Maharashtra Politics: अजित पवार की विरासत संभालेंगी सुनेत्रा पवार; आज लेंगी डिप्टी CM पद की शपथ, पार्थ को भी मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी
“इतिहास रचने की तैयारी: महाराष्ट्र को मिलने जा रही है पहली महिला उपमुख्यमंत्री। शरद पवार गुट से विलय की अटकलों पर लगा विराम, बेटे पार्थ जाएंगे राज्यसभा”
[मुंबई] — The Politics Again ब्यूरो: संतोष सेठ की रिपोर्ट
महाराष्ट्र की राजनीति में आज एक नया अध्याय लिखा जाने वाला है। एनसीपी (NCP) प्रमुख और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद, उनकी पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार पार्टी और सरकार दोनों की कमान संभालने जा रही हैं।
शनिवार सुबह सुनेत्रा पवार अपने बेटे पार्थ पवार के साथ मुंबई पहुंच गईं और सीधे अपने दिवंगत पति के आधिकारिक आवास ‘देवगिरी’ गईं।
सूत्रों के मुताबिक, आज ही उन्हें महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री (First Woman Deputy CM) के तौर पर शपथ दिलाई जा सकती है।
आज का घटनाक्रम: क्या होने वाला है?
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विधायक दल की बैठक: आज दोपहर मुंबई में एनसीपी (अजित गुट) के विधायकों की अहम बैठक होगी। इसमें 62 वर्षीय सुनेत्रा पवार को सर्वसम्मति से ‘विधानमंडल दल का नेता’ चुना जाएगा।
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शपथ ग्रहण: नेता चुने जाने के बाद, महायुति सरकार (BJP+NCP+Shinde Sena) में उन्हें उपमुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई जाएगी।
पवार परिवार का ‘पावर प्लान’ (Power Transfer Formula) पार्टी ने अजित पवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है:
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राष्ट्रीय अध्यक्ष: कल (रविवार) होने वाली संसदीय बोर्ड की बैठक में सुनेत्रा पवार को एनसीपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी घोषित किया जा सकता है।
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पार्थ पवार की एंट्री: सुनेत्रा पवार अभी राज्यसभा सांसद हैं। डिप्टी सीएम बनने के बाद वे राज्यसभा से इस्तीफा देंगी और बारामती विधानसभा सीट (जो अजित पवार के निधन से खाली हुई है) से उपचुनाव लड़ेंगी।
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राज्यसभा सीट: सुनेत्रा पवार के इस्तीफे से खाली होने वाली राज्यसभा सीट पर उनके बेटे पार्थ पवार को संसद भेजा जाएगा।
शरद पवार को नहीं थी खबर?
अजित पवार के निधन (28 जनवरी) के बाद ऐसी अटकलें थीं कि एनसीपी के दोनों धड़ों (शरद पवार और अजित गुट) का विलय हो सकता है।
लेकिन सुनेत्रा पवार के डिप्टी सीएम बनने के फैसले ने यह साफ कर दिया है कि एनसीपी (अजित गुट) भाजपा के साथ गठबंधन में बनी रहेगी। सूत्रों का कहना है कि शरद पवार के परिवार को इस फैसले की कोई जानकारी नहीं थी।
“सुनेत्रा पवार का यह कदम सहानुभूति की लहर के साथ-साथ पार्टी को एकजुट रखने की कोशिश है। अब देखना यह होगा कि एक गृहणी और सामाजिक कार्यकर्ता से सीधे सत्ता के शीर्ष पर पहुंचीं सुनेत्रा, अजित दादा की आक्रामक राजनीति की कमी को कैसे पूरा करती हैं”











