A microscopic view of an indigenous semiconductor chip with the 'Aheesa' and 'Vihan' branding

स्टार्टअप ‘अहीसा’ ने स्वदेशी VEGA प्रोसेसर से बनाई ‘विहान’ चिप

आत्मनिर्भर भारत की बड़ी छलांग: स्टार्टअप ‘अहीसा’ ने स्वदेशी प्रोसेसर से बनाई ‘विहान’ चिप, सेमीकंडक्टर हब बनने की ओर भारत”

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगैन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम ने आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है।

डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (डीएलआई – DLI) योजना द्वारा समर्थित चेन्नई स्थित स्टार्टअप ‘अहीसा डिजिटल इनोवेशन्स’ (Aheesa Digital Innovations) ने स्वदेशी ‘वीईजीए’ (VEGA) माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग करते हुए अपनी ब्रॉडबैंड चिप ‘विहान’ के साथ सिलिकॉन चिप निर्माण के पहले चरण में बड़ी सफलता हासिल की है।

यह उपलब्धि भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन और निर्माण (Semiconductor Manufacturing) को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाने वाली है।

‘विहान’ चिप: गणतंत्र दिवस पर टेप-आउट, स्वतंत्रता दिवस पर मिली सफलता

अहीसा एक भारतीय फैबलेस सेमीकंडक्टर स्टार्टअप है जो ब्रॉडबैंड नेटवर्किंग और सुरक्षा के लिए चिप्स डिजाइन करता है।

‘विहान’ विशेष रूप से फाइबर ब्रॉडबैंड के लिए निर्मित एक नेटवर्किंग सिस्टम-ऑन-चिप (SoC) है। इस चिप ने गणतंत्र दिवस पर टेप-आउट पूरा किया था और अब स्वतंत्रता दिवस पर इसे पहले चरण की सिलिकॉन सफलता मिल गई है।

कंपनी का लक्ष्य 2027 तक इसे बड़े पैमाने पर उत्पादन (Production Tape Out) के लिए तैयार करना है।

भारत में 5G और ऑप्टिकल फाइबर के तेजी से हो रहे विस्तार को देखते हुए ‘विहान’ स्वदेशी समाधानों की बड़ी जरूरत को पूरा करेगी।

निवेशकों का बढ़ा भरोसा, जुटाए ₹40 करोड़

भारतीय डीप-टेक नवाचार में निवेशकों का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। उत्पाद विकास में तेजी लाने के लिए अहीसा ने इस साल की शुरुआत में तमिलनाडु इमर्जिंग सेक्टर सीड फंड (TNESSF) और अन्य निजी निवेशकों के जरिए लगभग 40 करोड़ रुपये जुटाए हैं।

सेमीकंडक्टर 2.0 और DLI योजना का प्रभाव

सेमीकंडक्टर चिप इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की लागत का 15-35% हिस्सा होती है और वैल्यू एडिशन में 50% तक योगदान देती है। इसे ध्यान में रखते हुए सरकार ने:

  • डीएलआई योजना: इसके तहत 455 संगठनों (350 शैक्षणिक संस्थान, 105 स्टार्टअप) को अत्याधुनिक चिप-डिजाइन उपकरण दिए गए हैं।

  • योजना के तहत समर्थित कंपनियों ने 30 से ज्यादा टेप-आउट हासिल किए और 100 मिलियन डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटाई है।

  • सेमीकंडक्टर 2.0: जुलाई 2026 में 1,27,500 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट के साथ ‘सेमीकंडक्टर 2.0’ को मंजूरी दी गई है,

  • ताकि देश में चिप डिजाइन से लेकर पैकेजिंग और कुशल मानव संसाधन तक पूरा इकोसिस्टम तैयार किया जा सके।

योजना के तहत अन्य भारतीय स्टार्टअप्स की बड़ी सफलताएं:

डीएलआई और चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) प्रोग्राम के तहत कई अन्य कंपनियों ने भी शानदार प्रदर्शन किया है:

  1. वर्वेसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स: स्वदेशी माइक्रोप्रोसेसर से BLDC मोटर कंट्रोलर चिप के पहले चरण में सफलता प्राप्त की।

  2. नेट्रासेमी: वीडियो एनालिटिक्स एक्सेलरेशन के साथ 12 NM विजन SoC का सफल परीक्षण किया।

  3. ऑप्टोएमएल: AI प्रोसेसिंग को तेज करने वाले 12 NM ‘कंप्यूट-इन-मेमोरी’ SoC में कामयाबी पाई।

  4. माइंडग्रोव टेक्नोलॉजीज: CCTV निगरानी कैमरों में अपनी चिप के उपयोग के लिए प्रामा इंडिया (Prama India) से साझेदारी की।

  5. इंडीसेमी: ब्लूटूथ (BLE 6) चिप मॉड्यूल के लिए ग्लोबल सर्टिफिकेट हासिल किया।

भारतीय कंपनियों की इन उपलब्धियों से स्पष्ट है कि अब भारत में डिजाइन की गई चिप्स केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे ग्राहकों के परीक्षण और वैश्विक बाजार में आपूर्तिकर्ता बनने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।