जम्मू-कश्मीर और काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशंस का व्यापक अनुभव रखने वाले वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी महेश दीक्षित को इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) का नया प्रमुख नियुक्त किया गया है। (प्रतीकात्मक तस्वीर)
महेश दीक्षित बने इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के नए चीफ, तपन डेका की लेंगे जगह; काउंटर-टेररिज्म और कश्मीर में है गहरा अनुभव”
नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट
देश की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक अभेद्य बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली ‘कैबिनेट की नियुक्ति समिति’ (ACC) ने गुरुवार को वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी महेश दीक्षित को देश की प्रमुख आंतरिक खुफिया एजेंसी, इंटेलिजेंस ब्यूरो (Intelligence Bureau – IB) का नया निदेशक (Director) नियुक्त कर दिया है।
‘The Politics Again’ की रिपोर्ट के अनुसार, महेश दीक्षित इस बेहद महत्वपूर्ण पद पर निवर्तमान आईबी प्रमुख तपन कुमार डेका का स्थान लेंगे।
वर्तमान में इंटेलिजेंस ब्यूरो में ‘स्पेशल डायरेक्टर’ (Special Director) के पद पर तैनात महेश दीक्षित, आंध्र प्रदेश कैडर के 1993 बैच के तेज-तर्रार आईपीएस अधिकारी हैं।
कार्यकाल: आधिकारिक आदेश के अनुसार, उन्हें पदभार ग्रहण करने की तारीख से दो वर्ष के कार्यकाल या अगले आदेश तक के लिए नियुक्त किया गया है।
सेवा विस्तार: आईबी निदेशक के रूप में 2 साल का कार्यकाल देने के लिए उन्हें ऑल इंडिया सर्विसेज (AIS) नियमों और वित्तीय नियमों (FR) के विशेष प्रावधानों के तहत सेवा विस्तार (Service Extension) भी दिया गया है।
वे हिमाचल प्रदेश कैडर के 1993 बैच के ही अधिकारी तपन कुमार डेका (IPS) की जगह कमान संभालेंगे।
महेश दीक्षित की गिनती भारतीय खुफिया तंत्र और आंतरिक सुरक्षा अभियानों के सबसे अनुभवी, कुशल और काबिल अधिकारियों में होती है। उनका जमीनी अनुभव ही उन्हें इस शीर्ष पद के लिए सबसे योग्य बनाता है:
कश्मीर का गहरा अनुभव: उनके करियर का एक बहुत बड़ा और महत्वपूर्ण हिस्सा जम्मू-कश्मीर की घाटियों में बीता है। उन्होंने श्रीनगर में आईबी के ‘सब्सिडियरी इंटेलिजेंस ब्यूरो’ (SIB) के प्रमुख के रूप में भी बेहतरीन सेवाएं दी हैं।
अनुच्छेद 370 के समय निभाई अहम भूमिका: साल 2019 में जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया था, तब वहां सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने और जटिल खुफिया ऑपरेशंस की कमान संभालने में दीक्षित की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही थी।
दीक्षित के पास ‘काउंटर-टेररिज्म’ (आतंकवाद निरोध) का व्यापक और व्यावहारिक अनुभव है:
घुसपैठ नेटवर्क का खात्मा: उन्होंने पाकिस्तान प्रायोजित घुसपैठ नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए कई अति-संवेदनशील ऑपरेशंस का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया है।
कट्टरपंथ पर लगाम: देश विरोधी कट्टरपंथ पर लगाम कसने और जमीनी स्तर पर खुफिया नेटवर्क को मजबूत करने में उनकी रणनीतियां बेहद कारगर रही हैं।
वामपंथी उग्रवाद: देश के लिए बड़ी चुनौती माने जाने वाले वामपंथी उग्रवाद (नक्सलवाद) से जुड़े मोर्चों पर भी उन्होंने आईबी के भीतर कई अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं।
महेश दीक्षित की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब देश के सामने आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां लगातार बदल रही हैं और तकनीक के साथ नए रूप ले रही हैं।
ऐसे में उनका यह विशाल जमीनी अनुभव देश के खुफिया तंत्र को एक नई मजबूती प्रदान करेगा।
यूपी चुनाव 2027: चिराग पासवान ने छेड़ा चुनावी बिगुल, सभी 403 सीटों पर लोजपा (रामविलास)…
वर्ल्डस्किल्स शंघाई 2026 में NIFT के छात्रों का जलवा: भारत ने जीते 2 रजत और…
'टीम एग्रीकल्चर' के दम पर दुनिया का फूड बास्केट बनेगा भारत: रबी अभियान-2026 में कृषि…
FCRA रजिस्ट्रेशन के नाम पर रिश्वतखोरी: गृह मंत्रालय के इनपुट पर दिल्ली पुलिस का बड़ा…
एशियन गेम्स 2026: शूटर नीरू ढांडा ने रचा इतिहास, इंडिविजुअल ट्रैप इवेंट में जीता भारत…
सुल्तानपुर में खौफनाक वारदात: शिक्षक संघ अध्यक्ष और उनकी पत्नी की गला रेतकर निर्मम हत्या,…