नमामि गंगे: 63 शहरों में नदी प्रबंधन योजना का हो रहा विस्तार
नमामि गंगे का महाभियान: गंगा बेसिन के 63 शहरों में लागू होगी ‘शहरी नदी प्रबंधन योजना’, यूपी-बिहार और उत्तराखंड में बदलेंगी नदियों की सूरत”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
नदी-केंद्रित शहरी विकास की दिशा में भारत सरकार ने एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है।
‘राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन’ (NMCG) ने ‘राष्ट्रीय शहरी मामलों के संस्थान’ (NIUA) के सहयोग से गंगा बेसिन के शहरों के लिए ‘शहरी नदी प्रबंधन योजना’ (URMP) का बड़े पैमाने पर विस्तार किया है।
‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण में 13 शहरों की योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, और अब इसे बढ़ाकर 63 शहरों तक ले जाने का खाका तैयार हो गया है।
नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत यह पहल दुनिया के सबसे बड़े पारिस्थितिक (Ecological) बहाली अभियानों में से एक बन गई है।
पीएम मोदी का ‘रिवर-सेंट्रिक’ विजन हो रहा साकार
यह पूरी पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन पर आधारित है, जिसे उन्होंने दिसंबर 2019 में कानपुर में आयोजित ‘राष्ट्रीय गंगा परिषद’ की बैठक में देश के सामने रखा था।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट आह्वान किया था कि हमें ‘शहर-केंद्रित’ (City-Centric) विकास से हटकर ‘नदी-केंद्रित’ (River-Centric) विकास का मॉडल अपनाना होगा, जिसमें नदियां नागरिक जीवन और शहरी नियोजन के केंद्र में हों।
क्या है ‘शहरी नदी प्रबंधन योजना’ (URMP) का खाका?
यह योजना मुख्य रूप से तीन प्रमुख स्तंभों— पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और समाज— पर टिकी है। इसके 10-सूत्रीय एजेंडे के तहत शहरों में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
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बाढ़ के मैदानों (Floodplains) का नियमन।
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प्रदूषण नियंत्रण और उपचारित जल (Treated Water) का पुनः उपयोग।
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आर्द्रभूमि (Wetlands) और सूख चुके जल निकायों का पुनरुद्धार।
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पर्यावरण के अनुकूल ‘रिवरफ्रंट’ का विकास।
तीन राज्यों में कैसे बदल रही है नदियों की सूरत?
विश्व बैंक (World Bank) के सहयोग से इस योजना को मुख्य रूप से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में लागू किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश (UP)
यूपी में बाढ़ नियंत्रण, प्रदूषण कम करने और सांस्कृतिक विरासत को बचाने पर जोर है।
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गोरखपुर में बाढ़ से निपटने के लिए स्पंज पार्क और ‘नीली-हरी अवसंरचना’ (Blue-Green Infrastructure) का उपयोग हो रहा है।
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शाहजहांपुर में “मेरी नदी, मेरा शहर” जन अभियान के जरिए गर्रा और खन्नौट नदियों को पुनर्जीवित किया जा रहा है।
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प्रयागराज में नदियों को “जीवंत विरासत गलियारों” (Living Heritage Corridors) के रूप में विकसित किया जा रहा है।
उत्तराखंड
पहाड़ी राज्य में पर्यटन और जनभागीदारी पर विशेष फोकस है।
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हल्द्वानी-काठगोदाम को नदी तट सुरक्षा के जरिए वापस ‘गौला नदी’ से जोड़ा जा रहा है।
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रामनगर में कोसी नदी के किनारों पर पक्षी पार्क, निगरानी टावर और इको-टूरिज्म कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं।
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ऋषिकेश में सीवरेज उन्नयन और आध्यात्मिकता के साथ पर्यावरण बहाली का बेहतरीन संगम देखने को मिल रहा है।
बिहार
बिहार में योजना का मुख्य उद्देश्य बाढ़ प्रबंधन और जल-पारिस्थितिकी (Water-Ecology) को बहाल करना है।
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बक्सर में पर्यावरण पार्क और जैव उपचार (Bioremediation) के जरिए गंगा के किनारों को संवारा जा रहा है।
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गया में फाल्गु नदी के किनारे भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) और प्रदूषित नालियों के उपचार पर काम चल रहा है।
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छपरा में बार-बार आने वाली बाढ़ से निपटने के लिए तालाबों और आर्द्रभूमि को पुनर्जीवित किया जा रहा है।
योजना से आगे बढ़कर धरातल पर उतरी कार्रवाई NMCG अब सिर्फ कागजी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन सुनिश्चित कर रहा है।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण कानपुर है, जहां ‘केंद्रीय आयुध डिपो (COD) नाले’ को एक जीर्ण शहरी जलधारा से बदलकर पारिस्थितिक रूप से स्वच्छ गलियारे (Ecological Corridor) में बदला जा रहा है।
आने वाले समय में इस योजना का लक्ष्य गंगा की मुख्य धारा पर बसे सभी 97 शहरों को कवर करना और इसे पूरे भारत की अन्य नदी प्रणालियों के लिए एक ‘राष्ट्रीय मॉडल’ के रूप में स्थापित करना है।











