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‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में इंडियन नेवी ने बढ़ाए वॉरशिप, 3 जहाज लौटे

मिडिल ईस्ट संकट : ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में इंडियन नेवी ने संभाला मोर्चा, वॉरशिप की संख्या बढ़ाई; 3 भारतीय जहाज सुरक्षित लौटे

नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट 

वेस्ट एशिया (Middle East) में युद्ध जैसे भयंकर हालातों ने दुनिया भर की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) पर संकट के बादल खड़े कर दिए हैं।

ऐसे मुश्किल वक्त में भारतीय नौसेना (Indian Navy) अपने व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए ढाल बनकर खड़ी हो गई है।

‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ इलाके में फंसे भारतीय ध्वज वाले टैंकरों को सुरक्षित निकालने के लिए नौसेना ने अपने वॉरशिप (युद्धपोतों) की तैनाती काफी बढ़ा दी है।

नौसेना के एस्कॉर्ट (सुरक्षा घेरे) में तीन बड़े भारतीय जहाज— शिवालिक, नंदा देवी और जग लाडकी— सुरक्षित रूप से भारतीय पोर्ट पर पहुंच चुके हैं।

‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत बढ़ाई गई ताकत

ओमान की खाड़ी के पास भारतीय नौसेना के ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’ के तहत 2019 से हमेशा एक वॉरशिप तैनात रहता है।

लेकिन युद्ध के मौजूदा हालातों को देखते हुए नौसेना ने इसकी संख्या पहले 1 से बढ़ाकर 3 की थी, और अब इस इलाके में नौसेना के वॉरशिप की तादाद और अधिक बढ़ा दी गई है (सुरक्षा कारणों से सटीक संख्या साझा नहीं की गई है)।

इन युद्धपोतों का मुख्य काम भारतीय फ्लैग्ड शिप्स को एस्कॉर्ट कर सुरक्षित इलाके तक पहुंचाना है।

अभी भी 22 जहाज हैं मौजूद

भारत सरकार के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फिलहाल ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के पश्चिम में 22 भारतीय जहाज मौजूद हैं, जिन्हें निकालने के प्रयास जारी हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि भारतीय नौसेना समुद्री डकैती विरोधी अभियानों और भारतीय हितों की रक्षा के लिए इस क्षेत्र में पूरी मुस्तैदी से मौजूद है।

क्या है नौसेना का ‘मिशन बेस्ड डिप्लॉयमेंट’?

2017 में शुरू किए गए इस मिशन के तहत भारतीय नौसेना दुनिया के छह अलग-अलग अहम समुद्री रास्तों पर लगातार तैनात रहती है:

  1. ओमान की खाड़ी: ‘ऑपरेशन संकल्प’ (व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा)।

  2. अदन की खाड़ी: ‘एंटी-पायरेसी ऑपरेशन’ (समुद्री डकैती रोकना)।

  3. सेशेल्स के पास: केप ऑफ गुड होप मार्ग की सुरक्षा।

  4. मालदीव के पास: समुद्री निगरानी।

  5. अंडमान-निकोबार के पास: सामरिक सुरक्षा।

  6. बंगाल की खाड़ी: म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के पास तैनाती।

इन तैनातियों के दौरान भारतीय युद्धपोत न केवल समुद्री डकैती रोकते हैं, बल्कि संकट के समय राहत और बचाव कार्यों को भी अंजाम देते हैं।

Santosh SETH

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