“छठ पर्व सूर्यदेव और उनकी बहन छठी मैया को समर्पित है। यह पर्व दिवाली के छह दिन बाद मनाया जाता है। जो सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि छठी मैया संतान की रक्षा और जीवन में खुशहाली का आशीर्वाद देती हैं”
नई दिल्ली 26 / 10 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट
छठ पूजा सूर्यदेव और छठी मैया की आराधना का पर्व है, जिसे सूर्य षष्ठी व्रत भी कहा जाता है। छठ पूजा का महापर्व की शुरुआत 25 अक्टूबर 2025 से हो चुकी है। छठ पूजा में सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा का विशेष महत्व है।
व्रती सूर्य को अर्घ्य देते हैं और परिवार की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। चलिए जानते हैं कि छठ महापर्व पर सूर्य की उपासना और छठी मैया की पूजा क्यों की जाती है।
छठ पूजा का महत्व
छठ महापर्व दिवाली के छह दिन बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। मान्यता है कि छठी मैया, सूर्यदेव की बहन हैं और नवजात शिशुओं की रक्षा करती हैं।
मार्कण्डेय पुराण में छठी देवी को प्रकृति का छठा अंश बताया गया है। छठ पर्व से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं हैं, जिनमें राजा प्रियंवद और द्रौपदी की कथा प्रमुख है। इन कथाओं से प्रेरित होकर आज भी लाखों श्रद्धालु छठ का व्रत करते हैं।
छठी मैया कौन हैं?
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार, सृष्टि की रचना करने वाली देवी प्रकृति ने स्वयं को छह भागों में विभाजित किया था। इनका छठा अंश सबसे महत्वपूर्ण माना गया, जिसे छठी देवी या छठी मैया कहा गया। इन्हें ब्रह्मा जी की मानस पुत्री और सर्वश्रेष्ठ मातृ देवी के रूप में भी पूजा जाता है।
क्यों होती है सूर्यदेव और छठी मैया की पूजा?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, छठी मैया सूर्यदेव की बहन हैं। इसलिए छठ पूजा में दोनों की संयुक्त आराधना की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि किसी शिशु के जन्म के बाद छठी मैया 6 माह तक उसकी रक्षा करती हैं और उसे बुरी शक्तियों से बचाती हैं। इसी कारण इस व्रत को मातृत्व और सुरक्षा का प्रतीक माना गया है।
राजा प्रियंवद की कहानी
एक पौराणिक कथा के अनुसार, राजा प्रियंवद की कोई संतान नहीं थी। तब महर्षि कश्यप ने उनके लिए पुत्रेष्टि यज्ञ कराया, जिससे रानी मालिनी को एक संतान तो मिली, लेकिन वह मृत पैदा हुई।
दुखी राजा जब आत्महत्या करने लगे, तब देवी षष्ठी प्रकट हुईं और उन्हें अपनी पूजा का संदेश दिया। राजा ने व्रत रखा और उन्हें जीवित संतान का आशीर्वाद मिला। तभी से संतान की इच्छा रखने वाले लोग छठी मैया का व्रत करते हैं।
द्रौपदी और पांडवों की मनोकामना
छठ पर्व से जुड़ी एक और कथा बहुत प्रचलित है, जो महाभारत काल की है। इस कथा के अनुसार, जब पांडव अपना सारा राजपाट हार गए थे, तब भगवान कृष्ण ने द्रौपदी को छठ व्रत करने की सलाह दी।
द्रौपदी ने श्रद्धा से व्रत किया और उनकी मनोकामना पूरी हुई। कहते हैं कि इस व्रत का ही प्रभाव था जो पांडवों को अपना राजपाट वापस मिल गया। तब से छठ व्रत को मनोकामना पूर्ण करने वाला पर्व माना जाता है। छठ महापर्व सूर्य की उपासना के साथ ही यह मातृत्व, संतान संरक्षण और जीवन में समृद्धि का प्रतीक भी है।
जौनपुर में चीनी की जमाखोरी पर डीएम का बड़ा एक्शन: 4000 कुंतल तय हुई स्टॉक…
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: जज बनने के लिए अब 3 नहीं, सिर्फ 1 साल…
मायावती का अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार: 'चवन्नी' वाले बयान को बताया शर्मनाक, कहा- 'गिरगिट…
तेलंगाना में बड़ा औद्योगिक हादसा: फार्मा कंपनी का रिएक्टर फटने से भीषण आग, 2 मजदूरों…
बेतिया में रोंगटे खड़े कर देने वाला सड़क हादसा: छठिहार के ऑर्केस्ट्रा में घुसी बेकाबू…
CDSCO का बड़ा खुलासा: हिमाचल में बनी 82 दवाएं गुणवत्ता जांच में फेल, देश के…