले लिया है।

ईरान द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Strait of Hormuz) पर रोक लगाने से हाहाकार मचा हुआ है, क्योंकि दुनिया का 20 से 25% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। इस वैश्विक संकट के बीच भारत का कूटनीतिक दम पूरी दुनिया देख रही है।

बीते दिनों होर्मुज से भारत के दो जहाज सुरक्षित गुजरात पहुंचे थे, और अब भारत ने अपना ‘ट्रंप कार्ड’ चलते हुए एक ऐसा दांव चला है जिससे दुनिया भर में हड़कंप मच गया है।

दरअसल, चीन के रिजाओ (Rizhao) बंदरगाह की ओर बढ़ रहा एक रूसी तेल का टैंकर दक्षिण चीन सागर से अचानक यू-टर्न लेकर भारत की ओर मुड़ गया है।

‘एक्वाटाइटन’ का यू-टर्न और भारत का मास्टरस्ट्रोक

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘एक्वाटाइटन’ (Aquatitan) नाम का यह अफ्रामैक्स टैंकर जनवरी के अंत में बाल्टिक सागर के एक बंदरगाह से उराल क्रूड ऑयल (Ural Crude Oil) लेकर निकला था।

इसका डेस्टिनेशन चीन था, लेकिन मार्च के मध्य में दक्षिण-पूर्व एशियाई समुद्री क्षेत्र में पहुंचते ही इसने यू-टर्न ले लिया।

अब यह टैंकर 21 मार्च को भारत के न्यू मंगलौर बंदरगाह पर पहुंचने वाला है। इसके अलावा 5 से 7 अन्य टैंकरों के भी चीन के रास्ते से मुड़कर भारत की तरफ आने की खबरें हैं।

रूस से तेल आयात और अमेरिका की तथाकथित ‘छूट’

ईरान संकट की वजह से अमेरिका ने मार्च में 30 दिनों की ‘टेंपरेरी छूट’ देने की बात कही है। हालांकि, भारत का रुख इस पर हमेशा से स्पष्ट रहा है।

विदेश मंत्री एस जयशंकर कई अंतरराष्ट्रीय मंचों से दो टूक कह चुके हैं कि भारत को अपने फैसले लेने के लिए किसी देश की इजाजत की जरूरत नहीं है।

आंकड़ों की बात करें तो रूस वर्तमान में लगभग 3.3 से 4.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन क्रूड ऑयल बेच रहा है।

इसमें सबसे बड़ा खरीदार चीन (लगभग 48-52%) है, जबकि दूसरा बड़ा खरीदार भारत है। फरवरी में भारत 1 मिलियन बैरल प्रतिदिन खरीद रहा था, जो अब मार्च के संकट काल में बढ़कर 1.5 मिलियन बैरल प्रतिदिन हो गया है।

होर्मुज के बंद होने से सऊदी, इराक और यूएई से तेल की सप्लाई घटी है, जिसकी भरपाई भारत IOCL और Reliance के जरिए रूसी तेल से कर रहा है।

क्या पीएम मोदी रुकवाएंगे युद्ध?

एक तरफ अमेरिका और इजराइल ईरान के शीर्ष नेताओं को निशाना बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ दुनिया की नजरें भारत पर टिक गई हैं।

कई वैश्विक नेताओं का मानना है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका, ईरान और इजराइल (नेतन्याहू) के शीर्ष नेतृत्व से सीधी बात करें, तो इस विनाशकारी युद्ध को रोका जा सकता है।

इधर, रूस इस संकट के बीच पाकिस्तान को भी तेल का ऑफर दे रहा है, लेकिन पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था और राजनीतिक चुप्पी के बीच भारत की नजरें इस संभावित गठजोड़ पर भी पूरी तरह से बनी हुई हैं।

Santosh SETH

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