केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी इथेनॉल नीति और वैकल्पिक ईंधन पर

नितिन गडकरी ने इथेनॉल नीति से निजी फायदे के आरोप खारिज किए

‘इथेनॉल नीति से मुझे कोई निजी फायदा नहीं…’, नितिन गडकरी ने हितों के टकराव के आरोपों को किया सिरे से खारिज; आलोचकों को दी चुनौती”

नई दिल्ली : THE POLITICS AGAIN डेस्क: संतोष सेठ की रिपोर्ट

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने केंद्र सरकार के ‘इथेनॉल-ब्लेंडिंग प्रोग्राम’ (Ethanol-Blending Program) का जोरदार बचाव किया है।

बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस पॉलिसी को लेकर अपने ऊपर लग रहे ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest) के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया।

गडकरी ने कड़े शब्दों में कहा कि इस पॉलिसी से न तो गाड़ियों को कोई नुकसान हुआ है और न ही उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोई बड़ा आर्थिक फायदा हो रहा है।

उन्होंने आलोचकों को खुली चुनौती दी कि वे यह साबित करके दिखाएं कि E20 (20% इथेनॉल मिश्रित) फ्यूल से किसी भी पेट्रोल गाड़ी के इंजन को कोई नुकसान पहुंचा है।

‘0.07 प्रतिशत हिस्सेदारी से कोई फायदा नहीं’

नितिन गडकरी ने उन दावों को पूरी तरह से बेबुनियाद बताया जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने अपने निजी फायदे के लिए इथेनॉल पॉलिसी बनाई है।

  • पारिवारिक कारोबार: उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके परिवार का चीनी (Sugar) का कारोबार सरकार की इथेनॉल पॉलिसी लागू होने से बहुत पहले से चल रहा है।

  • हिस्सेदारी न के बराबर: गडकरी ने आंकड़े पेश करते हुए कहा,

  • “भारत अभी लगभग 550 इथेनॉल बनाने वाली यूनिट्स के ज़रिए हर साल करीब 1,500 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन करता है।

  • इस विशाल उत्पादन में मेरी हिस्सेदारी सिर्फ़ 0.07 प्रतिशत है। इतनी कम हिस्सेदारी के साथ, किसी बड़े आर्थिक फायदे या देश की पॉलिसी को प्रभावित करने का सवाल ही नहीं उठता।”

मकसद: कच्चे तेल का आयात कम करना और किसानों की आय बढ़ाना

केंद्रीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि वे हमेशा से केवल इथेनॉल ही नहीं, बल्कि ‘वैकल्पिक ईंधन’ (Alternative Fuels) की वकालत करते रहे हैं। इस नीति के पीछे सरकार के मुख्य उद्देश्य हैं:

  1. विदेशों से आयातित महंगे कच्चे तेल (Crude Oil) पर भारत की निर्भरता को कम करना।

  2. देश में साफ-सुथरे और पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) ईंधन को बढ़ावा देना।

  3. किसानों को अन्नदाता से ‘ऊर्जादाता’ बनाना, जिससे उनकी आय में सीधी बढ़ोतरी हो सके।

‘यह मेरा अकेला फैसला नहीं था’

यह जताते हुए कि यह नीति पूरी तरह से पारदर्शी है, गडकरी ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला किसी बंद कमरे में अकेले नहीं लिया गया था।

“इथेनॉल पर फ़ैसला मैंने अकेले नहीं लिया है। यह एक सामूहिक निर्णय था जिसे पेट्रोलियम मंत्रालय, केंद्रीय कैबिनेट और वैज्ञानिक शोधकर्ताओं के साथ व्यापक बातचीत और वैज्ञानिक मूल्यांकन (Scientific Evaluation) के बाद ही अंतिम रूप दिया गया है।”

नितिन गडकरी का यह स्पष्टीकरण उन आलोचकों के लिए एक कड़ा संदेश है जो देश के ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और वैकल्पिक ईंधन की दिशा में उठाए जा रहे कदमों को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे थे।