झारखंड राज्य फार्मेसी परिषद ने आईपीसी के एमओयू पर किये हस्ताक्षर

“स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संस्था, भारतीय भेषज संहिता आयोग (आईपीसी), गाजियाबाद ने आज झारखंड राज्य फार्मेसी परिषद (जेएसपीसी) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए”

नई दिल्ली 16 / 11 / २०२५ संतोष सेठ की रिपोर्ट 

इसका उद्देश्य झारखंड राज्य में दवाओं के सुरक्षित और तर्कसंगत उपयोग को बढ़ावा देने, औषधि सतर्कता और मैटेरियोविजिलेंस को बढ़ाने और रोगी सुरक्षा पहलों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से सहयोगात्मक प्रयासों को मजबूत करना है।

इस समझौता ज्ञापन पर आईपीसी के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलईसेल्वन और जेएसपीसी के रजिस्ट्रार-सह-सचिव श्री प्रशांत कुमार पांडे ने दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।

इस सहयोग के माध्यम से, आईपीसी और जेएसपीसी प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया (एडीआर) रिपोर्टिंग, औषधि सतर्कता और मैटेरियोविजिलेंस तंत्र और दवाओं के सुरक्षित उपयोग से संबंधित क्षेत्रों में पंजीकृत फार्मासिस्टों की क्षमता निर्माण के लिए मिलकर काम करेंगे।

इस साझेदारी का उद्देश्य झारखंड के सभी स्वास्थ्य सेवा केंद्रों में एक मानक संदर्भ दस्तावेज़ के रूप में भारत के राष्‍ट्रीय फॉर्मूलरी (एनएफआई) का उपयोग करना और तर्कसंगत वितरण और सुरक्षित दवा तंत्र के लिए फार्मासिस्टों द्वारा इसके व्यवस्थित उपयोग को बढ़ावा देना है।

इसमें अस्पताल और सामुदायिक फार्मासिस्टों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने, संस्थागत फार्मेसी स्‍थापना में एनएफआई का अनिवार्य उपयोग करने और आईपीसी के सहयोग से राष्ट्रीय वार्षिक औषधि सतर्कता सप्ताह के आयोजन को सुगम बनाने के समन्वित प्रयास भी शामिल हैं। 

इस समझौता ज्ञापन से पेशेवर दृष्टिकोण में वृद्धि, एडीआर रिपोर्टिंग में व्यापक भागीदारी को प्रोत्साहित करने और राज्य में औषधि सुरक्षा निगरानी तंत्र के सुदृढ़ होने की उम्मीद है।

आईपीसी इन पहलों के लिए तकनीकी मार्गदर्शन और विशेषज्ञ सहायता प्रदान करेगा जबकि जेएसपीसी सहमत गतिविधियों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य सेवा प्रतिष्ठानों में फार्मासिस्टों के साथ समन्वय करेगा।

आईपीसी और जेएसपीसी के बीच सहयोग, ढांचागत क्षमता निर्माण और साक्ष्य-आधारित फार्मेसी अभ्यास को बढ़ावा देने के माध्यम से दवा सुरक्षा में सुधार और सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

Santosh SETH

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