राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग (NCAHP) ने DMLT सहित 16 अन्य पैरामेडिकल कोर्सेज के लिए नया योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम जारी किया है, जिसे शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से लागू किया जाएगा।
मेडिकल छात्रों के लिए बड़ी खबर: NCAHP ने DMLT के लिए जारी किया नया पाठ्यक्रम, 2026-27 से होगा लागू”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
देश में स्वास्थ्य सेवाओं और उससे जुड़ी शिक्षा की गुणवत्ता को विश्वस्तरीय बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत काम करने वाले ‘राष्ट्रीय संबद्ध एवं स्वास्थ्य सेवा आयोग’ (NCAHP) ने डिप्लोमा इन मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजी (DMLT) के लिए एक नया योग्यता-आधारित (Competency-Based) पाठ्यक्रम जारी किया है।
1 जुलाई 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, इस नए सिलेबस को आधुनिक चिकित्सा आवश्यकताओं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
आयोग (NCAHP) ने स्पष्ट किया है कि जो भी संस्थान वर्तमान में DMLT कोर्स संचालित कर रहे हैं या भविष्य में इसे शुरू करने वाले हैं, उन्हें शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से इस नए घोषित पाठ्यक्रम को लागू करने की सलाह दी गई है।
हालांकि, अगले शैक्षणिक वर्ष 2027-28 से इसे हर हाल में अनिवार्य रूप से लागू करना होगा।
यह नया दो वर्षीय DMLT कार्यक्रम उन छात्रों के लिए तैयार किया गया है, जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से भौतिकी (Physics), रसायन विज्ञान (Chemistry) और जीव विज्ञान (Biology) के साथ 12वीं (विज्ञान) की परीक्षा पास की है।
रटने के बजाय कौशल पर जोर: यह नया सिलेबस पारंपरिक ज्ञान-आधारित रटने वाली शिक्षा से आगे बढ़कर ‘योग्यता-आधारित’ (कौशल और व्यावहारिक) शिक्षा पर केंद्रित है।
क्या सीखेंगे छात्र?: पाठ्यक्रम को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि कुशल मेडिकल लेबोरेटरी एसोसिएट्स तैयार हो सकें।
छात्र अब प्रयोगशाला परीक्षण के पूर्व-विश्लेषणात्मक (Pre-analytical), विश्लेषणात्मक (Analytical) और इसके पश्चात (Post-analytical) चरणों की जिम्मेदारी अधिक सक्षमता से निभा सकेंगे।
इसमें रोगी की सुरक्षा, गुणवत्ता आश्वासन नियमों और नैतिक व्यावसायिक प्रथाओं का सख्ती से पालन करने का प्रशिक्षण भी शामिल है।
आपको बता दें कि NCAHP ने इससे पहले 15 अक्टूबर 2025 को बैचलर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंस (BMLS) और मास्टर ऑफ मेडिकल लेबोरेटरी साइंस (MMLS) के लिए भी नए योग्यता-आधारित पाठ्यक्रम जारी किए थे, जिन्हें 2026-27 से लागू होना है।
इसके अलावा, आयोग ने 16 अन्य संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा विषयों के लिए भी नए सिलेबस अधिसूचित किए हैं, जो 2026-27 से अनिवार्य होंगे। इनमें प्रमुख हैं:
अनुप्रयुक्त मनोविज्ञान (Applied Psychology)
भौतिक चिकित्सा (Physiotherapy)
ओप्टामीटर (Optometry)
पोषण और डायटेटिक्स (Nutrition & Dietetics)
मेडिकल रेडियोलॉजी और इमेजिंग टेक्नोलॉजी
एनेस्थीसिया और ऑपरेशन थिएटर प्रौद्योगिकी
डायलिसिस थेरेपी, रेडियोथेरेपी, और आपातकालीन चिकित्सा प्रौद्योगिकी (पैरामेडिक) आदि।
NCAHP की यह नई पहल ‘केंद्रीय बजट 2026-27’ की उस घोषणा के बिल्कुल अनुरूप है, जिसमें अगले पांच वर्षों में देश में एक लाख अतिरिक्त संबद्ध और स्वास्थ्य सेवा पेशेवर तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
नए सिलेबस को देशभर में सुचारू रूप से लागू करने के लिए आयोग लगातार विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के संपर्क में है।
हाल ही में इसे लेकर 8 राष्ट्रीय वेबिनार भी आयोजित किए गए, जिनमें देशभर के शैक्षणिक संस्थानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
इस नए बदलाव से न केवल देश में कुशल पेशेवरों की मांग पूरी होगी, बल्कि विदेशों में भी भारतीय छात्रों के लिए रोजगार के नए और बेहतर अवसर खुलेंगे।
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