विधान परिषद समिति की वाराणसी में बैठक, जौनपुर आपदा प्रबंधन पर सख्त निर्देश
वाराणसी में यूपी विधान परिषद की अहम बैठक: जौनपुर में आपदा प्रबंधन की कसी गई नकेल, सभापति ने दिए ये सख्त निर्देश
वाराणसी/जौनपुर: द पॉलिटिक्स अगेन : वरुण यादव की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की ‘दैवीय आपदा प्रबंधन जांच समिति’ की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक बुधवार को वाराणसी के सर्किट हाउस सभागार में संपन्न हुई।
समिति के माननीय सभापति श्री लालजी प्रसाद निर्मल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में जौनपुर जिले के आला अधिकारियों के साथ आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों की गहन समीक्षा की गई। बैठक में मा. सदस्य डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी सहित अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।
समिति ने हीट वेव (लू), बाढ़, नाव दुर्घटना, आकाशीय बिजली, सर्पदंश और आगजनी जैसी आपदाओं से निपटने के लिए जौनपुर प्रशासन की तैयारियों का जायजा लिया।
जिलाधिकारी ने जिले में किए जा रहे नवाचारों की प्रस्तुति दी, जिसकी समिति ने सराहना की, लेकिन व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के सख्त निर्देश भी दिए।
समीक्षा बैठक के प्रमुख निर्देश और बड़े फैसले: सर्पदंश और आकाशीय बिजली पर कड़े निर्देश
* सर्पदंश के मामलों में राहत अनुदान सुनिश्चित करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को पुलिस की मौजूदगी में ही पोस्टमार्टम कराने के निर्देश दिए गए।
सभी प्राथमिक (PHC) और सामुदायिक (CHC) स्वास्थ्य केंद्रों पर ‘एंटीवेनम इंजेक्शन’ की पर्याप्त उपलब्धता और राहत अनुदान प्रक्रिया का प्रचार-प्रसार करने को कहा गया।
आकाशीय बिजली से बचाव के लिए ‘दामिनी ऐप’ और ‘सचेत ऐप’ के साथ-साथ घरों में तड़ित चालक (Lightning Conductor) लगाने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया।
आपदा पीड़ितों को तुरंत आवास और मुआवजा:
* माननीय सभापति ने स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा में जिनके आवास नष्ट हो गए हैं, उन्हें तत्काल ‘प्रधानमंत्री’ या ‘मुख्यमंत्री आवास योजना’ के तहत घर उपलब्ध कराए जाएं।
पीड़ितों को सरकारी सहायता राशि का शत-प्रतिशत लाभ बिना किसी देरी के सुनिश्चित किया जाए।
जलभराव, बाढ़ और संचारी रोग:
बाढ़ के कारण बार-बार टूटने वाली सड़कों के स्थायी समाधान के लिए लोक निर्माण विभाग (PWD) को ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया।
डेंगू और मलेरिया से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया गया। नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (EO) और जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) को नियमित साफ-सफाई, फॉगिंग और एंटी-लार्वा छिड़काव सुनिश्चित करने को कहा गया।
नदी के गहरे और खतरनाक स्थानों पर चेतावनी/साइन बोर्ड लगाने के निर्देश दिए गए ताकि डूबने की घटनाओं को रोका जा सके।
आगजनी और अन्य व्यवस्थाएं:
आगजनी की घटनाओं को कम करने के लिए अग्निशमन और बिजली विभाग को समन्वय स्थापित करने को कहा गया।
जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) को गरीबों को मिलने वाले राशन की गुणवत्ता की सख्त निगरानी करने और वन विभाग को पौधारोपण के बाद पेड़ों की जीवित रहने की दर (Survival Rate) बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
बैठक के अंत में जिलाधिकारी ने समिति को आश्वस्त किया कि दिए गए सभी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा।
इस दौरान एएसपी शहरी आयुष श्रीवास्तव, एडीएम (एफ/आर) परमानंद झा, बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल सहित स्वास्थ्य, पीडब्ल्यूडी, सिंचाई और पंचायती राज विभाग के तमाम आला अधिकारी मौजूद रहे।
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