SIA officials conducting raids and investigating 1990 Kashmiri Pandit murder cases in Jammu and Kashmir

कश्मीरी पंडित हत्याकांड: SIA ने खोली 36 साल पुरानी फाइलें

कश्मीरी पंडितों के हत्यारों की अब खैर नहीं! SIA ने खोली 36 साल पुरानी फाइलें, सरवनंद कौल प्रेमी हत्याकांड में 9 ठिकानों पर छापेमारी”

श्रीनगर/नई दिल्ली: द पॉलिटिक्स अगेन : संतोष सेठ की रिपोर्ट

1990 के दशक में कश्मीरी पंडितों के खिलाफ हुए जघन्य अपराधों और हत्याओं की फाइलों पर जमी धूल अब हटाई जा रही है।

मोदी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलाने की अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हटेगी।

दशकों से बंद पड़े इन मामलों को फिर से खोला जा रहा है ताकि निर्दोष लोगों को उनके घर से बेदखल करने और हत्या करने वाले आतंकियों को कानून के कठघरे में खड़ा किया जा सके।

इसी कड़ी में, स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने प्रसिद्ध कवि सरवनंद कौल प्रेमी और उनके बेटे वीरेंद्र कौल की हत्या के मामले में बड़ी कार्रवाई की है।

SIA की ताबड़तोड़ छापेमारी

12 अगस्त 2026 को SIA ने इस दोहरे हत्याकांड की जांच फिर से अपने हाथों में लेते हुए जम्मू-कश्मीर में एक साथ 9 ठिकानों पर छापेमारी की।

इनमें राजौरी जिले के 6, जम्मू के 2 और कश्मीर का एक स्थान शामिल है। यह मामला मूल रूप से अनंतनाग के दूरू थाने में दर्ज एक पुरानी एफआईआर (FIR) से जुड़ा है।

SIA अब उन सभी संदिग्ध लोगों और संपत्तियों की तलाश कर रही है, जिनका 1990 के इस खौफनाक अपहरण और हत्याकांड से संबंध हो सकता है।

जांच एजेंसी का दावा है कि इस साजिश की बड़ी तस्वीर साफ होने लगी है और अपराध की बिखरी हुई कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।

कौन थे सरवनंद कौल प्रेमी?

कोकरनाग के सोफ शाली गांव के निवासी सरवनंद कौल प्रेमी कोई साधारण व्यक्ति नहीं थे। वह एक प्रख्यात कवि, लेखक, विद्वान, सामाजिक कार्यकर्ता और पूर्व स्कूल प्रधानाचार्य थे।

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी उनकी अहम भूमिका रही थी। वे जीवनभर राष्ट्रीय एकता और ‘कश्मीरियत’ की साझा संस्कृति के पैरोकार रहे, लेकिन आतंकवादियों को यही भाईचारे की आवाज खटकने लगी थी।

29-30 अप्रैल 1990 की वह खौफनाक रात

29 और 30 अप्रैल 1990 की दरम्यानी रात को हथियारबंद आतंकी उनके घर में घुसे। उन्होंने प्रेमी और उनके 27 वर्षीय बेटे वीरेंद्र को यह कहकर अगवा कर लिया कि उन्हें अपने आतंकी ‘कमांडर’ से मिलाना है।

अगले दिन दोनों पिता-पुत्र के शव एक पेड़ से लटके हुए मिले। उन्हें बेहद क्रूरता के साथ प्रताड़ित किया गया था।

इस भयानक घटना ने परिवार को इस कदर तोड़ दिया कि उन्हें रातों-रात अपनी मातृभूमि छोड़कर दिल्ली पलायन करना पड़ा।

सरला भट और अन्य मामलों में भी कसा शिकंजा

प्रेमी और वीरेंद्र की हत्या कोई अकेली घटना नहीं थी। 1990 के शुरुआती महीनों में वकील टीका लाल टपलू, पूर्व न्यायाधीश नीलकंठ गंजू और दूरदर्शन के निदेशक लस्सा कौल जैसी प्रमुख हस्तियों की टारगेट किलिंग की गई थी।

हाल ही में, कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट हत्याकांड में भी SIA ने बड़ी कार्रवाई की है। जून 2026 में एजेंसी ने 737 पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर जेल में बंद JKLF चीफ यासीन मलिक को इस अपहरण, यातना और हत्या की साजिश का मास्टरमाइंड बताया है।

सरला भट का मामला भी 34 वर्षों तक अनसुलझा पड़ा था।

हर पीड़ित परिवार के लिए जगी न्याय की आस

सरवनंद कौल प्रेमी के बेटे राजिंदर कौल ने इस कार्रवाई का स्वागत करते हुए मांग की है कि बाकी बचे सभी पुराने मामलों को भी इसी तरह SIA को सौंपा जाए।

उनका कहना है कि उनके पिता और भाई की हत्या असल में ‘कश्मीरियत’ और इंसानियत की हत्या थी।

SIA की इस कार्रवाई ने एक बड़ा संदेश दिया है कि न्याय में देरी का मतलब न्याय का अंत नहीं है। 36 साल का इंतजार भले ही लंबा रहा हो,

लेकिन एक उजड़े हुए समुदाय के दर्द और न्याय की पुकार को अब अंजाम तक पहुंचाने की तैयारी हो चुकी है।