कर्नाटका हेट स्पीच और हेट क्राइम बिल 2025 पास : सजा के प्रावधान

“कर्नाटक की विधानसभा ने हेट स्पीच रोकथाम बिल को मंजूरी दे दी है। इस तरह से अब कर्नाटक में इसे लेकर नए नियम लागू कर दिए जाएंगे। जानिए क्या हैं प्रावधान, कितनी मिलेगी सजा”

बेलगावी 10 / 12 / 2025 संतोष सेठ की रिपोर्ट 

कर्नाटक की सिद्धारमैया सरकार ने बेलगावी में चल रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में आज कर्नाटका हेट स्पीच और हेट क्राइम (रोकथाम और नियंत्रण) बिल, 2025 को पास कर दिया।

यह बिल हेट स्पीच और हेट क्राइम, और व्यक्तियों, समूहों और समाजों पर उनके बुरे असर को प्रभावी ढंग से रोकने और कंट्रोल करने का प्रस्ताव करता है। इस बिल के पास होने के बाद अब कानून बन जाएगा जिसके तहत सजा के प्रावधान किए गए हैं। 

1. हेट क्राइम की परिभाषा और आधार

बिल के अनुसार, हेट क्राइम (Hate Crime) का दोषी वह व्यक्ति माना जाएगा जो किसी व्यक्ति को निम्नलिखित में से किसी भी आधार पर नुकसान पहुंचाता है, नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाता है या नफ़रत फैलाता है:

  • धर्म

  • जाति

  • समुदाय

  • लिंग

  • यौन रुझान (Sexual Orientation)

  • जन्म स्थान (Place of Birth)

  • निवास (Residence)

  • भाषा

  • विकलांगता (Disability)

  • जनजाति (Tribe)

2. हेट क्राइम के लिए सजा

हेट क्राइम करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए बिल में निम्नलिखित सजा निर्धारित की गई है:

प्रावधान

विवरण

सजा (Punishment)

तीन (3) साल तक की कैद

जुर्माना (Fine)

₹5,000 रुपये तक का जुर्माना

या

कैद और जुर्माना दोनों

अपराध की प्रकृति

गैर-संज्ञेय (Non-Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable)

सुनवाई का अधिकार

फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट (First Class Magistrate) द्वारा

3. हेट स्पीच के लिए सजा

बिल में हेट स्पीच (Hate Speech) को भी परिभाषित किया गया है, जिसके लिए सजा का प्रावधान है। सजा के प्रावधान हेट क्राइम के समान ही होंगे।

  • अपराध: कोई भी व्यक्ति जो जानबूझकर कुछ भी प्रकाशित करता है, प्रसारित करता है, समर्थन करता है, या एक या एक से अधिक लोगों से इस तरह से बात करता है जिससे स्पष्ट इरादा निम्न आधारों पर नुकसान पहुंचाना, उकसाना या नफ़रत फैलाना हो:

    • धर्म, जाति, भाषा, समुदाय, और अन्य आधार (ऊपर 1 में उल्लिखित)।

  • शामिल माध्यम:

    • इलेक्ट्रॉनिक कम्युनिकेशन पर ऐसी सामग्री बनाना या उपलब्ध कराना, जो कोई भी एक्सेस कर सकता है।

    • किसी खास व्यक्ति तक पहुंचाई गई या उसे निर्देशित की गई सामग्री, जिसे हेट स्पीच का शिकार माना जा सकता है।

🌐 अन्य राज्यों के समान कानून

हेट स्पीच को नियंत्रित करने के लिए भारत में कोई एकीकृत केंद्रीय कानून नहीं है, लेकिन केंद्र और कई राज्यों में विभिन्न अधिनियमों के तहत प्रावधान मौजूद हैं।

