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Maharashtra Anti Conversion Bill 2026: 10 साल की सजा, जानें नियम | The Politics Again

‘महाराष्ट्र में अवैध धर्मांतरण पर लगेगा ‘फुल स्टॉप’: 10 साल की जेल, 7 लाख जुर्माना; जानें ‘धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 2026′ के सख्त प्रावधान’

मुंबई (The Politics Again): संतोष सेठ की रिपोर्ट 

महाराष्ट्र विधानसभा के वर्तमान बजट सत्र में ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2026’ (Maharashtra Freedom of Religion Act, 2026) पेश कर दिया गया है।

इस नए बिल का मुख्य उद्देश्य राज्य में बल, धोखे, दबाव, लालच या विवाह (लव जिहाद) के नाम पर होने वाले अवैध और कपटपूर्ण धर्म परिवर्तन पर पूरी तरह से रोक लगाना है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि इस बिल में किए गए कड़े प्रावधान इसे देश के अन्य राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों की तुलना में कहीं अधिक सख्त और व्यापक बनाते हैं।

कठोर सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान

नए कानून के तहत अवैध धर्मांतरण को एक गंभीर अपराध माना गया है:

  • सामान्य सजा: अवैध धर्म परिवर्तन कराने पर अधिकतम 7 वर्ष की कैद और 1 से 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

  • विशेष मामलों में अधिक सख्ती: यदि पीड़ित कोई नाबालिग, महिला, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति या अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) समुदाय से है, या फिर सामूहिक धर्म परिवर्तन कराया गया है, तो सजा और भी कठोर होगी।

  • आदतन अपराधियों पर नकेल: बार-बार यह अपराध करने वालों को अधिकतम 10 वर्ष की कैद और 7 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना होगा।

संस्थाओं और NGO पर भी कसेगा शिकंजा

अगर किसी अवैध धर्मांतरण में किसी संस्था (Institution/NGO) की संलिप्तता पाई जाती है, तो:

  • उस संस्था का पंजीकरण तुरंत रद्द किया जा सकता है।

  • संस्था के जिम्मेदार पदाधिकारियों को भी जेल और जुर्माने की सजा होगी।

  • कानून का उल्लंघन करने वाली ऐसी किसी भी संस्था को मिलने वाली सभी सरकारी आर्थिक सहायताएं (Grants) तुरंत बंद कर दी जाएंगी।

शिकायत और कानूनी प्रक्रिया

इस बिल ने कानूनी प्रक्रिया को बेहद सख्त बना दिया है:

  • FIR कौन दर्ज कराएगा? पीड़ित व्यक्ति, उसके माता-पिता, भाई-बहन या कोई अन्य रिश्तेदार। इसके अलावा पुलिस स्वयं संज्ञान (Suo Motu) लेकर भी मामला दर्ज कर सकेगी।

  • अपराध की प्रकृति: सभी अपराध संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-bailable) होंगे, यानी बिना वारंट गिरफ्तारी होगी और आसानी से जमानत नहीं मिलेगी।

  • जांच और सुनवाई: मामलों की जांच सब-इंस्पेक्टर (SI) या उससे ऊपर के स्तर के अधिकारी ही करेंगे और सुनवाई सीधे सेशन कोर्ट (Session Court) में होगी।

वैध धर्म परिवर्तन के क्या हैं नए नियम?

अगर कोई अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहता है, तो उसे एक लंबी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना होगा:

  1. 60 दिन का नोटिस: धर्म परिवर्तन से पहले संबंधित व्यक्ति को सक्षम अधिकारी (DM/SDM) को 60 दिन पूर्व सूचना देनी होगी।

  2. आपत्ति और जांच: नोटिस के 30 दिनों के भीतर कोई भी अपनी आपत्ति दर्ज करा सकता है, जिसके बाद प्रशासन पुलिस से जांच कराएगा।

  3. घोषणा पत्र: धर्म परिवर्तन के 21 दिनों के भीतर व्यक्ति और आयोजन करने वाली संस्था को अपना घोषणा पत्र जमा करना होगा।

  4. अमान्य: निर्धारित समय में घोषणा न देने पर धर्म परिवर्तन को कानूनी रूप से ‘अमान्य’ माना जाएगा।

इसके अलावा, प्रस्तावित कानून में अवैध धर्मांतरण के पीड़ितों के पुनर्वास, भरण-पोषण और उनके बच्चों की कस्टडी (अभिरक्षा) से संबंधित सुरक्षा प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।

Santosh SETH

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