कानून/राज्य मुख्य प्रावधान कर्नाटका बिल से अंतर
आईपीसी की धारा 153A धर्म, जाति, जन्म स्थान आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना। यह केवल समूह-आधारित शत्रुता पर केंद्रित है; कर्नाटका बिल में व्यक्ति-विशेष को नुकसान पहुँचाना भी शामिल है और आधारों की सूची (जैसे यौन रुझान) अधिक व्यापक है।
आईपीसी की धारा 295A जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कृत्य, जिसका उद्देश्य किसी भी वर्ग के धर्म या धार्मिक भावनाओं का अपमान करना हो। यह केवल धार्मिक भावनाओं पर केंद्रित है। कर्नाटका बिल सभी सूचीबद्ध आधारों (धर्म, जाति, लिंग, भाषा, आदि) को कवर करता है।
केरल पुलिस अधिनियम (Kerala Police Act) केरल में 2011 में धारा 118(d) को हेट स्पीच के लिए जोड़ा गया था, लेकिन 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया था। केरल के कानून में असफलता यह दर्शाती है कि कानून का मसौदा (Drafting) कितना महत्वपूर्ण है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह अनुच्छेद 19(2) के दायरे में रहे।

📜 कर्नाटका बिल के संवैधानिक निहितार्थ

यह बिल भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार) और अनुच्छेद 19(2) (इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध) के संतुलन पर आधारित है।

1. अनुच्छेद 19 (1)(a) के साथ संतुलन

  • अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता: संविधान प्रत्येक नागरिक को बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। हेट स्पीच पर किसी भी कानून की आलोचना हमेशा इस आधार पर की जाती है कि यह इस मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है।

  • उचित प्रतिबंध (Article 19(2)): हालांकि, यह स्वतंत्रता असीमित नहीं है। अनुच्छेद 19(2) राज्य को इस अधिकार पर “उचित प्रतिबंध” लगाने की अनुमति देता है, विशेष रूप से ऐसे मामलों में जो:

    • भारत की संप्रभुता और अखंडता

    • राज्य की सुरक्षा

    • विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध

    • सार्वजनिक व्यवस्था (Public Order)

    • शालीनता या नैतिकता

    • अदालत की अवमानना

    • मानहानि

    • या किसी अपराध के लिए उकसाना (Incitement to an offence)

2. विशिष्ट प्रावधानों पर संवैधानिक बहस

  • व्यापक आधार (Broad Grounds): इस बिल में यौन रुझान, निवास और विकलांगता जैसे कई नए आधार शामिल किए गए हैं, जो भारत में हेट क्राइम कानून के दायरे को बढ़ाते हैं। यह एक प्रगतिशील कदम है, लेकिन इसे संविधान के समानता के अधिकार (Article 14) को मजबूत करने वाला माना जाएगा, क्योंकि यह कमजोर वर्गों की सुरक्षा करता है।

  • गैर-जमानती अपराध (Non-Bailable Offence): अपराध को गैर-जमानती बनाना एक कड़ा कदम है। कानूनी तौर पर, यह सुनिश्चित करता है कि आरोपी जमानत पर बाहर आकर पीड़ितों या गवाहों को प्रभावित न कर सके, लेकिन इसका दुरुपयोग होने पर यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Article 21) के लिए चिंता का विषय भी बन सकता है।

  • ‘इरादा’ (Intention) का महत्व: बिल में “जानबूझकर” (Willfully) और “साफ़ तौर पर लगे कि उसका इरादा” जैसे शब्दों का उपयोग किया गया है। कानून में, आपराधिक इरादा (Mens Rea) साबित करना महत्वपूर्ण होता है। ये शब्द बिल को दुर्भावनापूर्ण या आकस्मिक बयानों से अलग करने में मदद करते हैं, जिससे यह संवैधानिक रूप से अधिक मजबूत होता है।

यह बिल, विशेष रूप से गैर-जमानती अपराध की प्रकृति और व्यापक आधारों (जैसे यौन रुझान, निवास, विकलांगता) को शामिल करने के कारण, हेट स्पीच और हेट क्राइम को नियंत्रित करने के लिए कर्नाटक सरकार का एक मजबूत प्रयास है।

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